सेल्समैन से की कॅरियर की शुरुआत; बन गए दुनिया की सबसे मँहगी कार कम्पनी के डॉयरेक्टर

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चीनी कहावत है : Be not afraid growing slowly, Be afraid only of standing still. कभी-कभी लगता है कि कोई आदमी देखते ही देखते बड़ा आदमी बन गया। लेकिन देखते ही देखते नहीं; बल्कि जब आप उसके स्तर पर जाकर महसूस करेंगे तो एहसास होगा कि कई रात उसने जगकर काटी है तो कई बार अपने अंदर की हौसले को टूटने से बचाया है , कई बार टूटा है और फिर जाकर उठा है. नकारात्मक स्थिति में खुद सकारात्मक बनाये रखा है। अपनी स्थिति से कहीं ज्यादा अपने उज्जल भविष्य पर सकारात्मकता से सोचते हुए धैर्य के साथ कड़ी मेहनत की है.

मुंबई में रहने वाले पवन शेट्टी बीकॉम की पढाई करने के बाद बेरोजगार हो गए. पैसे की काफी जरुरत थी और घर में करीब का एक रिश्तेदार भी बीमार था. कड़ी मेहनत से पढाई करने के बाद उन्होंने जब नौकरी की तलाश की तब उन्हें सेल्समैन की नौकरी मिली। 1999 में उन्हें फाइनेंसियल एक्सप्रेस में सेल्समैन की नौकरी मिल गई। वे कहते हैं कि उन्होंने यह नौकरी छह माह तक की और इस छह माह में इस कार्य में उन्हें बोलने की झिझक ख़त्म हुई. कभी-कभी उन्हें 8-8 किलोमीटर तक पैदल चलना पड़ता था और घर-घर जाकर समान बेचना होता था. एक फील्ड वर्क में कार्य कर रहे लोगों को विभिन्न प्रकार के अनुभव होते हैं.

एचएसबीसी में उन्होंने इंटरव्यू दिया और इसमें उनका चयन हो गया लेकिन किसी विशेष क्षेत्र की जानकरी नहीं थी इस वजह से जनरल जॉब में रख लिया गया।
उन्होंने MBA मुंबई के ही सिडन्ह्म कॉलेज से पूरा किया। वर्ष 2003 में MBA करने के बाद इंटर्न ज्वाइन किया। इंटर्न ज्वाइन करने के बाद उन्हें वहाँ काफी कुछ सिखने को मिला। यह दो माह का था। 2004 में यह पूरा हुआ साथ ही हिंदुस्तान यूनीलीवर कैंपस के लिए इंटरव्यू दिया लेकिन यह क्लियर नहीं हो सका क्यूंकि काफी टेंशन था. फिर टाटा मोटर्स में इंटरव्यू देने के बाद नौकरी मिल गई. वहाँ उन्होंने 2 साल कार्य किया। उनके बेहतर कार्य को देखने के बाद 2007 में फोर्ड इंडिया से ऑफर मिला और उन्होंने वहाँ ज्वाइन कर ली. यहां पर 4 वर्ष काम करते हुए उन्होंने काफी जानकारी हासिल कर ली और इस क्षेत्र में उन्हें अनुभव भी हो चुका था.

उन्होंने 2012 में लम्बोर्गिनी इंडिया में जॉब के लिए गए। यहाँ मीटिंग में पार्टिसिपेट किया तो जानकारी मिली कि यहाँ खुद से ही उत्पाद को तैयार करना है। उन्हें ऐसा महसूस हुआ जैसे कि बिना पूंजी के खुद का बिजनेस तैयार करने जा रहा हूँ. पवन कहते हैं कि उन्होंने कहा कि यहाँ 4 साल काम करने के बाद 2016 में पॉर्श इंडिया में चले गए. यहां आने की पहले उन्होंने सोचा था कि बड़े कम्पनी में कारों का डील अत्यधिक कहाँ होता है और वहां का ऑपरेशन कैसा होता है। साथ ही उन्हें वहां ज्यादा से ज्यादा सिखने का भी मौका मिलेगा। वे इस कम्पनी में डायरेक्टर बन गए.

इस तरह उन्होंने अपनी 17 साल के सफर को पूरा किया।

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