प्राचीन डूंगेश्वरी गुफा मंदिर

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बिहार एतिहासिक विरासत तथा धार्मिक स्थलों के कारण पर्यटन की दृष्टि से एक महत्वपूर्ण राज्य है. हिन्दू, मुस्लिम बुद्ध जैन एवं सिख धर्म के अनेक महत्वपूर्ण तीर्थ स्थल हैं जो देशभर में बिहार को एक अलग स्थान प्रदान करता है. बिहार एक ऐसा राज्य है जो देश नहीं बल्कि दुनिया को दो महत्वपूर्ण धर्म दिए. बौद्ध और जैन. बिहार में संभवतः कोई ऐसा जिला नहीं होगा जहाँ कोई पर्यटक स्थल ना हो. और यहाँ सभी पर्यटक स्थल के कुछ ना कुछ ख़ास मायने हैं. यही नहीं अगर आपको अपने रोजमर्रा के तनाव से चाहिए थोड़ा सुकून तो चलें एक सुकून भरे स्थल पर. नमस्कार बिहारी न्यूज़ में आपका स्वागत है. बिहारी विहार के आज के इस सेगमेंट में हमलोग एक गुफा के सफ़र पर चलेंगे. यह गुफा बौद्ध धर्मावलम्बियों के लिए खास मायने रखता है. बिहार में यूँ तो कई बौद्ध तीर्थ स्थल मौजूद हैं. लेकिन डूंगेश्वरी गुफा मंदिर लोगो के दिलों में एक विशेष स्थान रखता है. इस गुफा को प्राग्बोधी गुफा भी कहा जाता है.

प्राचीन डूंगेश्वरी गुफा मंदिर 12 किलोमीटर की दूरी पर गया के उत्तर पूर्व में स्थित हैं. इन गुफा मंदिरों को महाकाल गुफा मंदिरों के नाम से भी जाना जाता है. यह स्थान बौद्ध धर्म के लोगों के लिए उच्च श्रद्धा का धार्मिक स्थल है क्योंकि उनका मानना है कि भगवान गौतम बुद्ध ने बोधगया जाने से बहुत पहले इन गुफाओं में 6 वर्षों तक ध्यान लगाया था. यह गुफाएं काफी जटिल प्रतीत होती है जहाँ एक भगवान् बुद्ध की ख़ास मूर्ति भी राखी हुई है. इन गुफा मंदिरों के अस्तित्व के पीछे एक दिलचस्प कहानी है, जिसमें कहा गया है कि गौतम बुद्ध अपनी तपस्या के दौरान, बेहद कमजोर और भूखे हो गए थे. उस समय, पास के गाँव की सुजाता नाम की महिला ने उन्हें खीर खिलाया था. यह माना जाता है कि भगवान बुद्ध को यही से मध्यम मार्ग का ज्ञान प्राप्त हुआ था. दो छोटे मंदिर इस घटना की याद में यहाँ बनाये गए है. मूलतः यह हिन्दू धर्म से जुड़ी गुफ़ाएँ हैं जो हिन्दू देवी डुंगेश्वरी नाम से विख्यात है. यह गुफा पहाडो पर बनी सबसे खुबसूरत मंदिरों में से एक है जहाँ भगवान् बुद्ध के साथ हिन्दू देवी देवताओं की मूर्तियाँ लगी हैं. यहाँ भगवान् बुद्ध की विशेष मूर्ति है क्यूंकि उन्हें यहाँ ध्यान की अवस्था में कंकाल जैसे ढांचा में बनाया गया है. चीनी यात्री ह्वेनसांग ने भी अपनी यात्रा वृतांत में इस गुफा का जिक्र किया था. बोधगया आने वाले बौधिस्ट दुन्गेश्वरी मंदिर जरुर आते हैं क्यूंकि ऐसा माना जाता है की जब तक वह इस मंदिर में नहीं आयेंगे उनकी यात्रा सफल नहीं होगी. यहाँ आपको सीम शान्ति और सुख का अनुभव होगा.

श्रद्धालुयों के साथ साथ यह पर्यटकों का भी आकर्षण का केंद्र है पहाड़ी पर होने की वजह से यह युवाओं के मुख्य आकर्षण का केंद्र है क्यूंकि आपको यहाँ पहाड़ी की ट्रेकिंग करने को मिल जाता है. पहाड़ी की चोटी तक पहुँचने के लिए ट्रेकिंग करनी पड़ती है. इस मंदिर को बहुत ही खूबसूरती के साथ पहाड़ी के ऊपर बनाया गया है. जो देहने में बेहद आकर्षक है. वृद्ध पर्यटकों के लिए पालकी इत्यादि की सुविधा भी सहजता से प्राप्त हो जाती है. पहाड़ पर चढ़ने के बाद नीचे का नजारा देखते ही बनता है आस पास बड़े बड़े पेड़ों से बना घना जंगल प्राकृतिक खूबसूरती देखते बनती है. मन को चाहिए शान्ति इस मठ में आकर पर्यटकों को असीम शांति का अनुभव होता है। माना जाता है की डुंगेश्वरी पहाड़ी पर तपस्या के बाद ही सिद्धार्थ बोधगया आये थे. गया आनेवाले विदेशी पर्यटक भी डुंगेश्वरी पहाड़ी जरूर आते हैं।

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