तेजस्वी ने दी एनडीए को चुनौती, पटना यूनिवर्सिटी को क्या केंद्रीय दर्जा दिलाने की है औकात ?

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बिहार में एक बार फिर से जनता दल यूनाइटेड और राष्ट्रीय जनता दल के बीच जबर्दस्त बयानबाजी का दौर जारी है । भारतीय जनता पार्टी के दिये हुआ बयान कि खरमास के बाद राजद में पार्टी में टूट होगी। भाजपा के बिहार प्रभारी भूपेंद्र यादव के पक्ष में जदयु से ललन सिंह और केसी त्यागी आगे बढ़े तो राजद के तरफ से शिवानंद तिवारी और जगदानंद सिंह ने पलटवार किया। राजनीति में दिग्गज नेताओं के बीच जमकर बयानबाजी का दौर रहा।

बड़े नेताओं के बीच और राजद में टूट और विलय के बयान के बाद तेजस्वी ने आपा खोते हुये पूरे एनडीए को औकात की बात कही है , हालांकि तेजस्वी निजी प्रहार न करते हुये सामाजिक मुद्दो को लेकर काफी मुखर नजर आ रहे हैं और इस साल भाजपा के बाद सबसे अधिक सीट पर कब्जा भी किया है। वहीं राजद के जीत के पीछे लोजपा का अप्रत्यक्ष सहयोग का मसला उजागर रहा तो सत्ता हासिल करने से चूक का ठीकड़ा कॉंग्रेस के माथे पर फोड़ा गया। चूंकि कांग्रेस की राजनीतिक नेतृत्व भी कमजोर होती दिखाई पड़ रही है और बिहार में कॉंग्रेस को जीतने कम सीट हासिल हुये हैं वह विचारणीय है।

तेजस्वी यादव ने अपने ट्विटर अकाउंट पर हमला बोलते हुये कहा कि बिहार की डबल इंजन सरकार, एनडीए के अनेक दलों, एनडीए के 40 में से 39 लोकसभा सांसदों, 9 राज्यसभा सांसदों, बिहार से केंद्र आधा दर्जन मंत्रियों, दो-दो उप मुख्यमंत्रियों और मुख्यमंत्रियों की क्या इतनी नैतिकता और राजनीतिक औकात है कि पटना यूनिवर्सिटी को केंद्रीय विश्वविदद्यालय का दर्जा दिला सके ?


बता दें कि 2017 में अक्तूबर में जदयु और भाजपा की बिहार में सरकार बनने के बाद एक कार्यक्रम में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पटना यूनिवर्सिटी को विश्व की श्रेष्ठ यूनिवर्सिटी बनाने के लिए प्रयास किए जाने का दावा किया था। इसी कार्यक्रम में नीतीश कुमार ने पीएम मोदी से इस यूनिवर्सिटी को केंद्रीय विश्वविदद्यालय का दर्जा दिलाने की मांग की थी। इसे लेकर बिहार सरकार ने केंद्र सरकार को प्रस्ताव भी भेजा था। लेकिन इस पर आजतक कोई नतीजा नहीं निकला।

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