महागठबंधन में राजद और कांग्रेस के मिले सुर, रालोसपा की बढ़ी मुश्किलें

0
227

राजद अपने जिद्द पर है और यह वजह है कि महागठबंधन की मुश्किलें बढ़ी हुई है। राष्ट्रिय जनता दल इस चुनावी साल में सियासत पर कब्जा जमाने का पूरा मन बना लिया है और यही वजह है कि इसके लिए वह तरकीब को अपना रही है जो उसे सियासी कुर्सी तक पहुंचा सके। महागठबंधन में शामिल पार्टियों के बीच मतभेद और तकरार ख़त्म होने का नाम ही ले रहा है। चुनावी साल से पहले महागठबंधन मिलकर नीतीश सरकार की खामियों पर हमला बोल रहे थे लेकिन अब चुनावी समय में टिकट से बंटवारे को लेकर परेशानी का बयार समाप्त होने का नाम ही नहीं अब ले रहा है। हिंदुस्तान आवाम मोर्चा पार्टी के प्रमुख जीतन राम मांझी अलग होकर जदयू का थामन थाम चुके हैं।

वहीँ अब रालोसपा प्रमुख उपेंद्र कुशवाहा की मुश्किलें बढ़ी हुई है। राजद ने अपना स्टैंड पहले की साफ कर चुका है जिस वजह से कुशवाहा की मुसीबतें बढ़ी हुई है।
सूत्रों के मुताबिक खबर यह आ रही है कि पहले राजद और कांग्रेस के बीच सीट बंटवारे की समस्या सुलझ जाएगी तब जाकर अन्य दलों पर विचार किया जायेगा। वहीँ कुशवाहा सम्मानजनक सीट पाने के लिए बेताब दिख रहे हैं. इस वजह से कुशवाहा दिल्ली जाकर कांग्रेस के नेताओं से भी बात कर चुके हैं.
राजद 160 सीटों पर उम्मदीवार उतारने का एलान कर चुका है वहीँ कांग्रेस भी 90 सीटों की बात पर अदि हुई है। अगर यह दोनों पार्टियां आपस में सुलह कर लें तो अन्य की बात हो। रालोसपा और वीआईपी इसी इंतजार में है कि यह समस्या समापत हो और उनके बारे में भी निर्णय लिया जाये।


महागठबंधन में सीटों का पेंच इसलिए भी फंस रहा है क्योंकि राजद ने पहले ही कह दिया है कि वो 160 सीटों पर खुद चुनाव लड़ेगी वहीं कांग्रेस भी 90 सीटों की डिमांड पर अड़ी है. दोनों पार्टियां अपने अपने हिस्सो को सुलझाने में लगी हैं लेकिन इस बीच रालोसपा और वाआईपी दोनों पार्टियों टकटकी लगाएं बैठी हैं कि उनके बारे में कब फैसला लिया जाएगा.

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here