बिहार विधानसभा के विशेष सत्र में संसदीय व्यवस्था में SC/ST आरक्षण प्रस्ताव मंजूर

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बिहार विधानसभा (Bihar Assembly) का एक दिवसीय विशेष सत्र सोमवार को बुलाया गया. जिसमें सदन में एससी-एसटी SC-ST को ससंदीय व्यवस्था में दस साल के लिए आरक्षण दिए जाने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी गई. मुख्यमंत्री नीतीश कुमार (CM Nitish Kumar) ने इस बिल पर समर्थन के लिए सबको धन्यवाद दिया. सदन के शुरु होते ही विपक्ष ने सीएए (CAA) और एनआरसी (NRC) के मामले को लेकर हंगामा किया.

आपको बता दें कि सदन में बिहार में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने संसदीय व्यवस्था में SC/ST को 10 साल बड़ाने का प्रस्ताव पेश किया. जिसपर सभी दल के नेताओं ने अपनी अपनी बात रखी. और प्रस्ताव को सदने से मंजूरी मिल गई. इसके साथ ही मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने कहा कि हम सीएए को लेकर विशेष रुप से चर्चा करेंगे.

एनआरसी को लेकर सदन में हो रहे हंगामें पर बोलते हुए सीएम नीतीश कुमार ने कहा कि इसका अभी कोई औचित्य ही नहीं है तो बेवजह इसे लेकर हंगामा किया जा रहा है. इसके बावजूद यदि सभी चाहेंगे तो सदन में इस पर भी चर्चा होगी. साथ सीएम ने कहा कि हम भी चाहेंगे की जातिगत जनगणना हो. आपको बता दें कि राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव जातिगत जनगणना की मांग करते रहे हैं.

सीएम नीतीश कुमार के द्वारा जब SC/ST संसदीय व्यवस्था में आरक्षण 10 साल तक बढ़ जाने के बाद बिहार के उपमुख्यमंत्री सुशील कुमार मादी (Sushil Kumar Modi) ने कहा कि आरक्षण की वजह से लोग विधानसभा -लोकसभा (Assembly – Lok Sabha) में आएंगे, जो अच्छा प्रस्ताव था. इसीलिए जरूरत के हिसाब से आरक्षण बनाए रखना होगा. अंतिम तबके के लाभान्वित होने पर ही आरक्षण खत्म होगा. उन्होंने यह भी कहा कि समाज में जब तक भेदभाव है आरक्षण रहेगा.

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इसके बाद नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव (Tejashwi Yadav) ने SC/ST आरक्षण प्रस्ताव का समर्थन किया और कहा कि जातीय जनगणना (Ethnic census) पर भी विशेष सत्र बुलायी जाए. उन्होंने नागरिकता संशोधन कानून पर विरोध प्रकट करते हुए कहा कि ये कौन सा कानून है कि हमें अब अपने नागरिक होने का सबूत देना होगा. हम एनआरसी-एनपीआर को बिहार में कभी लागू नहीं होने देंगे.

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