तेजस्वी: बिहार में बन रही दो मजबूरों की मजबूर सरकार!

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चुनाव के पहले सभी राजनीतिक दलों ने अपने अपने हिसाब से पूरा जोर लगाया ताकि अधिक से अधिक बहुमत हासिल हो सके. महागठबंधन और एनडीए(NDA) दोनों ने पूरी ताकत झोंक दी. इस दौरान कई वायदें भी किये गए। एनडीए जहाँ राजद के शासनकाल को याद दिलाकर जनता के सामने उस दौर को पेश कर रही थी वहीँ राजद भी मूलभूत मुद्दों को उठाकर जनता का मत हासिल करने में जुटा रहा. मौजूदा सरकार की खामियों को उठाकर और उसपर तेज हमले बोले।

चुनाव का रिजल्ट आने के बाद सबसे अधिक सीटें राजद ही लाने में सफल रहीं वहीँ इसके बाद भाजपा का पलड़ा भारी हुआ. नीतीश की पार्टी तीसरे नंबर पर चली गई। जिससे यह साफ पता चलता है कि जदयू पर से लोगों का भरोसा कम हुआ है और मौजूदा सरकार से शिकायत भी है बावजूद लोगों ने एनडीए को वोट दिया और एक बार फिर से बिहार में सरकार बनाये जाने का मौका दिया।

भाजपा ने अपने वायदे के मुताबिक नीतीश कुमार बेशक सीएम की सीट दे दी लेकिन नीतीश कुमारपर सातवीं बार सीएम बनने के बाद चुनौतियाँ और दबाव काफी बढ़ गई है। राजद अधिक सीट हासिल करने के बाद भी सरकार बनाये जाने में सफल नहीं हो सकी है हालंकि उसने इसके लिए पूरे जतन किये हैं.

राजद ने जदयू और भाजपा पर निशाना साधते हुए कहा है कि बिहार में दो मजबूरों की सरकार बन रही है. एक शक्तिहीन शिथिल और भ्रष्ट प्रमाणित हो चुके मजबूर CM वहीँ दूसरा चेहराविहीन और तन्त्र प्रपन्च को मजबूर वरिष्ठ घटक दल. राजद ने तंज कसते हुए कहा कि इनकी मज़बूरी है. वहीँ राजद ने कहा है कि बिहार ने तेजस्वी को सर्वाधिक प्रिय नेता स्वीकार कर चुका है.

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