राजद को सत्ताधारी पार्टी बनाने के लिए तेजस्वी ने उठाया यह कदम

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नए साल की शुरुआत होने वाली है और इस साल के खत्म होते होते बिहार के 5 वर्षों का भविष्य भी निर्धारित हो गया. एक बार फिर से नीतीश का चेहरा जीत गई और भाजपा सत्ता में आ गई. राजनितिक बुद्धिमत्ता देखते हुए भाजपा ने नीतीश कुमार के साथ ही सरकार बनाने में हित समझ और साथ ही नीतीश कुमार के चेहरे को ही सीएम के लिए फिक्स किया। यहाँ तक की उनके अगले चुनावी साल में सन्यास के खबर से पीएम मोदी ने कहा कि बिहार के बेहतर विकास के लिए उन्हें नीतीश कुमार की जरुरत है. यद्द्पि राजद को अधिक वोट हासिल हुई और वे बिहार में मजबूत पार्टी के तौर पर उभरी लेकिन बिहार की जनता ने दो खेमों में से एक को चूना। महागठबंधन और एनडीए में से एनडीए को वोट मिला। पिछला गुजरा हुआ पांच साल बिहार की राजनितिक पार्टियों का भी भविष्य तय कर गई। एनडीए और नीतीश का विकास मॉडल या यूँ कहें भरोसेमंद चेहरा ने एक बार फिर से बिहार का भरोसा जीतने में सफल रही. वहीँ यह भी साफ़ हो गया कि राजद पार्टी भी कुछ कम नहीं नही है. विपक्ष में पूरा दम है. तेजस्वी यादव लगातार सरकार पर निशाना भी साधते रहते हैं।

लेकिन इस सब के बीच राजद को बिहार के राजनीतिक मजबूती के तौर पर लाने में कमर कस ली है. तेजस्वी याव बिहार के पटल पर एक बार फिर से सत्ता रूढ़ पार्टी के तौर पर राजद को देखना चाहती है. एक बार फिर से तेजस्वी गुजरे 15 सालों को जिन्दा करने में जुटी है। लेकिन जनता का भरोसा तेजस्वी ने जरूर हासिल करने में कामयाब होते नजर आ रहे हैं लेकिन पार्टी को वही भरोसा मिलना मुश्किल लग रहा है.

तेजस्वी यादव ने राजद के पोस्टर से लालू यादव का फोटो हटा दिया। जिसे लेकर तेजस्वी पर हमले भी किये गए. वहीँ इस मुद्दे पर यह कहा गया कि अब तेजस्वी बिहार का प्रतिनिधित्व करेंगे और भावी सीएम होंगे। उन्होंने एक मायने में राजद को उसके पुराने छवि से बाहर निकालने का प्रयास किया लेकिन वे इसमें अबतक सफल नहीं हो सके.

तेजस्वी इन पांच सालों में राजद में जीवन भरने के कार्यों में जुटी मालूम पड़ती है. तेजस्वी यादव ने उन सारे गंभीर मुद्दों पर जोरदार हमला सरकार पर करते हैं जो ज्वलंत मुद्दा है। इसके साथ ही साथ सरकार को घेरने से नहीं चूकते हैं. राजद ने कल पटना के गाँधी मैदान में किसान आंदोलन को समर्थन देने का एलान कर दिया है. लेकिन इस बार पार्टी के आंदोलन का रुख कुछ और ही हो सकता है.

उन्होंने अपने आंदोलन को गाँधी के आदर्शों पर ले जाने का खुला संकेत पार्टी के कार्यकर्ताओं के बीच दे दिया है.राजद के तरफ से यह एलान किया गया है कि वे गाँधी प्रतिमा के नीचे बैठकर आंदोलन करेंगे। इसके साथ ही साथ तेजस्वी अब सीधे सीधे पीएम पर हमला बोल रहे हैं.

तेजस्वी ने किसानों के प्रति सद्भावना और चिंता जाहिर करते हुए कहा है कि कैसी सरकार है, जब देश में किसान परेशान हैं तो पीएम मोदी जी गायब हैं। किसानों को कृषि कानून पर विस्तार से कोई चर्चा नहीं की गई है. यदि उन्हें किसी तरह की कोई परेशानी आई तो वे चक्कर लगाएंगे। वहीँ पीएम को उन कर्तव्यों को दिखाते हुए हमला बोला है और कहा है कि तेजस्वी ने हमला बोलते हुए कहा है कि पीएम को बात सुननी चाहिए थी या नहीं। जनप्रतिनिधि का यही काम होता है.

अब देखना यह है कि तेजस्वी यादव जनता के दिल से डर मिटाने में सफल होते हैं या नहीं। क्या फिर से वे राजद को सत्ता में ला पाते हैं या नहीं। यह भी देखना दिलचस्प रहेगा कि आने वाले समय में वे किस रणनीति पर कार्य करते हैं।

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