जातीय जनगणना को लेकर RJD कार्यकर्ताओं ने किया प्रदर्शन, बड़े नेता रहे नदारद

0
955

जातीय जनगणना को लेकर बिहार में सियासत एक बार फिर गरमाई हुई है. मंडल दिवस के मौके पर 7 अगस्त को सडको पर जातीय जनगणना की मांग को लेकर राजद कार्यकरता उतरे लेकिन राजद के प्रमुख नेता में ना तो तेजस्वी यादव दिखे और ना ही तेज प्रताप यादव, जिसकी वजह से कार्यकर्ता का जोश भी ठंडा पर गया,

लिहाजा सरकार में बैठे लोग ये बात हमेशा से कहते आ रहे हैं कि राजद अपने किसी आन्दोलन को गंभीरता से नहीं लेती है और एक बार फिर ये बात सही साबित हो गई. 7 अगस्त को मंडल आयोग कि सिफारिशों को लागू कराने और जातिगत जनगणना कराने को लेकर राजद मुख्यालयों को घेरने कि योजना बनाई गई थी. लेकिन जिस तरह पहले के आन्दोलन में होता आ रहा है ठीक उसी प्रकार ऐन वक़्त पर सेना के सेनापति ही गायब दिखे,आपको बता दे कि पार्टी कार्यालयों में कार्यकर्तायों का हुजूम तो उमड़ा लेकिन वहां राजद के कोई नेता नज़र नहीं आये, ना ही तेजस्वी और तेज प्रताप यादव और ना ही कोई अधिकारी, इस विरोध का हिस्सा बना.

गौरतलब है कि आज से कुछ दिन पहले भी राजद ने प्रखंडो और जिला मुख्यालयों कि घेराव की बात की थी, लेकिन ठीक आन्दोलन के दिन तेजस्वी यादव दिल्ली रवाना हो गए. परिणाम यह हुआ कि कार्यकर्ताओं का उत्साह ठंडा पड़ गया. और इस बार भी मंडल दिवस के अवसर पर राजद के आन्दोलन में दोपहर तक नेता प्रतिपक्ष के नही पहुचने पर, जदयू प्रवक्ता डॉक्टर अजय आलोक ने तंज कसते हुए कहा कि मंडल के नाम पर ये लोग शासन करते रहे लेकिन असली मंडल और यादव तो हमारी पार्टी में है, ये लोग नकली यादव हैं.

जदयू प्रवक्ता ने तेजस्वी के लड़े के बा, करे के बा और जीते के बा, बयान पर मजे लेते हुए कहा कि सबकुछ करे के बा लेकिन मैदान में नहीं रहे के बा, सबकुछ करने के लिए मैदान में उतरना पड़ता है, इसके साथ ही उन्होंने कहा कि जहाँ तक मंडल कमीशन कि बात है तो इसे बीपी सिंह ने लागू किया था, लालू जी ने उल्टा हक मार लिया, उसमे भी एनेक्सर वन और एनेक्सर टू उन्होंने नहीं लागू किया था, यह नीतिश कुमार जी ने लागू किया था, इसलिए मंडलवाद का ज्ञान वो हमें ना दे, इसके साथ ही जदयू प्रवक्ता कहते हैं कि सही मायने में तो मंडल के उत्तराधिकारी हमारी पार्टी में हैं , निखिल मंडल.

जानकारी के लिए आपको बता दे कि तत्कालीन पीएम वीपी सिंह के कार्यालय में 7 अगस्त 1990 को मंडल कमीशन की रिपोर्ट देश में लागू हुई थी, इसके बाद ही सरकारी नौकरियों में ओबीसी के लिए 27 प्रतिशत आरक्षण लागू करने का रास्ता साफ़ हुआ था.

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here