पुष्पम प्रिया चौधरी के नए विडियो में बिहार की गरीबी, बत्तर शिक्षा व्यवस्था को दर्शाया गया

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बीते कुछ दिनों से बिहार की राजनितिक गलियों में पुष्पम प्रिया चौधरी के नाम की चर्चा सुनाई दे रही है भले ही पुष्पम प्रिया चौधरी के इशतेहार को कोई गंभीरता से नहीं ले रहा है मगर पुष्पम हर बीतते दिन के साथ लोगो में अपनी लोकप्रियता बढाने में कामयाब हो रही है. आज के इस डिजिटल दुनिया के माहौल को समझते हुए पुष्पम ने अपना अभियान सोशल मीडिया के माध्यम से शुरू किया है. जहाँ वो हर दिन अपने किसी नए विचार को सपष्ट रूप से रखती है और साथ ही लोगो को आगे आकर उनके साथ जुड़ने की अपील भी करती है. इसी क्रम में प्रिया ने हाल ही में अपने सोशल मीडिया हैंडल से एक विडियो शेयर किया किया है जहाँ उन्होंने कैप्शन में लिखा है कारवाँ नहीं हमसफ़र की तलाश है.

जारी किये गए इस विडियो में उन्होंने बताया है कि बिहार की राजनीती में जुड़ने की मूल वजह यह कि हमारे स्वर्णिम बिहार का सपना राजनीती की कसकासी में कही ध्वस्त होना है. बिहार के बच्चे आज के समय में दयनीय जीवन जीने के लिए मजबूर हो गए है. क्यूंकि वर्तमान में बिहार में बुन्यादी शिक्षा के साथ साथ लोगो को मूल ज्ञान से भी वंचित रखा गया है. वहीं स्वास्थ्य क्षेत्र की बात करते हुए उन्होंने कहा कि में बड़े से बड़े अस्पताल में स्वास्थ्य की सुविधायें बत्तर स्थिति में पहुँच चुकी है. सरकार इतनी असामर्थ्य है कि बढती जनसँख्या को अपनी ताकत बनाने के बजाये इस बढती जनसँख्या को बोझ में तब्दील कर दिया है. लोग असहाय है, झोपड़ियों में रहने पर मजबूर है.

इसके साथ ही पुष्पम प्रिया ने सरकार को भी अपने निशाने पर लिया है जिसके तहत उन्होंने कहा कि जहाँ एक तरफ बिहार की एक आबादी सड़कों पर भूखे पेट सोने को मजबूर है वहीं दूसरी तरफ ये सभी राजनितिक पार्टियां बस रैलियाँ करवाने, पोस्टर छपवाने और मिलन समारोह का हिस्सा बनने में लगी रहती है. लोगो के म्हणत की कमाई से भरे गए टैक्स पर बड़े बड़े कार्यक्रमों का आयोजन करवाती है. अगर ऐसा चलता रहा तो वो दिन दूर नहीं जब बिहार का भविष अंधेरे में नज़र आएगा, ऐसा अँधेरा जहाँ से बिहार को वापस लाना लगभग नामुमकिन हो जायेगा.

इसके आगे उन्होंने कहा कि अब मै आ गयी हूँ और इस बार चुनाव में आपके पास एक मौका है अपने प्रतिनिधि को चुनने का. इस साल जब आप वोट वोट डाले तो अपना वोट प्रगति को दे, बिहार की उन्नति को दे, बिहार के विकास को दे.

आपकी जानकारी के लिए आपको बता दे पुष्पम प्रिया चौधरी का नाम उस समय सुर्ख़ियों में आया जब उन्होंने खुद ही अपने आम को अख़बार के माध्यम से मुख्यमंत्री पद का दावेदार बताया था. इतना ही नहीं इश्तेहार के बाद तो सड़कों पर भी पुष्पम प्रिया चौधरी के पोस्टर्स और होर्डिंग्स देखने को मिलने लगे थे. जिसके बाद राजनीतीक गलियारे में हलचल की स्थिति उत्पन्न हो गयी थी.

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