पिता करते हैं पेट्रोल पंप पर काम, बेटे ने निकाला IAS का इम्तिहान

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पिछले दिनों UPSC का परिणाम घोषित हो गया, और उसी के साथ UPSC में सफल हुए 759 छात्रों के घर खुशियों की लहर दौर गयी। जयपुर के कनिष्क कटरिया ने उच्चतम स्थान हासिल किया है। और इस परीक्षा में कई ऐसे उम्मीदवार भी थे जिन्होंने लम्बे वक़्त और कड़े मेहनत के बाद सफलता हासिल किया है। इन्हीं में से एक हैं प्रदीप सिंह, जिसके परिवार के संघर्ष और छात्र के जूनून ने सफलता हासिल करने में मदद किया। पेट्रोल पंप पर प्रदीप के पिता काम करते हैं। पहली दफा में ही 22 साल के प्रदीप सिंह ने इस परीक्षा में ही सफलता हासिल किया, जो काबिल-ए-तारीफ़ है। इन्होने Union Public Service Commission में 93वां स्थान प्राप्त किया है।

UPSC में कामयाबी हासिल करना प्रदीप का ख्वाब था। इसके लिए वो दिल्ली जून 2017 में ही आ गए थे और यहाँ के कोचिंग में उन्होंने एडमिशन ले लिया था। अपने बारे में प्रदीप ने बताते हुए कहा की मेरे माँ – पिताजी को आर्थिक तौर पर मुश्किलें होने के बाद भी उन्होंने कभी इस चीज़ को मेरे पढाई में इसे रुकावट नहीं बनने दिया। एक बातचीत में उन्होंने बताया की मेरे कोचिंग की फीस 1.5 लाख रुपये थी और घर के आर्थिक हालत भी सही नहीं थे। ऐसे में मेरे माँ-पिताजी ने मेरे कोचिंग की फीस भरने के लिए उन्होंने हमारे घर को ही बेच दिया।

प्रदीप ने इस बारे में बताया की इंदौर में स्थित हमारा मकान मेरे पिताजी की जीवन भर भी अर्जित की हुई संपत्ति थी, जिसे उन्होंने बेच दिया। ऐसा करने के लिए उन्होंने एक बार भी सोच- विचार नहीं किया की वो ऐसा क्यों कर रहे हैं। और जब ये बात मालूम हुआ तो पढाई के प्रति और ज्यादा रूचि बढ़ गयी। आपको बता दें की प्रदीप सिंह बिहार के गोपालगंज के रहने वाले हैं, और मध्यप्रदेश के इंदौर में जिनका परिवार शिफ्ट हो गया है।

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