फ़िल्म जगत में क्रांति लाने वाली ऐक्ट्रेस में शुमार शर्मीला टैगोर के जन्मदिन पर विशेष

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कई ऐसी एस्क्ट्रेस हुई हैं जिन्होंने बॉलीवुड में न केवल धमाल मचाया है बल्कि फ़िल्म जगत को एक नई दिशा दी है और फ़िल्म के युग को बदला दिया है. ऐसी ही क्रांति लाने वाली ऐक्ट्रेस में शुमार शर्मीला टैगोर हैं. जो आज अपना 75 वां जन्मदिन मनाने जा रही है. वे खुद कभी भी फिल्मों की दुनिया में आना नहीं चाहती थीं इस वजह से वे खुद को ‘एक्सीडेंटल अभिनेत्री’ मानती है। उनका जन्म 8 दिसंबर, 1946 को कानपुर में हुआ था. 15 वर्ष की ही उम्र में वे फिल्मों में आ गई. उनकी पहली फ़िल्म ‘अपूर संसार’ सत्यजीत रे द्वारा निर्देशित हुई। उन्होंने दो बार राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार और दो बार फिल्मफेयर पुरस्कार जीता है और वह सेंसर बोर्ड की अध्यक्ष भी रह चुकी हैं.

उन्होंने कई फिल्मों में अपना शानदार अभिनय दिया है। ‘वक्त’, ‘आमने-सामने’ ‘कश्मीर की कली’ फ़िल्म उनकी प्रसिद्द फिल्मों में से एक है. वे बॉलीवुड की पहली ऐक्ट्रेस हैं जिन्होंने आज के दौर का कार्य किया। उन्होंने ‘एन इवनिंग इन पेरिस’ फ़िल्म में पहली बार बिकिनी सीन किया था। जिस वजह से पूरे बॉलीवुड में तह-लका मच गया। बात संसद भवन तक पहुंच गई और वे चर्चा का विषय बन गई. जो आज के दौर में आम बात है। 1968 में उन्होंने ऐसा ही एक और बिकीनी शूट करवाया था. यह ग्लोसी फिल्म फेयर मैगजीन के लिए कराया गया था.

मंसूर अली खान पटौदी से उनका अफेयर था शादी होने वाली थी। लेकिन उन्हें इस बात का भय था कि यदि उनकी माँ बिकिनी के बारे में जान गई तो ये रिश्ता टूट सकता है। इसके लिए उन्होंने फिल्म के प्रोड्यूसर को फोन करके सभी जगह से उनके बिकिनी सीन का पोस्टर हटवा देने के लिए कहा. इसके बाद पूरे मुंबई से वह पोस्टर हटा दिया गया। मंसूर अली खान पटौदी को उनके उस सीन से कोई आपत्ति नहीं था क्यूंकि वे प्रोफेशन की जरुरतों को समझते थे। शादी के बाद शर्मीला ने इस्लाम धर्म अपना लिया और उनका नाम बेगम आइशा हो गया।

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