इस टेक्नोलॉजी से काम हुआ आसान, अब नेत्रहीन भी कर रहे कंप्यूटर की कोडिंग का काम

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आज का वक़्त टेक्नोलॉजी से भर गया है, और आज के समय कदम से कदम मिलकर चलना है तो बढ़ते हुए टेक्नोलॉजी से कदम से कदम मिलकर चलना होगा। आज का वक़्त इतनी तेजी से भाग रहा है कि अगर हम ऐसा नहीं करेंगे तो काफी पीछे छूट जाएंगे। आज हम ऐसे वक़्त में ज़िन्दगी जी रहे हैं जहाँ टेक्नोलॉजी ही हमारा साथी बन सकता है। आपको बता दें टेक्नोलॉजी की रफ़्तार लगातार बढ़ती ही जा रही है और ये केवल सामान्य लोगों तक नहीं बल्कि दिव्यांगों के लिए भी सहायक साबित हो सकता है। पूरे दुनिया में नेत्रहीन व्यक्ति स्क्रीन रीडर और आर्टिफीसियल इंटेलिजेंस की सहायता से अपने ज़िन्दगी को आसान बना रहे हैं एवं कंप्यूटर भाषाओं के कोडिंग के क्षेत्र में बहुत ही अच्छे से अपना योगदान दे रहे हैं। हम आज उदाहरण के द्वारा इस चीज़ को समझ सकते हैं। ब्रिटैन में एक एक ई-कॉमर्स की कंपनी में आलोक कौशिक सीनियर ऐप्लिकेशन डिवेलपर के तौर पर काम करते हैं और वो नेत्रहीन हैं।

काम करते हुए आलोक को देखना काफी दिलचस्प है। की-बोर्ड पर टाइप करते हुए आप उन्हें देख सकते हैं लेकिन यहाँ पर स्क्रीन नहीं है। आलोक नेत्रहीन होने के बावजूद भी उतनी ही तेजी से कोड कर सकते हैं जितना उनके पास में बैठा हुआ एक सामान्य व्यक्ति कर सकता है। आलोक की सहायता के लिए स्क्रीन रीडर एक सहायक सॉफ्टवेयर है जो लिखे हुए टेक्स्ट को स्पीच में परिवर्तित करता है। इस सॉफ्टवेयर की सहायता से आलोक की पूरी दुनिया ही बदल गई है। आलोक कौशिक की तरह ही उनसे हज़ारो मील दूर दिल्ली में प्रणव लाल वोडाफोन आईडिया के साथ एक साइबर सिक्योरिटी विशेषज्ञ हैं जो पाइथन, जावा, सी और सी++ लैंग्वेज को बगैर रुके हुए लगातार कोड़े कर सकते हैं। आपको बता दें कि प्रणव भी आलोक के जैसे ही नेत्रहीन हैं। प्रणव ने इस बारे में बताया, “मैंने स्कूल के काम में सहायता के लिए साधारण प्रोग्राम लिखने से शुरुआत किया था।” आज प्रणव काम्प्लेक्स कोड को भी लिख सकते हैं एवं कम्प्यूटर एप भी बना चुके हैं। यह एक स्पीच रेकिग्निशन सॉफ्टवेयर है जो फिजिकली चैलेंज्ड व्यक्तियों के लिए सहायक है।

प्रणव कोडिंग के काम के अलावा फोटोग्राफर का काम करते हैं और आवाज (VOICE) की सहायता से तस्वीरों को कैमरे में कैद करते हैं। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि VOICE एक आर्टिफिशल इंटेलिजेंस टूल है जो फिजिकली चैलेंज्ड व्यक्तियों को लाइव कैमरे का अनुभव देता है। इसके माध्यम से बाएं से दाएं स्कैनिंग होने के बाद तसवीरें आवाज में बदल जाती हैं। National Center for Promotion of Employment for Disabled People के कार्यकारी निदेशक अरमान अली बताते हैं, “कौन सोच सकता था कि फिजिकली चैलेंज्ड व्यक्ति भी मुख्यधारा के कार्यबल से जुड़ चुके हैं तथा डेस्क के काम और बाहर के काम तक ही सीमित नहीं है।”

शिकायत है कोडर्स को

सामान्य भाषा में अगर कहा जाए तो एक रोबोट रीडिंग की तरह ही स्क्रीन रीडर है जो किसी टेलीविज़न के विज्ञापन में चलाये जाने वाले Disclaimer के जैसे तेजी से शब्द को पढता है, लेकिन अपने सुविधानुसार रफ़्तार को कम या ज्यादा भी किया जा सकता है। अंग्रेजी बोलने की एक सामान्य रफ़्तार 120 से लेकर 150 शब्द प्रति मिनट हो सकती है लेकिन स्क्रीन रीडर एक मिनट में 450 शब्द को पढ़ सकता है। एक तरफ फिजिकली चैलेंज्ड व्यक्तियों के लिए तकनीक को एक्सेस करना आसान हुआ लेकिन कुछ खराबियां भी हैं। उदाहरण के तौर पर, कोडर्स की ऐसी शिकायत है कि कुछ वेबसाइटों पर स्क्रीन रीडर मौजूद नहीं है।

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