संबित पात्रा ने बिहार में विपक्ष पार्टी को दिखाई हैसियत, कहा – एक लोटा पानी से राजद का होगा तर्पण

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विधानसभा चुनाव के वजह से राज्य में दो विरोधी पार्टियों के बीच जमकर बयानबाजी का दौर चालू है. तर्कों को आधार बनाकर राजनीति की नाव पार करने को बेताब राजनितिक पार्टिया एक दूसरे के उस कमजोर बिंदु पर ताबड़तोड़ हमला कर रही है जिससे जनता के निर्णय को अपने पक्ष में किया जा सके.

विपक्ष पार्टी हमलावर होकर सरकार के 15 सालों के शासनकाल पर प्रश्न खड़ा कर रही है वहीँ लगातार सत्तारूढ़ दल राजद के काले पन्नों को खोल रही है. माजूदा दौर में तेज प्रताप यादव के वजह से राजद की छवि और भी धूमिल रघुवंश प्रसाद पर टिप्पणी करने से हुई है. रघुवंश प्रसाद ने राजनीती, लोकतंत्र और जनप्रतिनिधि के लिए जो कुछ भी बेदाग होकर किया है उससे उनकी महत्ता पूरे बिहार में जनमानस के मन में रही है।

भाजपा के रष्ट्रीय प्रवक्ता संबित पात्रा ने बिहार चुनाव के मद्देनजर अपना बयान दिया है। या यूँ कहें कि संबित पात्रा ने राजनीती के सिक्के से राजद और कांग्रेस पर करारा चोट किया है.

साबित पात्रा ने कहा है कि राज्य में भाई-भाई के बीच लड़ाई है, देश में भाई-बहन के बीच लड़ाई है. चीन से जब तनाव चल रहा था और हमारे 20 जवान शहीद हुए थे उनकी चिताएं ठंडी भी नहीं पड़ी थी कि राहुल गाँधी राजनीति करते हैं और देश को चीन के आगे सरेन्द्र बता रहे थे.क्या यह राजनीति का समय था। बिहार की जनता उन्हें इसी चुनाव में सबक सिखाएगी।

पात्रा ने चुनाव के मद्देनजर और राजद पर आक्रामक रुख अख्तियार करते हुए यह भी कहा है कि यह चुनाव विकास बनाम जेल की लड़ाई है. एक तरफ विकास पुरुष नरेंद्र मोदी है और दूसरी तरफ विकास बाबू नीतीश कुमार; और महत्वपूर्ण विपक्ष का जो नेता है वह जेल में अपने करतूतों के वजह से है.

राजद पर कटाक्ष करते हुए संबित पात्रा ने कहा है कि जहां तक राजद की बात है, यहाँ न तो लालटेन में तेज हैं और न ही प्रताप है। यह बस नामों में हैं।

रघुवंश प्रसाद के निधन पर शोक जताया है और तेजप्रताप यादव से कहा है कि राजद को समंदर बताकर जिस एक लोटा पानी को निकाला है उसी से राजद के राजनीतिक पर तर्पण होगा।

रघुवंश प्रसाद के निधन के बाद उनके गुजरने से राजनीति और वंचितों को क्षति हुई है लेकिन राजद पर अब वे कहर बनकर मानों गिर रहे हैं. तेजस्वी के कार्यशैली से नाराज रघुवंश प्रसाद ने इस्तीफा दे दिया। चुनावी राजनीति में यूँ तो सत्तारूढ़ दल राजद के धूमिल पन्नों को तीर बनाकर राजद पर वार-प्रहार के सिलसिले में अब तक रहे थे लेकिन मौजूदा समय में रघुवंश प्रसाद का मुद्दा उन्हें राजद के खामियों और चुनावी हमला के लिए एक बड़ा हथियार दे गया.

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