लोकसभा चुनाव के लिए RJD ने कराया आंतरिक सर्वे, आ सकते हैं 2004 जैसे नतीजे

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2019 लोकसभा चुनाव के लिए उल्टी गिनती शुरु हो चुकी है. बिहार के सभी 40 सीटों पर राष्ट्रीय जनता दल, कांग्रेस, NCP और हिंदुस्तानी अवाम मोरचा सेकुलर के उम्मीदवार यूपीए के बैनर तले लड़ेंगें.

अररिया लोकसभा एवं जहानाबाद, भभुआ विधानसभा उपचुनाव के नतीजों के बाद देश की जानी मानी सर्वे एजेंसियों और राजनीति विशेषज्ञों ने राज्य के सभी 40 लोकसभा क्षेत्रों के 243 विधानसभा क्षेत्रों में लोगों से उनकी राय जानी.

इस सर्वे की खास बात यह भी रही कि सर्वे टीम ने पैसेंजर ट्रेनों और बसों में भी सफर किया और लोगों से जानने की कोशिश की, कि उनके मन में क्या चल रहा है. इस सर्वे में किसान, मजदूर, दुकानदार, अल्पसंख्यक और अनुसूचित जातियों के लोगों से अलग अलग बात कर निष्कर्ष निकाला गया.

बताया जा रहा है कि ये राष्ट्रीय जनता दल का आंतरिक सर्वे है. हालांकि राजद की ओर से आधिकारिक तौर पर किसी सर्वे की बात से इंकार किया जा रहा है, जिसके मुताबिक बिहार की 40 में से 26 सीटों पर यूपीए जीत हासिल कर सकती है. वहीं भाजपा को 08, जदयू को 03, लोजपा को 01 और रालोसपा को 01 सीट मिलती हुई दिखाई जा रही है.

पार्टी को सीमांचल में जबर्दस्त लाभ बताया जा रहा है. किशनगंज, अररिया, भागलपुर, दरभंगा, कटिहार आदि लोकसभा क्षेत्रों में पक्ष में हवा बहने की बात कही जा रही है जबकि पूर्णिया लोकसभा सीट पर उम्मीदवार तय नहीं होने से यहां यूपीए कमजोर दिख रही है.

मधुबनी लोकसभा क्षेत्र में जब तक राजद नेता और यहां के पूर्व प्रत्याशी अब्दुल बारी सिद्दीकी और कांग्रेस नेता डाॅ शकील अहमद के बीच जब तक समझौता नहीं होता, यहां भाजपा के लिए वाॅक ओवर जैसी स्थिती है. झंझारपुर में स्थिती बेहतर है पर स्पष्ट नहीं है.

पूर्वी चंपारण, पश्चिमी चंपारण, मुजफ्फरपुर, शिवहर आदि क्षेत्रों में भी राजद को परेशानी है. यहा पर अभी उम्मीदवारों के नाम स्पष्ट नहीं है. पश्चिमी चंपारण से पूर्व विधायक राजन तिवारी राजद का टिकट चाहते हैं. उनके आने से यहां भाजपा को परेशानी हो सकती है.

शाहाबाद प्रक्षेत्र में बक्सर में भाजपा ने अपना उम्मीदवार नहीं बदला तो यहां से राजद उम्मीदवार जगदानंद बड़ी लीड ले सकते हैं. यहां इस बार बाहरी बनाम स्थानीय का मुद्दा हावी है. सासाराम लोकसभा क्षेत्र में कांग्रेस उम्मीदवार Meira Kumar जीत दर्ज करा सकती हैं. आरा में राजद और भाजपा के बीच कांटे की टक्कर होगी. काराकाट में राष्ट्रीय लोक समता पार्टी के अध्यक्ष Upendra Kushwaha को हराना मुश्किल होगा.

सर्वे में एक बात उभर कर सामने आई है कि अगर पूर्व राज्यपाल और औरंगाबाद के संभावित कांग्रेस प्रत्याशी निखिल कुमार को काराकाट भेजकर औरंगाबाद से किसी कुशवाहा उम्मीदवार को मैदान में उतारा जाए तो सांसद सुशील कुमार सिंह का चित्तौडगढ़ मुश्किल में फंस जाएगा. यहां सीधे अगड़ा बनाम पिछड़े की लड़ाई हो जाएगी.

गया से पूर्व सीएम जीतन राम मांझी मैदान में आए तो बेहतर होगा. नवादा में गिरिराज सिंह भारी हैं. सुपौल में कांग्रेस की रंजीत रंजन की हालत खराब है. यहां जदयू के विजेंद्र यादव की स्थिति ठीक लग रही है.

मधेपुरा, बांका, पाटलीपुत्र को पार्टी अपने लिए सेफ सीट मान कर चल रही है. वैशाल से रघुवंश जीत सकते हैं. समस्तीपुर से कांग्रेस उम्मीदवार डाॅ अशोक कुमार राम जीत सकते हैं. जमुई में उदय नारायण चैधरी चिराग पर भारी पड़ सकते हैं.

हाजीपुर में लोजपा प्रमुख रामविलास पासवान फिलहाल भारी हैं लेकिन राजद ने यहां से उनकी पुत्री आशा पासवान को मैदान में उतारा तो पासवान की राहें मुश्किल होंगीं. नालंदा जदयू के लिए सेफ सीट है.

सारण, महाराजगंज में कांटे का संघर्ष होगा. बाल्मिीकी नगर हालांकि सामान्य सीट है लेकिन यहां से कांग्रेस के पिछले उम्मीदवार पूर्णमासी राम की स्थिती बेहतर हो सकती है. बेगूसराय में भाजपा और मुंगेर में जदयू सेफ है. पटना साहिब से शत्रुध्न सिन्हा राजद के टिकट पर लड़े तो पार्टी के लिए बड़ी उम्मीद की किरण होगी. इस सीट पर राजद बेहद कमजोर स्थिति में है.

सर्वे के नतीजों से यह पता चल रहा है कि राजद के आधार वोटों के अलावा उन्हें दलित वोटों का फायदा होता दिख रहा है पर ये चुनाव तक कायम रहे, यह बहुत जरुरी होगा क्योंकि जदयू और भाजपा के साथ आने से एनडीए मजबूत तो हुआ है पर बिहार में सत्ता विरोधी लहर भी दिख रही है. एक बात और है कि अधिकांश सीटों पर यूपीए के उम्मीदवार तय नहीं हैं. आंकलन 2014 के उम्मीदवारों और 2018 की परिस्थितियों पर आधारित है.

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