ओवैसी ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले को लेकर कहा, 5 एकड़ जमीन खैरात में नहीं चाहिए

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उत्तरप्रदेश के अयोध्या में बाबरी मस्जिद-राम मंदिर को लेकर ऐतिहासिक फैसला लिए जाने के बाद AIMIM पार्टी के प्रमुख ओवैसी ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले को लेकर असंतुष्टि जाहिर की है। ओवैसी ने कहा है कि देश का नागरिक होने के नाते मुझे असंतुष्टि व्यक्त करने का अधिकार है. क्या हमें इस देश में बोलने की आजादी नहीं है। वे कोर्ट के फैसले से असंतुष्टि जाहिर करते हुए ये भी कहा है कि यह मेरा निजी विचार है।

उन्होंने कहा है कि 5 एकड़ जमीन हमें खैरात में नहीं चाहिए। ऐसे ही माँगने चले जायेंगे तो हमें इससे भी ज्यादा जमीन मिल जाएगी। अपने निजी घर का सौदा कर सकता हूँ लेकिन मस्जिद का सौदा नहीं कर सकता हूँ। मेरा विचार है कि हमें अपने हक़ के लिए लड़ाई लड़नी चाहिए। ओवैसी ने फैसले पर सवाल उठाते हुए कहा है कि जिन्होंने बाबरी मस्जिद को ढाहा, कोर्ट उसी को ट्रस्ट बनाकर मंदिर बनाये जाने का आदेश दे रही है। अगर वहाँ पर मस्जिद होती तो भी क्या कोर्ट का यही फैसला आता।

134 वर्ष पुराने विवाद पर प्रधान न्यायाधीश रंजन गोगोई की अध्यक्षता में पाँच सदस्यीय पीठ ने सर्वसम्मति से राम मंदिर के पक्ष में ऐतिहासिक फैसला दिया है और नई मस्जिद के निर्माण किये जाने के लिए 5 एकड़ जमीन सुन्नी वक्फ बोर्ड को देने का आदेश दिया है।
सुन्नी वक्फ बोर्ड ने भी इस फैसले को लेकर असंतुष्टि जाहिर करते हुए कहा है कि इस फैसले को लेकर पुनः विचार करेंगे कि कोर्ट में चुनौती देनी है या नहीं। क्यूँकि इस विवाद ने देश के सामाजिक और साम्प्रदायिक सद्भाव को तार-तार करके रख दिया है. वहीँ ओवैसी ने कहा है कि 5 एकड़ जमीन दिए जाने के मामले को लेकर सुन्नी वक्फ बोर्ड निर्णय लेगी कि क्या वे इस फैसले को मानते हैं या नहीं।

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