सुशील मोदी: जबतक समाज में भेदभाव ख़त्म नहीं, तबतक आरक्षण ख़त्म नहीं

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मंगलवार को श्रीकृष्ण मेमोरियल हॉल (Shri Krishna Memorial Hall) में आयोजित 14वें राज्य स्तरीय रविदास(Ravidas) कार्यकर्ता सम्मेलन को उपमुख्यमंत्री सुशील मोदी (Sushil Modi) ने सम्बोधित किया।

डिप्टी सीएम ने इस सम्बोधन में कहा है कि जबतक समाज में भेदभाव रहेगा, तब तक आरक्षण नहीं हट सकता है. आरक्षण की व्यवस्था 25 या 50 या इससे भी अधिक वर्ष तक चलेगी। बिहार सरकार प्रोमोशन में आरक्षण देने की पक्षधर है. यह मामला सुप्रीम कोर्ट में चल रहा है। इसका फैसला अगले महीने आ सकता है।
डिप्टी सीएम सुशील मोदी अपने विरोधियों पर निशाना साधते हुए कहा है कि भाजपा की सरकार जबतक है तब तक कोई भी आरक्षण समाप्त नहीं हो सकता है. जब तक प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह की सरकार है, तब तक कोई आरक्षण खत्म नहीं कर सकता है. एससी-एसटी वर्ग में कभी भी क्रिमी लेयर का प्रावधान लागू नहीं होगा. ससी-एसटी अत्याचार निवारण अधिनियम में 23 नये प्रावधान को मौजूदा सरकार द्वारा सम्मिलित किया गया है.

वहीँ स्वास्थ्य मंत्री मंगल पांडेय ने कहा कि सीएम नीतीश कुमार(Nitish Kumar) और डिप्टी सीएम सुशील मोदी (Sushil Modi) की सरकार गरीबों के प्रति समर्पित है. अम्बेडकर(Ambedkar) को सम्मान देने और श्रद्धाभाव व्यक्त करने के उद्देश्य से भाजपा(BJP) ने पंच-तीर्थ बनाया है. इस कार्यक्रम को पर्यटन मंत्री कृष्ण कुमार ऋषि, विधायक अरुण कुमार सिन्हा, एमएलसी राधामोहन शर्मा, प्रवक्ता प्रेम रंजन पटेल, छोटे मुखिया, सुबोध पासवान, संजय दास समेत अन्य ने संबोधित किया. डिप्टी सीएम लालू यादव(Lalau YAdav) और राबड़ी देवी (Rabdi Devi) के कार्यकाल को लेकर कहा है कि 2005 के बाद से एक भी दलित नरसंहार की घटना नहीं हुई है. लेकिन कांग्रेस लालू-राबड़ी के शासनकाल में बथानी टोला, बाथे, शंकर विघा, मियांपुर समेत अनेक नरसंहार हुए थे.

एनडीए (NDA) की सरकार ने 16 प्रतिशत आरक्षण पंचायत चुनाव में लागू किया और दलितों को करीब तीन हजार मुखिया, सरपंच समेत अन्य पंचायती राज प्रतिनिधियों के पद पर कार्य करने का अवसर दिया.लालू-राबड़ी के शासनकाल में बिना आरक्षण दिये ही चुनाव करा दिया गया.
डिप्टी सीएम ने दलितों के उत्थान में राज्य सरकार की तरफ से चलाये जाने वाले सभी प्रमुख योजनाओं के बारे में जानकारी दी. यह भी बताया गया कि इस बार 64वीं बीपीएससी की प्रारंभिक परीक्षा पास करने वाले 1626 दलित छात्रों को 50-50 हजार तथा 2018 यूपीएससी की प्रारंभिक परीक्षा पास करने वाले 44 दलित छात्रों को एक-एक लाख रुपये की सहायता दी गयी है. दलित समुदाय की आबादी राज्य में 16 फीसदी है, जिसमें 23 जातियां शामिल हैं.

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