सीवान से कौन बनेगा सांसद ?

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देश के पहले राष्ट्रपति देशरत्न डॉ. राजेंद्र प्रसाद के नाम से सीवान संसदीय क्षेत्र की पहचान होती है, लेकिन समय के साथ ही इस जिले की पहचान बदल गई। अंतरराष्ट्रीय चोर नटरवल लाल इसी जिले का था। वहीं बाद में शहाबुद्दीन के आतंक से यह जिला हमेशा सुर्खियों में बना रहा। 1995 में जनसंघ के उम्मीदवार पंडित जर्नादन तिवारी को हराकर मो. शहाबुद्दीन राजद से पहली बार सांसद बने। वे लगातार तीन बार यहां से चुनाव जीते। कानूनी शिकंजा कसने के बाद कोर्ट ने शहाबुद्दीन के चुनाव लड़ने पर रोक लगा दी। 2009 में ओमप्रकाश यादव ने निर्दलीय चुनाव लड़कर शहाबुद्दीन की पत्नी हिना शहाब को हराकर भाजपा का दामन थाम लिया। इसके बाद 2014 में मोदी लहर में ओमप्रकाश फिर हिना शहाब को हराकर सांसद बने। यहां आठ विधानसभा क्षेत्र हैं – दरौली, जीरादेई, रघुनाथपुर, दरौंदा, महाराजगंज, गोरियाकोठी, बड़रिया और सीवान। इन सीटों पर वर्तमान में एनडीए और राजद का ही वर्चस्व है। इस लोकसभा क्षेत्र में कुल मतदाताओं की संख्या 23 लाख 99 जहर 242 है। इसमें महिला मतदाता 11 लाख 45 हजार 908 तथा पुरुष मतदाता की संख्या 12 लाख 53 हजार 334 है।

2019 में मेडिकल कॉलेज खोले जाने की घोषणा की गई है। यहां की सड़क व बिजली की व्यवस्था पहले से बेहतर हुई है। यहां बेरोजगारी और अपराध पर लगाम लगाना बड़े मुद्दे हैं। जिले में एक सूता मिल और तीन चीनी मिलें थी, जो फिलहाल बंद हैं। अधिकतर युवा रोजगार के लिए खाड़ी देश जाते हैं। सीवान लोकसभा सीट 1957 में अस्तित्व में आई। देश के लिए दूसरे लोकसभा निर्वाचन के दौरान यहां के लोगों ने सांसद चुनाव के लिए पहली बार मतदान किया। यह बिहार के उत्तर पश्चिमी छोर पर बसा है। दाहा नदी के किनारे बसे इस इलाके की सीमाएं उत्तर प्रदेश से जुड़ती हैं। भारत के प्रथम राष्ट्रपति डॉ. राजेन्द्र प्रसाद समेत कई अग्रणी स्वतंत्रता सेनानियों की जन्मभूमि एवं कर्मस्थली के लिए सीवान को जाना जाता है। इसका नामाकरण मध्यकाल में यहां के राजा शिवमान के नाम पर हुआ है।

लोकसभा चुनाव 2019 में बिहार में बाहुबली भी प्रत्यक्ष नहीं तो परोक्ष रूप से चुनाव मैदान में हैं। शहाबुद्दीन और अजय सिंह की पत्नी सीवान सीट चुनाव लड़ रहे हैं। इस सीट पर महागठबंधन की हिना शहाब व एनडीए की कविता सिंह 12 मई को होने वाले लोकसभा चुनाव के दौरान जीत का परचम लहराने के लिए आपस में भिड़ेंगी। हिना लगातार तीसरी बार यहां से चुनाव लड़ रही हैं। पर उनके सामने कभी कोई महिला नहीं रही। दो बार ओमप्रकाश यादव ने उन्हें हराया था। एनडीए के प्रमुख घटक भाजपा, जदयू-लोजपा किसी ने भी इससे पहले कभी किसी महिला को अपना उम्मीदवार बनाया था। इस बार दो महिला प्रत्याशी आमने-सामने हैं। मुकाबला काफी दिलचस्प होने की उम्मीद है।

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