इस बार लहू मुँह लग गया, क्यों की अबकी बार बिहार में नीतीश vs तेजस्वी और मोदी vs कन्हैया होगा

0
303

बिहार विधानसभा चुनाव का शंखनाद अभी बाकी है. लेकिन उसके पहले बिहार में राजनितिक पार्टीयों का गठजोड़ जारी है. नीतीश कुमार को हराने के लिए और बिहार में अपनी जमींन बचाने के लिए भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी जिससे कन्हैया कुमार जुड़े हुए है और मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी दोनों वाम दलों के नेताओं ने राजद के प्रदेश अध्यक्ष जादानन्द सिंह से मुलाकात की और मुलाकात के बाद मीडिया को बताया की कम्युनिस्ट पार्टी इस बार बिहार विधानसभा चुनाव में महागठबंधन में शामिल होगी जिस पर राजद से उनकी सहमति सहमति बन गयी है.

यानि बिहार विधानसभा चुनाव 2020 में नितीश कुमार को कुर्सी से उतार फेंकने के लिए तेजस्वी और कन्हैया साथ मिलकर NDA के खिलाफ मोर्चा खोलते इस बार नज़र आ सकते है. अगर तेजस्वी और कन्हैया साथ मिलकर नीतीश कुमार के खिलाफ मैदान में उतरते है तो इसमें कोई शक नहीं नीतीश कुमार के नेतृत्व वाली NDA को इनके तीखे हमलो से बचना काफी मुश्किल रहने वाला है. क्यों एक तरफ जहाँ तेजस्वी यादव नीतीश कुमार पर हमलावर है तो वही कन्हैया कुमार और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का पहले से ही 36 का आंकड़ा रहा है और जिस तरह कन्हैया कुमार मोदी सरकार की नाकामियों को बारीकियों से उधेड़ते है उसे देख कर यह कहा जा सकता है की महागठबंधन में कन्हैया कुमार के शामिल हो जाने से बिहार महागठबंधन दोनों छोड़ो पर मज़बूत दिखेगा. एक तरफ जहाँ तेजस्वी यादव नीतीश कुमार के शासन काल की नाकामियों को जनता के सामने रखेंगे तो वही दूसरी तरफ कन्हैया कुमार मोदी सरकार पर निशाना साधते नज़र आएंगे.

लेकिन इन सबक के बिच एक बड़ा सवाल है की क्या कन्हैया कुमार महगठबंधन की टिकट पर विधानसभा का चुनाव लड़ेंगे. क्या राजद इस बार कन्हैया को उनके निर्वाचन क्षेत्र से टिकट देगी. कन्हैया कुमार का घर जिस विधानसभा क्षेत्र के अंतर्गत आता है उसका नाम है तेघरा विधानसभा. इस सीट पर फिलहाल राजद का कब्ज़ा है. राजद ने 2015 में यहाँ जित दर्ज की है. लेकिन उसके पहले 1962 से 2010 तक भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी इस सीट पर कब्ज़ा रहा है और कन्हैया कुमार भी इसी पार्टी से सबंध रखते है. इसलिए उम्मीद की जा सकती है की इस बार विधानसभा चुनाव में कन्हैया कुमार तेघरा विधानसभा से महागठबंधन के टिकट पर चुनाव लड़ते दिखाई दे सकते है.

आपको बता दे की पिछले साल 2019 लोकसभा चुनाव में कन्हैया कुमार बेगूसराय से वाम दलों के संयुक्त प्रत्यासी थे. वाम दलों ने राजद से उम्मीद लगायी थी की वो कन्हैया कुमार के सामने अपना उम्मीदवार नहीं खड़ा करेगी. लेकिन राजद ने कन्हैया के सामने अपना उम्मीदवार खड़ा कर वाम दलों को तगड़ा झटका दिया था. उस चुनाव में कन्हैया कुमार को बीजेपी के कदावर नेता गिरिराज सिंह से 4 लाख 22 हज़ार वोटो से हार का सामना करना पड़ा था. जबकि तीसरे नंबर पर रहे राजद के तनवीर हसन को लगभग 2 लाख वोट मिले थे.

माना जाता है की तेजस्वी ने कन्हैया के सामने अपना उम्मीदवार कन्हैया के बढ़ते सियासी कद को देखते हुए उतरा था. तेजस्वी को डर था की अगर कन्हैया चुनाव जित गए तो युवा नेता के तौर पर वो तेजस्वी से ज्यादा आगे निकल जायेंगे. आपको बता दे की कन्हैया कुमार उम्र में तेजस्वी से 2 साल बड़े है. अब देखना यह है की तेजस्वी और कन्हैया NDA को हराने के लिए साथ आते है या फिर तेजस्वी का कन्हैया के प्रति जो सियासी डर है वो इस बार भी विधानसभा चुनाव में देखने को मिलेगा. इसके लिए हमें थोड़ा इंतज़ार करना होगा.

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here