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कोरोना जैसी महामारी जिसने हम सभी के जीवन को झकझोर कर रख दिया था. एक समय के लिए लगा की शायद हमे इस महामारी से निजात मिल चूका है. लेकिन बीते कुछ दिनों में कोरोना की लहर फिर से उठ गयी है. एक बार और चीन में आई इस लहर से अफरातफरी का माहौल हो गया है. ऐसे में भारत पहले से ही इससे निपटने के लिए पूरी तैयारी में जुटा है. आने वाले 27 दिसम्बर यानि मंगलवार को देश भर के सभी अस्पतालों में कोरोना से निपटने के लिए और आपातकालीन स्थिति में तैयार रहने के लिए एक मॉक ड्रिल आयोजित की जानी है. मनसुख मांडवीया जो की केंद्रीय स्वास्थ मंत्री हैं वो सरकारी अस्पतालों का जायजा लेंगे. मनसुख मांडवीया ने कोरोना को लेकर भारत की क्या तैयारी है इस बात का स्वतः संज्ञान लेकर राज्यसभा में गुरुवार को बयान दिया था. उन्होंने कहा की लगातार स्थिति पर नज़र रखी जा रही है. इस बात पर खास ध्यान दिया जा रहा की वायरस का कोई अज्ञात स्वरूप भारत में प्रवेश नहीं कर सके. दरअसल अभी चीन और भारत के बीच कोई भी सीधी उड़ान नहीं हो रही फिर भी लोग दूसरे रास्तों से प्रवेश कर जाते हैं. बीते मंगलवार को केंद्र सरकार ने सभी राज्यों से कहा की वैरिएंट को ट्रैक करें ताकि पॉजिटिव मामलों की ट्रैकिंग जीनोम सिक्वेंसिंग के लिए की जा सके.

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आपको बता दें की चीन के अलावा यह संक्रमण एक बार फिर से अमेरिका, जापान, ब्राजील और दक्षिण कोरिया जैसे देशों में भी बढ़ रहा. एरिक फिगल डिंग जो की महामारी के विशेषज्ञ हैं उन्होंने इस बात का दावा किया है की आने वाले तीन महीने में चीन की लगभग 60 फीसदी और दुनिया की लगभग 10 फीसदी आबादी कोरोना से संक्रमित हो सकती है. इसके अलावे बीते वर्ष अमेरिका के एक हेल्थ रिसर्च इंस्टीट्यूट में भी यह दावा किया गया था की आने वाले साल में चीन में इस महामारी से लगभग 10 लाख लोग मारे जा सकते हैं.

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मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक भारत सरकार द्वारा भारत बायोटेक की नेजल वैक्सीन को मंजूरी मिल गयी थी. आपको बता दें की इस वैक्सीन का इस्तेमाल बूस्टर डोज के रूप में किया जायेगा. इस वैक्सीन को सबसे पहले प्राइवेट अस्पतालों में उपलब्ध करवाया जाना है. साथ ही साथ इस वैक्सीन को कोविड 19 के वेकसीनेशन प्रोग्राम में भी शामिल किया जायेगा. केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने बताया की देशभर में लगभग 220 करोड़ लोगों को कोरोना वैक्सीन लगाई जा चुकी है. मिली जानकारी के अनुसार केवल देश के प्रधानमंत्री ही नहीं इस मामले को लेकर देश के अलगअलग राज्यों के मुख्यमंत्री भी कोरोना से उपजे हालात की समीक्षा करने और भविष्य में अचानक से आने वाले आपातकाल से निपटने के लिए उच्च स्तरीय बैठक बुला रहें. केंद्र सरकार द्वारा राज्य सरकार से कोरोना टेस्टिंग के समय कोरोना मरीजों की जीनोम सिक्वेंसिंग बढाने के लिए कहा था. दरअसल जीनोम सिक्वेंसिंग एक ऐसी प्रक्रिया है जिसके तहत किसी विशिष्ट जीव के बायोडाटा को एकत्र किया जाता है. इसके बाद सिक्वेंसिंग की जानकारी ली जाती है की वह कैसा दिखता है और उसकी प्रकृति क्या है. वायरस भी एक प्रकार के कोशिका श्रेणी में ही आता है. आपको बता दें की जीनोम सिक्वेंसिंग की मदद से पहली बार कोरोना के नये स्ट्रेन के बारे में पता चला था. उम्मीद करते हैं आपको आज की यह जानकारी महत्वपूर्ण लगी होगी. हमारे साथ बने रहने के लिए आपका धन्यवाद.

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