रघुवंश प्रसाद: पूरी जिंदगी किसानों, वंचितों और शोषितों के लिए कर दी समर्पित

0
264

आंदोलन से खुद को उठाकर राजनीती में स्थापित करने वाले और लोकतंत्र की नींव और उसकी रक्षा के लिए हर पल खुद को समर्पित करने वाले नेता ने राजद को इस्तीफा देने के बाद अपनी साँसे भी छोड़ दी. राजद के लिए उनका प्रेम और देश में लोकतंत्र की स्थापना के लिए उनका समर्पित नेता के तौर पर पहचान बनाने वाले बिहार के वैशाली से निकले रघुवंश प्रसाद ने अपने जीवन में इतिहास रचा है। प्रेम हमेशा अपने जगह रहा और उसके बीच उन्होंने हमेशा लोकतंत्र के विरूद्ध जाने वाली हर आवाज पर सवाल और बेबाकी से विरोध खड़ा किया है.

राजनीती की हवा में उनकी छवि कभी नहीं हिली। राजद पार्टी के नेता के तौर पर अपने पूरा जीवन देने वाले रघुवंश प्रसाद सिंह का पूरा देश और देश के मंत्री और सभी पार्टियों में जो सम्मान और प्यार हैं वह उन्हें महापुरुष की श्रेणी में लाता है। लोहिया के विचार और कर्पूरी ठाकुर से लिए कर्म और संघर्ष की ताकत उन्हें माजूदा नेताओं से कहीं आगे ले जाकर विशेष सम्मान दिलाती हैं.

खुद को हमेशा जनप्रतिनिधि मानने वाले रघुंवश प्रसाद केंद्रीय मंत्री तक रहे लेकिन हमेशा गाँव के किसानों की दर्द उनके सीने में धधकती रही. सरलता और सहज दिखने वाले व्यक्तित्व के अंदर ज्ञान, विद्व्ता और महानता का सैलाब होगा यह पहली नजर में किसी को मालूम तक नहीं होता। उनके चले जाने पर पूरा देश गमगीन है और गांव के लोगों का रोकर बुरा हाल है. गाँव और किसान के लिए वे एक मजबूत आवाज रहे हैं. उनके उत्थान और सामाजिक न्याय के लिए सदा सेवा के लिए तत्पर रहे हैं. राजनीती में वे हमेशा मुद्दों पर आधारित जिंदगी जीते रहे जिसका आधार हमेशा सामाजिक न्याय और शोषितों, वंचितों एवं पिछड़ों की हक की लड़ाई रही.


मनरेगा योजना
मनरेगा योजना को लागू करवाने के बाद उन्हें राष्ट्रिय राजनीती में नई पहचान मिली। उन्होंने साल 2005 में यूपीए -1 में मनमोहन सिंह के सरकार में नेशनल रूरल एम्प्लॉयमेंट गारण्टी योजना को लागू करवाया। इसे फिजूलखर्ची करार दिया गया बावजूद इसके लिए उन्होंने सभी को राजी किया। उनके इस उपलब्धि पर कांग्रेस और यूपीए दल आजतक दाद देते हुए नहीं थकते हैं. यह योजना इतना प्रभावकारी हुई की कि दोबारा सत्ता में स्थान मिला। माना जाता है कि देश के सोशल सेक्टर के लिए सोचने का सरकार के नजरिये को इस योजना ने बदला है. सवर्ण जाति से होकर उन्होंने हमेशा पिछड़ों की राजनीती की और उनके हक के लिए हमेशा तत्पर रहे. विधवा , विकलांगों और बुजुर्गों के लिए पेंशन योजना लागू करवाने में भी उनका अहम योगदान रहा. इसी कार्यकाल में भूमि अधिग्रहण कानून में संशोधन की प्रक्रिया आरंभ होकर दूसरे कार्यकाल में फलीभूत हुई.

साल 2006 में 2 फरवरी को देश के 200 पिछड़ों जिलों में एक साथ मनरेगा को लागू किया गया। साल 2008 में यह कानून महात्मा गांधी राष्ट्रीय रोजगार गारंटी योजना(मनरेगा) भारत के सभी जिलों में लागू हो चुकी थी. इसके तहत ग्रामीणों को 100 दिन की न्यूनतम रोजगार की गारंटी दी गई थी. जिसका असर यह हुआ था कि रोजगार के लिए पलायन रुक गया था.

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here