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बिहार में स्थित सीतामढ़ी जिले में माँ जानकी की प्रतिमा बनने जा रही है, जिसकी ऊंचाई 251 फीट होगी. खास बात यह है की यह प्रतिमा विश्व की सबसे बड़ी प्रतिमाओं में से एक होगी. आपको बता दें की स्थानीय परिसदन के प्रेस कांफ्रेंस में श्री भगवती सीता तीर्थ क्षेत्र समिति के अध्यक्ष व सांसद सुनील कुमार पिंटू जी ने इस बात की जानकारी दी है. इस प्रोजेक्ट को लेकर उन्होंने बताया है की महंत रामलाल दास जो की राघोपुर बखरी के निवासी हैं उन्होंने माता सीता की प्रतिमा के निर्माण के लिए 14 एकड़ जमीन को भी दान दिया है. मिली जानकारी के अनुसार 50 एकड़ जमीन की जरुरत है जिसमे 24.40 एकड़ जमीन का एग्रीमेंट हो चुका है साथ ही और 5 एकड़ जमींन के लिए अभी किसानो से बात हो रही है.

Mata sita

मिली जानकारी के अनुसार सरकार ने रजिस्ट्री के खर्चे को माफ़ कर दिया है. इस बात की जानकारी श्री भगवती सीता तीर्थ क्षेत्र समिति के अध्यक्ष और सांसद सुनील कुमार जी ने दिया. उन्होंने बताया की इस 50 एकड़ जमीन के रजिस्ट्री का खर्च लगभग 30 लाख रुपया आना था. इसे लेकर रजिस्ट्री शुल्क माफ़ करने के लिए सीतामढ़ी निबंधन कार्यालय के माध्यम से प्रस्ताव बिहार सरकार को भेज दिया गया है. कैबिनेट से भी जल्दी ही इस बात की स्वीकृति मिल जाएगी और उम्मीद है की 31 दिसम्बर तक इसके रजिस्ट्री का भी काम पूरा हो जायेगा. अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए उन्होंने कहा की यदि सीता माँ की प्रतिमा का यह कार्य पूरा होता है तो नारी सशक्तिकरण को बड़ा बल मिलेगा और यह स्थल विश्व में नारी समाज के लिए प्रेरणा और दर्शन का एक अद्भुत संगम का केंद्र बन जायेगा.

आगे सुनील कुमार जी ने बताया की भूमि पूजन को लेकर वो माननिय प्रधानमंत्री से भी मिले. प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने नक़्शे की प्रक्रिया पूरी होने के बाद भूमि पूजन को लेकर जानकारी देने की बात कही है. इस पर यह उम्मीद लगाई जा रही है की भूमि पूजन के लिए प्रधानमंत्री भी आ सकते हैं. जब यह प्रतिमा बन कर तैयार हो जाएगी तो माँ जानकी की जन्मभूमि सीतामढ़ी की ख्याति पूरे विश्व में हो जाएगी. आपको बताते चलें की बिहार के पर्यटन विभाग की तरफ से दिल्ली के मेट्रो ट्रेन में भी सीतामढ़ी को माँ सीता के जन्मभूमि के रूप में पेश किया गया था. साथ ही इस बार हुए बीपीएससी की परीक्षा में भी सवाल के रूप में इस बात की चर्चा थी की माँ सीता की सबसे ऊँची प्रतिमा कहा बन रही है.

Maa Sita Mandir

आपको बता दें की 14 जनवरी को सीता रथ भी निकाला जायेगा. जूना अखाड़ा और नैनीताल के महामंडलेश्वर हिमालयन योगी स्वामी विरेंद्रानंद जी महाराज ने पत्रकार वार्ता के दौरान बताया की रामायण रिसर्च कौंसिल के मुख्य मार्गदर्शक परमहंस स्वामी सान्दिपेंद्र जी महाराज सीतामढ़ी में जहाँ माँ जानकी की प्रतिमा स्थल है उसे शक्ति पीठ के रूप में विकसित करना चाहते हैं. जिसके लिए बाली, इंडोनेसिया, अशोक वाटिका और इसके अलावे 51 शक्तिपीठों और ऐसे और भी जगह जहाँजहाँ माँ सीता के चरण पड़े थे वहां से मिट्टी, ज्योत और जल लाये जायेंगे और शक्तिपीठ की भूमि में मिलाये जायेंगे. साथ ही मध्यप्रदेश के नलखेड़ा स्थित माता बंगलामुखी की ज्योति लाकर माँ सीता को श्रीभगवती के रूप में स्थापित किया जायेगा. आगे आपको बताते चलें की नये वर्ष में 14 जनवरी के दिन सीता रथ द्वारा सीता ज्योति निकलेगी और इस ज्योति को पुरे देश में 1 महीने तक भ्रमण करवाया जाना है. यहाँ प्रतिमा के चारों तरफ श्रीभगवती माँ सीता के जीवन को दर्शाते हुए 108 प्रतिमाएं स्थापित की जाएँगी.

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