श्रमिक स्पेशल ट्रेन में एक दिन में सात प्रवासी मजदूरों की मौ-त, रेलवे ने कही यह बड़ी बात

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कोरोना वायरस के कारण पूरे देश में लागू लॉकडाउन के कारण प्रवासी मजदूरों को केंद्र सरकार और राज्य सरकार की मदद से रेलवे द्वारा उनके प्रदेश में भेजा जा रहा है. ऐसे में आज यानी की मंगलवार को बिहार आ रही ट्रेनों में सात लोगों की जान चली गई है. ये सभी ट्रेने लंबी दूरी की ट्रेनें है जिसमें कई मजदूर भूख- प्यास के कारण उनकी जान चली गई. मृत्कों में एक आठ माह का बच्चा भी है. बताया जा रहा है कि तेज गर्मी और भूख प्यास के कारण श्रमिकों की मौत हुई है.

सोमवार को एक दिन इन व्यक्तियों की हुई मौत

  • पश्चिम चंपारण जिला के चनपटिया थाना क्षेत्र के निवासी इरशाद की मुजफ्फरपुर जंक्शन पर जान चली गई.
  • 55 साल के अनवर की बरौनी में जान चली गई.
  • सूरत से आ रही ट्रेन में औरंगाबाद के ओबरा की महिला की सासाराम स्टेशन पर प्राण निकल गई
  • मोतिहारी के एक मजदूर की महाराष्ट्र से आने के दौरान जहानाबाद में उनकी जान चली गई
  • मुंबई से सीतामढ़ी जा रहे आठ महीने के बच्चे की कानपुर में जान चली गई
  • अहमदाबाद से कटिहार जा रही अलवीना की ट्रेन में उनकी जान चली गई

इतनी जान जाने के बाद रेलवे के तरफ से बयान आया है. ईस्ट सेंट्रल रेलवे के सीपीआरओ राजेश कुमार से जब ट्रेन में खाने-पीने की व्यवस्था और ट्रेनों की लेट लतीफी पर सवाल पूछा गया तो उन्होंने कहा कि किसी भी श्रमिक की मौत भूख से नहीं हुई है. उन्होंन यह भी कहा कि कुछ मजदूरों की मौत अस्पताल में जाने के बाद हुई है. उन्होंने यह भी कहा कि रेलवे श्रमिक स्पेशल ट्रेन के यात्रियों को सुबह का नाश्ता से लेकर रात का खाना समय से पहुंचा रही है. उन्होंने कहा कि इसके लिए रेलवे के अलग अलग जोन में कई स्टेशनों पर फूड सेंटर बनाया गया है. जिस समय ट्रेन आती है उसमें खाना और पानी दिाय जाता है. ट्रेनों के लेट होने पर उन्होंने कहा कि लंबी दूरी की ट्रेनें हैं थोड़ी देर हो जाती है लेकिन पांच से सात दिन लेट तो नहीं होती है न.

स्त्रोतः-https://hindi.news18.com/news/bihar/patna-lockdown-seven-migrant-laborers-died-in-one-day-during-train-journey-railways-said-this-brks-brvj-3134033.html

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