बिहारी पहचान 05 : जब भस्मासुर ने दौड़ाया शिव को तो शरण ली थी बिहार की इस गुफा में !

भस्मासुर की तपस्या से प्रसन्न होकर भगवान भोले ने उसे वरदान दे दिया कि वह जिसके सिर पर हाथ रखेगा, वह भस्म हो जाएगा. भगवान भोले से मिले इस वरदान की परीक्षा लेने के लिए भस्मासुर उन्हीं के सिर पर हाथ रखने के लिए दौड़ा दिया. भगवान भोले ने भस्मासुर से बचने को बिहार के रोहतास जिले की पहाड़ियों पर स्थित एक कंदरा में शरण ली और गुप्त हो गएं. भगवान विष्णु से शिव की यह हालत नहीं देखी गई और उन्होंने मोहिनी रुप धारण कर भस्मासुर का नाश किया तब जाकर भगवान शिव इस गुफा से बाहर निकलें. इस स्थान को गुप्ता धाम के नाम से जाना जाता है जो प्रकृति की बेहद सुरम्य वादियों में स्थित है और बेहद रमणीक स्थान है. इस स्थान की खासियत है कि यहां प्रकृति भी है और संस्कृति भी. यह जमीन तल से करीब 1000 फीट की उंचाई पर स्थित है.

यूं तो इस स्थान पर सालों भर शिवभक्तों का आना जाना लगा रहता है पर श्रावण मास में इस पवित्र धाम की छटा देखने में आती है. शिवरात्री और बसंत पंचमी में भी यहां भारी मेला लगता है. बक्सर से गंगा जल भर कर लाखों की संख्या में शिव भक्त कांवरियों का जत्था यहां आता है और शिवलिंग पर जल चढ़ाते हैं.

जिस गुफा में भगवान शिव ने शरण ली थी, वह बेहद हीं रोमांचक, अद्भुत और अविश्वसनीय है. यह बेहद हीं अंधेरा और गहन गुफा है. इसका प्रवेश द्वार करीब 18 फीट चौड़ा और 12 फीट उंचा है. गुफा के अंदर कई शैलचित्र बनें हुए है जो इसकी ऐतिहासिकता को प्रमाणिकता प्रदान करते हैं, हालांकि इन शैलचित्रों पर अंकित लिपि अब तक अपाठ्य है. गुफा में करीब 363 फीट अंदर में प्रवेश करने पर एक छोटा सा कुंड हैं, जिसमें सालों भर पानी जमा रहता है. श्रद्धालु इसे पातालगंगा कहते हैं, वहीं शिवलिंग के उपर अज्ञात स्त्रोतों से लगातार जल प्रवाहित होता रहता है, जिसे शिवभक्त प्रसाद के रुप में ग्रहण करते हैं.

इस पवित्र गुफा में आॅक्सीजन की बड़ी किल्ल्त होती है, जिसे सिलेंडर के माध्यम से पूरा किया जाता है. वर्ष 1989 में दम घुटने से यहां करीब आधा दर्जन श्रद्धालुओं की मौत हो गई थी. उसके बाद से प्रशासन की ओर से हर आयोजन पर आॅक्सीजन सिलिंडर मुहैया करा कर यहां आॅक्सीजन की कमी पूरी की जाती है.

प्राकृतिक सुषमा से सुसज्जित और धार्मिक आस्था के महाकेंद्र के रुप में विख्यात यह स्थान आज तक सरकारी उपेक्षा का दंश झेलता आ रहा था. अभ्यारण्य क्षेत्र के तौर पर घोषित होने के कारण इस स्थान पर आने के लिए न तो सड़क बन पाया और नहीं धाम पर श्रद्धालुओं के लिए किसी सुविधा का विस्तार हो पाया. वह तो प्रभु के प्रति भक्तों की अगाध श्रद्धा है कि लाखों लोग प्रत्येक वर्ष खींचे चले आते हैं. वैसे हाल के दिनों में रोहतास जिले की नोखा सीट से विधायक और फिर बिहार सरकार में पर्यटन मंत्री बनीं अनिता देवी ने इस स्थल को विकसित करने का बीड़ा उठाया है और यहां जाने के लिए पहाड़ी रास्ते से हीं पक्की सड़क बनाने का काम चल रहा है. ज्यादा से ज्यादा लोगों तक गुप्तेश्वर महादेव यानी गुप्ता धाम की जानकारी पहुंचे, इसके लिए सरकारी स्तर पर गुप्ताधाम महोत्सव का आयोजन शुरु कर दिया गया है.

कैसे पहुंचें गुप्ताधाम
यह स्थान रोहतास जिला मुख्यालय सासाराम से 65 किलोमीटर की दूरी पर Chenari Block स्थित है. यहां जाने के लिए कैमूर पर्वत श्रृंखला की रेहल घाट, पनारी घाट और उगहनी घाट से तीन रास्ते जाते हैं, जो विकट और दुर्गम है पर बेहद हीं खुबसूरत है. Sasaram ताराचंडी मार्ग से भी पहाड़ पर सड़क निर्माण हो चुका है, जिससे आप आंमवाचुवा के रास्ते लग्जरी वाहन से भी यहां पहुंच सकते हैं.

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