तुम मुझे यूं भुला न पाओगे ! रफ़ी के जन्मदिन पर जानिए उनसे जुड़ी खास बातें….

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रफ़ी का नाम सुनते ही दिलों-दिमाग में एक झंकार उत्पन्न हो जाता है. दिलकश आवाज, बेपरबाह अंदाज से उनके गुजरने के बावजूद भी उनकी जीवंतता महसूस होती है. उनके गानों में भावना की गहराई महसूस करने के बाद उनके गानों को भुला पाना नामुमकिन है. लोगों को अपनी आवाजों से कायल कर देने वाले सुरों के सम्राट रफ़ी का गाना सुनते ही दिलों की धड़कन थम-सी जाती है. उनकी गानों के दौरान के शब्दों के लय और अंदाजों की जो बात है उसे बयां करने के लिए शब्दों की कौशल कम है.

रफ़ी जी ने 5000 से भी अधिक हिंदी गाने गाए. क्या हुआ तेरा वादा के लिए उन्हें नेशनल फ़िल्म अवार्ड से नवाजा गया।
6 फिल्मफेयर अवार्ड से उन्हें सम्मानित किया जा चुका है. चौदवीं का चाँद बेहद खुबसूरत गानों में से एक है जो यह पुरस्कार पाने वाला उनका पहला गाना है. ‘तेरी प्यारी प्यारी सूरत को’ के लिए उन्हें दूसरा फिल्मफेयर अवार्ड मिला। ‘‘ चाहूँगा मै तुझे साँझ ” के लिए उन्हें दूसरा फिल्मफेयर अवार्ड मिला, ‘बहारो फूल बरसाओ मेरा महबूब आया हैं’ उन्हें चौथा फिल्मफेयर अवार्ड मिला। दिल के झरोखे में तुझको बैठाकर के लिए उन्हें पाँचवा फिल्मफेयर अवार्ड मिला। उन्होंने 19 भाषाओँ में गाना गाये। कूल मिलाकर उन्होने 25,000 गाना गाए. भारत सरकार कि तरफ से ‘पद्म श्री’ सम्मान से भी नवाजा जा चुका है.

‘नील कमल’ का गाना ‘बाबुल की दुआएं लेती जा’ गाने के लिए उन्होंने कोई मेहनताना नहीं लिया क्यूंकि उनकी बेटी की भी शादी थी. इस गीत को गाते वक्त बार-बार उनके आँखों में आसूं आ जाते थे. इस गीत के लिए उन्हें ‘नेशनल अवॉर्ड’ से सम्मानित किया गया.

हिंदी सिनेमा के आरम्भ में मुकेश और मखमली आवाज के शहंशाह तलत का नाम मशहूर था। नौशाद ने फ़िल्म ‘बैजू बावरा’ के लिए रफ़ी को एक मौका दिया और कहा ‘इस फिल्म के साथ ही, तुम सबकी जुबां पर छा जाओगे’

1976 में जब फिल्‍म ‘लैला मजनू’ फ़िल्म का हर एक गाना आप नहीं भूल पाएंगे जिसे रफ़ी जी ने ऋषि कपूर के लिए गया है। हालाँकि इस फ़िल्म में ऋषिकपूर चाहते थे किशोर कुमार गाना गायें लेकिन संगीतकार मदन मोहन ने रफ़ी जी को लिया।

उन्हें बच्चों की तरह छत पर पतंग उड़ाने का शौक था , पतंग कट जाती तो बच्चों की तरह भावुक हो जाते। उन्हें खाने का भी बहुत शौक था. मोहम्मद रफ़ी काफी दिलेर इंसान थे। वे कभी भी संगीतकार से यह नहीं पूछते कि उन्हें गाने के लिए कितना पैसा मिलेगा।

उनकी गायकी को लेकर एक किस्सा मशहूर है कि किसी फकीर के पीछे वे दौड़ते चले गए। वे गाना के प्रति दीवाने थे. उस फकीर ने उन्हें आशीर्वाद दिया और वे गाना के क्षेत्र में आ गए. उनके तरकश में सभी तीर रहा करते थे। प्रेम का अल्हड़पन हो या प्रेम की परिक्वता , प्रेमिका से प्रणय निवेदन हो या हुश्न की तारीफ या फिर दिल टूटने की व्यथा उनकी कोई सानी नहीं थी। वे बेहद गरीब परिवार से थे उनके भाई का नाईका दुकान था. वे पाकिस्तान के थे और जब छोटे थे तो उनका परिवार भारत आ गया था।

उन्हें लेकर गीतकार नौशाद ने उनके निधन पर लिखा था – ‘गूंजती है तेरी आवाज अमीरों के महल में, झोपड़ों के गरीबों में भी है तेरे साज, यूं तो अपने मौसिकी पर साहब को फक्र होता है मगर ए मेरे साथी मौसिकी को भी आज तुझ पर है नाज’.

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