गया में खुला दादी और अम्मा का स्कूल, पोते और पोतियां…….

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कहते है सिखने के लिए किसी उम्र की जरूरत नहीं होती | इसी मुद्दे को गंभीर रूप दिया है बिहार के बोधगया स्थित बतसपुर गांव में चलाये जा रहे स्कूल ने, जो कि एक जापानी निक्को संस्था द्वारा संचालित किया जा रहा है | मजे की बात तो ये है कि इस स्कूल में दादा- दादी और मम्मी- पापा पढ़ने जा रहे है, जिन्हे छोड़ने उनके बच्चें और पति भी जाते है |

स्कूल पढ़ने जाने वाली एक महिला के पति खेतो में काम करते है, जो उनसे घर की चाबी लेने आये थे | जिसके दौरान पूछताछ की गयी तो उन्होंने बताया कि मुझे काफी खुशी है कि मेरी पत्नी यहां पढ़ने आती है | जब उनकी पत्नी स्कूल आती है घर का सारा काम भी करके आती है जो मुझे बहुत अच्छा लगता है |

वहीं संस्था से जुड़े कोर्डिनेटर ने बताया कि जापानी संस्था के द्वारा सभी को शिक्षित करने की योजना बनाई गयी है | जिसमे मुख्यतः वैसी महिलाओ को शिक्षित करना है जो कभी स्कूल नहीं गईं हैं | अब धीरे-धीरे स्कूल में आने वाली महिलाओं की संख्या दिनबदिन बढ़ती ही जा रही है |

इस स्कूल में पढ़ने वाली महिलाओं ने बताया कि वह पढ़ी-लिखी नहीं थी, जिसका उन्हें बहुत ही अफ़सोस होता था | लेकिन जब उन्हें मौका मिला तो वे भी पढ़ने के लिए आगे आईं | वहां की महिलाओं ने बताया कि जब वे पढ़ने के लिए स्कूल आने लगी तो हमारे गांव की ही कुछ महिलाओ ने उन्हें तना देना शुरू कर दिया कि बुढ़ापे में पढ़ने की क्या जरुरत है ? इन सभी के वावजूद ताने को हमने अनसुना कर पढ़ने की ठानी और आज हम अपना नाम लिखना जान गए हैं | यहां पढ़ना हमें बहुत ही अच्छा लगता है | पिछले एक महीने से संचालित इस स्कूल में करीब 20 से 25 महिलाएं हौसला दिखा कर यहां पढ़ने आ रही है |

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