पीएम मोदी के निर्वाचन को तेज बहादुर ने दी थी चुनौती, SC ने कर दिया ख़ारिज

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वाराणसी लोकसभा सीट से पीएम नरेंद्र मोदी के निर्वाचन को चुनौती दिए जाने वाली याचिका सुप्रीम कोर्ट ने ख़ारिज कर दिया है। चुनाव लड़ने में असफल रहे बीएसएफ के बर्खास्त हुए जवान तेजबहादुर यादव ने दोबारा से चुनाव की मांग कर दी थी. बता दें कि इलाहबाद हाई कोर्ट ने भी इस मांग को ख़ारिज कर दिया। हाई कोर्ट ने इस मामले में कहा कि चुनाव लड़ने वाला आदमी ही विजेता के निर्वाचन को चुनौती दे सकता है. इसलिए तेजबहादुर को चुनाव याचिका दायर किये जाने का अधिकार ही नहीं है.

हाई कोर्ट के फैसले के खिलाफ अपील में सुप्रीम कोर्ट पहुंचे तेजबहादुर ने 6 माह में 3 बार मामला टलवाया। 18 नवम्बर को चौथी बार मामला लगा तो 3 जजों की बेंच की अध्यक्षता कर रहे चीफ जस्टिस एस ए बोबड़े ने स्वीकार करने से मना कर दिया। उन्होंने कहा कि अपीलकर्ता को पहले ही अवसर दिया जा चुका है। प्रधानमंत्री का पद अपने आप में विशिष्ट है और देश का इकलौता पद है. उनके निर्वाचन को चुनौती दिए जाने वाले याचिका को महीनों तक नहीं लटकाया जा सकता है.

जांच में इस बात का खुलासा हुआ कि तेजबहादुर ने 2 बार नामंकन भरा. 24 अप्रैल को निर्दलीय और 29 अप्रैल को समाजवादी पार्टी के उम्मीदवार के तौर पर। एक नामांकन में उन्होंने नौकरी से बर्खास्त की जानकारी नहीं दी, दूसरे में खुद को बर्खास्त बताया। इस विरोधाभास के वजह से उनके मानना को ख़ारिज कर दिया गया. रिटर्निंग अधिकारी ने नियमों के अनुसार योग्यता का प्रमाणपत्र चुनाव आयोग से लेने को कहा. जिस पर तेजबहादुर का जवाब संतोषजनक नहीं था.

बेंच की ओर से जस्टिस ने फैसला सुनाया। उन्होंने कहा कि कोर्ट के फैसले के खिलाफ दाखिल अपील विचार के योग्य नहीं है. इसलिए इसे ख़ारिज कर दिया गया. वहीँ कोर्ट ने माना कि याचिका में कही गई बातें किसी सीट पर दोबारा चुनाव करवाने का आधार नहीं हो सकती है.

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