राबड़ी और कवाबों का शहर सासाराम

शेरशाह सूरी का ऐतिहासिक शहर सासाराम. बिहार का यह छोटा सा शहर खाने पीने के शौकीनों के लिए जाना जाता है. यूं तो यहां अनेक तरह के व्यंजन बाजारों में मिलते हैं पर यहां की शाकाहारी राबड़ी और मांसाहारी कवाब का कोई जोड़ नहीं.

जीटी रोड से जानी बाजार तक जाने के दौरान आपको एक से बढ़कर एक खाने पाने की चीजे सड़क किनारे बिकती हुई दिख जाएगी. अनरसा, राबड़ी, बेलग्रामी, छेनामुर्की जैसी सस्ती लेकिन स्वादिष्ट मिठाइयां तो कोयले पर सिका हुआ कवाब और तवा पर भूना हुआ कवाब, फ्राई मछली की दुकानें देख कर आपके मुंह में तुरंत पानी आ जाएगा. सबसे मजे की बात तो यह है यहां ये सब चीजें सस्ती कीमतों में उपलब्ध है.

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राबड़ी दूध को खूब उबाल कर और गाढ़ा कर बनाया जाने वाला मिष्ठान्न है. ये पौष्टिक और सुपाच्य होता है. दुकानदार इसे मिट्टी की प्याली में देता है तो इसमें सोंधापन आ जाता है जो स्वाद को दोगुना कर देता है. 20 रुपये में आप राबड़ी का आनंद ले सकते हैं. जानी बाजार की राबड़ी खाने दूर दूर से लोग आते हैं. इसका स्वाद जीभ से सीधे दिल में हीं उतरता है.

सासाराम मांसाहारी लोगों के लिए बेहद आनंदायक जगह है. यहां आज भी 50 रुपये में दो पीस मटन और चावल उपलब्ध है. वो भी सुबह सुबह. थाना रोड, गोला जैसे इलाकों में काफी भीड़ लगती है मटन की दुकानों पर. लिट्टी खाने की इच्छा हो तो वो भी मिल जाता है.

शाम होते हीं शहर के अलग अलग इलाकों में कवाब की दुकानें सज जाती है. कवाब मटन और चिकेन दोनों हीं तरह का उपलब्ध हो जाता है. एक कवाब कोयले पर सेंका हुआ होता है और दूसरा तवा पर फ्राई किया हुआ. दोनों हीं बेहद लजीज होता है. कवाब के स्वाद के बारे में यही कह सकते हैं कि खाकर प्लेट फेंकने के बाद बिना उंगलियों को चाटे नहीं रह सकते हैं. ये भी 20 रुपये में उपलब्ध होता है.

कभी मौका मिले तो जरुर पहुंचिए तंग गलियों वोल इस प्राचीन और ऐतिहासिक शहर में और खाने पीने की चीजों का लुत्फ उठाइए.

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