बिहार का आकर्षण केंद्र है पटना स्थित “तारामंडल”

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आज हम आपको पटना स्थित तारामंडल के बारे में बताएँगे जो कि इंदिरा गाँधी विज्ञानं परिसर में स्थित है |

इसकी संरचना में बिहार काउंसिल ऑन साइंस एंड टेक्नोलॉजी के माध्यम से कुल 11 करोड़ रूपए की राशि खर्च की गयी है |

बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री सत्येंद्र नारायण सिन्हा द्वारा 1989 में वर्ष के शुरुआत में ही इसकी संकल्पना की गयी और उसी वर्ष घोषणा की गयी कि वर्ष 1993 तक यह विज्ञानं केंद्र तैयार हो जायेगा | परिणामस्वरूप 1 अप्रैल 1993 को इस विज्ञानं परिसर को जनता के लिए खोल दिया गया | इस विज्ञानं केंद्र का नाम भारत राष्ट्रीय कांग्रेस नेता और पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गाँधी के नाम पर रखा गया |

तारामंडल में खगोलशास्त्रीय विज्ञानं से संबंधित विषयो पर नियमित फिल्म शो दिखलाये जाते है, जिसमे विज्ञानं और अविष्कार की महत्वपूर्ण जानकारियां उपलब्ध होती है | यह प्रदर्शनी भी लगाये जाते है, जो आने वाले दर्शको के लिए आकर्षण का केंद्र है | तारामंडल में लगभग दो दशक से चलने वाले कार्यक्रम में स्काई थियेटर शो को और भी आकर्षक बनाने की तैयारी की जा रही है | आप इस थियेटर फिल्म को देखने के दौरान खुद को अंतरिक्ष में बैठे महसूस सकते हैं |

आपको बता दे कि पटना प्लेनेटेरियम एशिया के सबसे बड़े ग्रहों में से एक है | यह मुख्य कारण है जो कि बड़ी संख्या में विदेशी पर्यटकों को भी आकर्षित करता है | तारामंडल सेल्युलॉइड फिल्म के पारम्परिक ऑप्टो-मेकेनिकल प्रक्षेपण का उपयोग करता है |

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