बिहार में जमीन के खरीद-बिक्री से खत्म होगा फर्जीवाड़ा

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बिहार में जमीन के खरीद बिक्री में फर्जीवाड़े की संभावना ख़त्म होने वाली है. बिहार सरकार के राजस्व एवं भूमि सुधार मंत्री रामसूरत कुमार ने कहा है कि बिहार देश का पहला राज्य बन गया है, जहां जमीन से जुड़ा हर काम ऑनलाइन हो रहा है. इस प्रक्रिया से आम नागरिकों को काफी लाभ मिल रहा है. उन्होंने कहा कि हम उम्मीद कर सकते हैं कि सभी दस्तावेजों के डिजिटाइजेशन और ऑनलाइन प्रक्रिया के चलते जमीन की खरीदबिक्री में फर्जीवाड़ा की गुंजाइश पूरी तरह खत्म हो जाएगी. विधानसभा में विभागीय बजट पेश करने के बाद वो सरकार की उपलब्धियों की चर्चा कर रहे थे. वहीं सदन ने ध्वनिमत से राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग का 12 अरब रुपये से अधिक का बजट पारित कर दिया.

मंत्री ने सदन को बताया कि राज्य में अभी भू सर्वेक्षण और चकबंदी का कार्य साथ साथ चल रहा है और सरकार इसके लिए अभियान भी चला रही है. विभाग में कर्मचारियों और अधिकारियों की कमी दूर की जा रही है. उन्होंने बताया कि दिसंबर 2017 से सूबे के सभी अंचलों में ऑनलाइन दाखिलखारिज की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है. यह प्रक्रिया ऑनलाइन हो जाने से दाखिल खारिज के मामले में गड़बड़ी की शिकायतें कम हो रही हैं. उन्होंने कहा कि विभाग में आए 78 प्रतिशत से ज्यादा मामलों का समय पर निबटारा हो पा रहा है. जमांबदी पंजियों में रैयतों के नाम, खाता, खेसरा, लगान आदि की त्रुटियों में सुधार के लिए परिमार्जन पोर्टल शुरू किया गया है. दो मार्च तक साढ़े सात लाख से अधिक लोगों ने सुधार के लिए आवेदन दिया था. इसमें से साढ़े चार लाख से अधिक मामले निबटा दिए गए. वहीं अंचल कार्यालय से ऑनलाइन एलपीसी दिए जा रहे हैं. इसके निबटारे का प्रतिशत 92.66 फीसदी है.

 

मंत्री रामसूरत कुमार ने सदन को बताया कि देश में भू अभिलेख के डिजिटाइजेशन एवं आधुनिकीकरण के कार्यों का वार्षिक मूल्यांकन करने वाली एजेंसी एनसीइएआर यानी कि (नेशनल काउंसिल ऑफ एप्लाइड इकोनामिक रिसर्च) ने बिहार को इस मामले में सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने वाला राज्य घोषित किया है. यह वित्तीय वर्ष 2020-21 के कामकाज के मूल्यांकन पर आधारित है. उन्होंने यह भी बताया कि बिहार राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग ने अपने कामकाज में 125 प्रतिशत सुधार किया है और इस मामले में पहले स्थान पर है. वहीं इस मामले में केरल और त्रिपुरा क्रमश: दुसरे और तीसरे स्थान पर हैं.

 

बताते चलें कि बिहार में भूमि विवाद को कम करने के लिए सरकार के द्वारा नियमों में कई बदलाव किए गए हैं. सरकार का लगातार यह प्रयास रहा है कि बिहार में भूमि से सम्बंधित विवादों का निबटारा तय समय पर किया जा सके. इसके लिए अधिकारियों को कई दिशा निर्देश भी दिए गए हैं. आपको बता दे कि बिहार में ज्यादातर अपराधिक घटनाओं के पीछे कहीं ना कहीं भूमि विवाद का ही किरदार होता है.

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