खतियान में नाम के साथ जुड़ेगी यह बात, जानिए सरकार की नई व्यवस्था

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बिहार में जमीन से जुड़े मामले सबसे ज्यादा है. ऐसे में सरकार यह मान रही है कि जीतनी जल्दी इसे समाप्त किया जा सके. जमीन के मामलों के कारण ही आपराधिक मामलों की संख्या में बढ़ोतरी हुई है. ऐसे में अब सरकार जमीन से जुड़े मामलों को जल्द से जल्द निपटारा करने पर विचार कर रही है. बता दें कि बिहार के ज्यादातर जिलों में विशेष भूमि सर्वेक्षण का आधार पर बन रहे खतिहान में अब रैयत के नाम के साथ डाक का पता भी दर्ज होगा. वर्तमान में सिर्फ गांव का जिक्र रहता है. पता यानी की एड्रेस नहीं रहने पर पत्राचार नहीं हो पता है ऐसे में अब विभाग रैयत से पत्राचार को लेकर डाक का पता भी ले रही है.

इस पूरे मामले को लेकर सर्वे निदेशक जय सिंह ने बताया कि पिछले दिनों गोवा के राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग के अधिकारियों के साथ अनुभव साझा कर रहे थे इसी दौरान जमीनी बातें श्रृंखला के तहत दोनों राज्यों के अधिकारियों ने वर्चुअल बैठक की. उन्होंने कहा कि खतियान को डिजिटल फार्मेट में डाला जाएगा. यह रैयत के मोबाइल से भी जुड़ा रहेगा. ताकि कोई मैसेज तुरंत जा सके. गोवा के राजस्व सचिव संजय कुमार का कहना था कि नोटिस तामिला की सही व्यवस्था होनी चाहिए.

इस पूरे मामले को लेकर अपर मुख्य सचिव विवेक कुमार सिंह ने अधिकारियों को निबंधन को बाहरी एजेंसी से कराने, निबंधन के दौरान हरेक प्लाट का यूनिक नंबर और उस प्लाट का पूरा इतिहास दर्ज करने, विभाग के वेबसाइट के जरिए नोटिस का तामिला एवं भूमि सर्वे के रवांडा माडल का अध्ययन करने की सलाह दी. मालूम हो कि अफ्रीकी देश रवांडा ने सिर्फ चार साल में भूमि सर्वेक्षण कर लिया था. अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों सर्वे के मामले में इसे मॉडल मानती हैं.

 

इस वर्चुअल बैठक में बोलते हुए गोवा के राजस्व सचिव संजय कुमार ने बताया कि गोवा में नक्शे का इस्तेमाल सिर्फ संदर्भ के तौर पर किया जाता है. उन्होंने कहा कि व्यवहार में जमीन की नापी के लिए मानक-सर्वेयर का आकलन ही मान्य होता है. गोवा में सरकार के नियंत्रण में अधिक भूमि नहींहै. उन्होने कहा कि बड़ा इलाका जंगलों से आच्छादित है. जमीन के बड़े हिस्से पर मालिकाना हक कुछ लोगों के पास है. इधर अधिकारियों का कहना है कि अधिकार अभिलेख बनाने के लिए सर्वे की जरूत नहीं है. संपत्ति का डाटा बेस. निबंधन के समय म्यूटेशन और दस्तावेजों की सूची बनाने से भी यह काम हो सकता है. इस दौरान बोलते हुए उन्होंने कहा कि कई विकसित देशों में भूमि सर्वेक्षण नहीं हुआ है. उदाहरण के रूप में बताते हुए कहा कि ब्रिटेन में अभी तक भूमि सर्वेक्ष का कार्य नहीं हुआ है. जबकि ब्रिटिश सरकार ने ही भारत में सबसे पहले भूमि सर्वेक्षण करवाया था. जिसे हम आज कैडेस्टल सर्वे कहते हैं.

अब तक जमीन यानी की किसी भी प्लॉक की चौहदी होती थी और उसका मौजा के साथ ही गांव का नाम दर्ज होता था लेकिन अब सरकार उस प्लॉट के मालिक का डाक पता भी अपने पास रखेगी. ताकी कभी पत्राचार करने की जरूरत हो तो किसी तरह की कोई परेशानी न हो. बिहार में जमीन सर्वे का कार्य तेजी से चल रहा है.

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