लोगों को मिल गया WHATSAPP का विकल्प, डाउनलोडिंग में बना नंबर वन

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इनदिनों वॉट्सऐप ने अपने उपयोक्ताओं को एक संदेश भेजना शुरू किया है. सन्देश यह है कि यूजर्स उसकी निजता संबंधी नीतियों को मंजूर करें. अगर ऐसा नहीं करते हैं तो 8 फरवरी 2021 के बाद वे वॉट्सऐप की सेवाओं का उपयोग नहीं कर पाएंगे. बुधवार तक गूगल प्ले स्टोर में भारत में सिग्नल मुफ्त ऐप डाउनलोड के मामले में पहले स्थान पर पहुंच गया जबकि बुधवार सुबह तक वह तीसरे नंबर पर था. और उसके दो दिन पहले 34वें नंबर पर था. यह ऐप प्ले स्टोर पर मई 2010 में आया था लेकिन दस साल बाद वह इसलिए पसंदीदा बन गया क्योंकि वह निजता के मामले में सभी संदेश प्रदाता ऐप के मुकाबले कहीं अधिक उपयुक्त है. यह किसी व्यवसायी कंपनी का ऐप न होकर एक फाउंडेशन का ऐप है जो लोगों की आर्थिक मदद से चलता है.


एप्पल स्टोर पर सिग्नल ऐप दो दिन पहले ही शीर्ष स्थान पर पहुंच गया था
. दरअसल, वॉट्सऐप की ओर से अपनी निजता संबंधी नीति में बदलाव के बाद उपयोक्ताओं के बीच सिग्नल ऐप के प्रति रुझान बढ़ा है. सूचना प्रौद्योगिकी के जानकारों का भी मानना है कि वॉट्सऐप के मुकाबले सिग्नल की निजता संबंधी नीति बेहतर है. इसके अलावा प्ले स्टोर पर ट्रेंडिंग में सिग्नल कुछ दिनों पहले से ही पहले स्थान पर बना हुआ है.

देश के जानेमाने सूचना प्रौद्योगिकी विशेषज्ञ पवन दुग्गल के अनुसार वॉट्सऐप अपनी निजता नीति में संशोधन कर रहा है जो आठ फरवरी तक लागू हो जाएंगी. उन्होंने बताया कि पहले तो वॉट्सऐप आपकी जानकारी फेसबुक और उसकी अन्य कंपनियों को ही साझा करता था लेकिन नई नीति कहती है कि आपकी संवेदनशील जानकारी साझेदार कंपनियों और अन्य सेवा प्रदाताओं के साथ भी साझा की जाएगी. इसमें आपके लेनदेन, बैंक अकाउंट, क्रेडिट कार्ड नंबर, ‘आइपी एड्रेस’ आदि शामिल हैं. इससे सीधेसीधे आपके निजता के अधिकार का हनन होगा.

दुग्गल ने कहा कि नई नीति में आपके डाटा की सुरक्षा के लिए उठाए गए कदमों की जानकारी नहीं दी गई है. इससे आपकी जानकारी का दुरुपयोग संभव है. दुग्गल ने साफ कहा कि जो प्लेटफॉर्म हमें नीति को मानने के अलावा कोई विकल्प नहीं दे रहा है तो ऐसे में उस प्लेटफॉर्म को छोड़ने में ही भलाई है. उन्होंने बताया कि वॉट्सऐप के मुकाबले सिग्नल ज्यादा सुरक्षित है और आपकी निजता का पूरा ख्याल रखता है.

वहीं, एक अन्य मशहूर आइटी विशेषज्ञ विकास पांडेय ने बताया कि वॉट्सऐप को लेकर लोग जल्दबाजी में निर्णय ले रहे हैं. उन्होंने कहा कि उन्हें लगता है कि सिग्नल वो सभी सुविधाएं उपलब्ध नहीं करा पाएगा जो वॉट्सऐप दे रहा है. हालांकि, उन्होंने सोशल मीडिया पर फेसबुक के बढ़ते एकाधिकार को खतरानाक भी बताया.

आइए आपको बताते हैं सिग्नल ऐप के बारे

दरअसल सिग्नल मोबाइल ऐप अमेरिका की नॉन प्रॉफिट संस्था सिग्नल फाउंडेशन और सिग्नल मैसेंजर की ओर से 25 मई 2010 को पहली बार प्ले स्टोर पर जारी किया गया. सिग्नल फाउंडेशन की वेबसाइट के मुताबिक उनका ऐप संदेशों को पूरी तरह से कूट भाषा में भेजता है. यह पूरी तरह से मुफ्त है और उपयोक्ताओं को कोई विज्ञापन भी नहीं दिखाया जाता है. इसका उपयोग मोबाइल के साथ डेस्कटॉप पर भी किया जा सकता है.

बताते चलें कि व्हाट्सऐप के नए पालिसी लागू होने की बात से इसके यूजर्स काफी परेशान चल रहे हैं. ऐसा माना जा रहा है कि व्हाट्सऐप के इस बदलाव के बाद लोगों की प्राइवेसी प्रभावित हो सकती है. हालाँकि व्हाट्सऐप ने यह भी कहा है कि दो लोगों की बीच की चैट्स की प्राइवेसी प्रभावित नहीं होगी और यह सिर्फ उन्हीं दो लोगों तक सीमित रहेगी जिनके बीच बातचीत हुई है. चैट्स एंड टू एंड encryption रहेगा. इसका मतलब यह हुआ कि आप जिसे भी मैसेज भेजेंगे वह आपके और उसी के बीच में रहेगा.

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