सियासत में गरमाई खबर, रघुवंश प्रसाद के बेटे को एम एल सी बनाने का मिल रहा ऑफर

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राष्ट्रिय जनता दल के कद्दावर नेता रघुवंश प्रसाद सिंह ने कल पार्टी से इस्तीफा दे दिया। उनके इस्तीफे दिए जाने के बाद लालू प्रसाद ने उन्हें एक इमोशनल पत्र लिखा है जिसपर उन्होंने ख़ामोशी साध ली है वहीँ दूसरी तरफ उन्होंने सीएम नीतीश को पत्र लिख कर तीन मांगे भी की है।

इस बीच सियासी गलियारों से यह खबर तेजी से फैल रही है कि राजनीती के ब्रह्म कहे जाने वाले रघुवंश प्रसाद के बेटे को सत्यप्रकाश सिंह को गवर्नर कोटे से एम एल सी बनाया जा सकता है। वहीँ रघुवंश प्रसाद के इस्तीफा देते ही उन्हें फोन आने लगे हैं. जानकारी के अनुसार उनके स्वास्थ्य को लेकर भाजपा चीफ जेपी नड्डा ने आज सुबह ही उनसे फोन पर बात की है. सीएम नीतीश कुमार ने भी उन्हें फोन करके हाल समाचार जाना है। उनके बेटे को एम एल सी बनाये जाने को लेकर सियासत में चर्चा काफी गरमा रही है लेकिन इस सभी मामलों पर रघुवंश प्रसाद खामोश हैं. पहली बार सवर्ण आरक्षण को लेकर रघुवंश प्रसाद का विरोध हुआ था और रामा सिंह के पार्टी में एंट्री से वे काफी व्यथित थे. पार्टी के कार्यशैली उन्हें पसदं नहीं आ रही थी और उन्होंने पार्टी को टाटा कह दिया।

32 सालों तक लालू प्रसाद यादव का उन्होंने साथ दिया है और पार्टी के विकास और सुदृढ़ता की नींव डाली है। उन्होंने आदर्श राजनीती पर चलकर अबतक का राजनितिक सफर पूरा किया है लेकिन लालू यादव के नेतृत्व के अभाव में वे पार्टी से बेहद असंतुष्ट होने लगे और आख़िरकार उन्होंने राजद को छोड़ दिया।

उन्होंने राजद छोड़ा है लेकिन किसी पार्टी में ज्वाइन करने की बात नहीं कही है हालांकि उनके बेटे को विधायक बनाने की चर्चा तेज हैं लेकिन रघुवंश प्रसाद इस ऑफर पर कभी भी हाँ नहीं भरेंगे। क्यूँकि अबतक उन्होंने राजनीती में काफी लम्बा सफर पूरा किया है और अपने इस सफर को आदर्श पर कायम रखा है। वे अब तक की स्वार्थ की राजनीती से ऊपर उठकर कार्य किया है और आज अगर वे पारिवारिक स्वार्थ और हित के लिए अपने पुत्र को विधायक सीट के लिए उतारने पर मुहर लगाते हैं तो उनकी अबतक की गई राजनीती में सफर और मेहनत पर पानी फिर जायेगा। अगर वे हाँ करते हैं तो लालू यादव और तेजस्वी यादव को मुद्दा मिल जायेगा कि वे अपने बेटे के विधायक पद के लिए खफा हैं और इस बात पर मिट्टी पड़ जाएगी कि उन्होंने इस्तीफा व्यक्तिगत स्वार्थ के तहत नहीं बल्कि पार्टी में उचित नेतृत्व के अभाव के वजह से दिया है।

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