सुशिल मोदी – नहीं रहे डिप्टी सीएम, जेपी आन्दोलन से डिप्टी सीएम तक का सफ़र

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बिहार में एक बार फिर एनडीए की सरकार बन चुकी है. नीतीश कुमार सातवी बार बिहार के मुख्यमंत्री पद की शपथ भी ले चुके हैं. लेकिन इस बार एनडीए की नई सरकार में बड़ा बदलाव हुआ है. 2005 से नितीश कुमार के साथ बिहार की सत्ता में हाँथ बटाने वाले सुशिल मोदी इस बार नीतीश कुमार के साथ नजर नहीं आएँगे. 2005 में नीतीश कुमार जब बिहार के मुख्यमंत्री बने थे तब सुशिल कुमार मोदी भी उनके उपमुख्यमंत्री बने थे. लेकिन इस बार नीतीश सरकार में कप्तान में कप्तान तो नहीं बदला लेकिन उपकप्तान बदल गया है. जी हाँ, सही सुना आपने. इस बार भी एनडीए गठबंधन में नीतीश कुमार ही बिहार के मुख्यमंत्री बने है लेकिन सुशिल कुमार मोदी उपमुख्यमंत्री पद से हटा दिए गए हैं. उपमुख्यमंत्री पद से हटाए जाने के बाद सुशिल मोदी ने ट्वीटर पर अपने दिल का दर्द भी बयां किया है. उन्होंने लिखा है कि उनसे कार्यकर्ता का पद कोई नहीं छीन सकता.

 

 

आइये जानते हैं सुशिल मोदी के राजनीतिक जीवन के बारे में

सुशिल मोदी की राजनीतिक जीवन की शुरुआत साल 1971 में हुई थी. छात्र रहते हुए पटना विश्वविद्यालय संघ की पांच सदस्यीय कबिनेट के सदस्य चुने गए थे. इसके बाद 1973 में वो महामंत्री चुने गए थे. उस समय पटना विश्व विद्यालय संघ के अध्यक्ष लालू प्रसाद यादव चुने गए थे. संयुक्त सचिव रविशंकर प्रसाद चुने गए थे. जेपी आन्दोलन से प्रभावित होकर सुशिल मोदी ने बीच में ही पढाई छोड़ दी थी. आपातकाल के दौरान वे 19 महीने जेल में रहे. 1977 से 1986 तक सुशिल मोदी अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के विभिन्न महत्वपूर्ण पदों पर रहे. संघ प्रचारक और भाजपा के सिधान्तकार के एन गोविन्दाचार्य को सुशिल मोदी का मेंटर माना जाता है.

गोविन्दाचार्य ने एक इंटरव्यू में बताया था कि उन्होंने सुशिल मोदी को 1967 से देखा है. गोविन्दाचार्य के अनुसार उस वक्त भी सुशिल मोदी के व्यक्तित्व को नौजवानों की भीड़ में चिन्हित किया जा सकता था. ट्रेन के एक लम्बे सफर में सुशिल मोदी की मुलाकात जेसी जॉर्ज से हुई थी. 1987 में दोनों में शादी कर ली. उनकी शादी में पूर्व प्रधानमंत्री स्वर्गीय अटल बिहारी वाजपेई, नानाजी देशमुख और कर्पूरी ठाकुर भी शरीक हुए थें.

गोविन्दाचार्य बताते है कि सुशिल मोदी की शादी बहुत ही साधारण ढंग से पटना के राजेंद्र नगर स्थित शाखा मैदान में हुई थी.

छः अप्रैल 1980को भारतीय जनता पार्टी का गठन हुआ था. बिहार में भाजपा के नेतृत्व अगड़ी जाती के पास था और और उसका आधार वोट अगड़ी जाती, शहरी मतदाता और वैश्य समाज के पास था. लेकिन 80 के दशक के अंतिम वर्षों में संघ प्रचारक गोविन्दाचार्य ने सुशिल कुमार मोदी और नंदकिशोर यादव जैसे नेताओं को प्रमोट किया. जिसके बाद अगड़ों के साथ साथ पिछड़ी जातियां भी नेतृत्व में आई. इस वजह से भाजपा का बिहार में व्यापक आधार बना.

1990 में सुशिल मोदी ने पटना केंद्रिय विधानसभा से चुनाव लड़ा और जीत हासिल कर विधानसभा पहुंचे. 1995 और फिर 2000 में भी वो इसी विधानसभा सीट से चुनाव जीते. 2004 में वो भागलपुर लोकसभा सीट से चुनाव जीते. साल 2005 में वो सांसद पद से इस्तीफा देकर विधान परिषद के लिए निर्वाचित होकर बिहार के उपमुख्यमंत्री बने. बिहार की राजनीति को सुशिल मोदी त्रिभुज कहते है. इसमें भाजपा, जदयू और राजद तीन भुजाएँ हैं. सुशिल मोदी जदयू के नेता नीतीश कुमार से नजदीकी रखते हुए राजद पर ही निशाना साधते रहे. सुशिल मोदी 1996 में चारा घोटाला मामले में सीबीआई जाँच की मांग को लेकर पटना हाई कोर्ट में याचिका दायर करने वालों में से एक थे. इस कारण उन्हें बिहार की राजनीति में और मजबूती मिली. वर्ष 2015 में जदयू के साथ राजद के सत्ता में आने के बाद सुशिल मोदी ने राजद पर फिर से हमला बोलना शुरू किया. मोदी ने 4 अप्रैल 2017 से लालू परिवार की बेनामी सम्पति को लेकर 44 प्रेस कांफ्रेंस की. नतीजा यह हुआ कि 26 जुलाई 2017 को सरकार गिर गई और और 27 जुलाई को एनडीए गठबंधन की नई सरकार बनी और सुशिल कुमार मोदी एक बार फिर बिहार के उपमुख्यमंत्री बने.

लेकिन इस बार सुशिल मोदी उपमुख्यमंत्री नहीं बन पाए है. सरकार तो एनडीए गठबंधन की ही बनी है और एक बार फिर नीतीश कुमार ही मुख्यमंत्री बने हैं लेकिन सुशिल मोदी को उपमुख्यमंत्री का पद नहीं मिला है.

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