बिहार राजनीती में फिर से ‘तेज’ वापसी, विरोध में विपक्ष

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बिहार विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव की सियासत में वापसी को लेकर पार्टी ने तैयारी आरंभ कर दिया है। राजद दफ्तर में आरंभ होने वाले सदस्य्ता अभियान के लिए भव्य तैयारी की जा रही है। इससे जाहिर है कि चुनाव के बाद सियासत में नए जोश-खरोस के साथ तेजस्वी सक्रिय होने की तैयारी कर रहे हैं। तेजस्वी के सियासत से दूर जाने के अटकलों को पार्टी के नेता खारिज करते हैं, लेकिन जदयू ने इस बात का प्रचार-प्रसार शुरू कर दिया है कि तेजस्वी जनता तथा पार्टी के भरोसा को खो चुके हैं।

बहरहाल, RJD अपनी सदस्यता अभियान 9 अगस्त से शुरुआत करने जा रही है। तेजस्वी यादव ही सदस्यता अभियान को आरंभ करेंगे। चुनाव के बाद से लंबे वक़्त तक बिहार की सक्रिय सियासत से तेजस्वी दूर थे, लेकिन अब दोबारा सक्रिय सियासत में वापस लौटने जा रहे हैं। तेजस्वी यादव के सदस्यता अभियान की शुरुआत होने वाले समारोह को मजबूत बनाया जा सके, इसके लिए पार्टी के सभी वरीय नेताओं को समारोह में उपस्थित रहने का आदेश दिया गया है। तेजस्वी यादव के दोबारा सक्रिय सियासत में वापस आने पर वरिष्ठ नेता शिवानंद तिवारी ने बताया कि तेजस्वी ने सियासत से संन्यास नहीं लिया है, और तेजस्वी की आयु ही क्या है। अभी तो तेजस्वी को बहुत संघर्ष करना है। अभी कुछ दिनों के लिए तेजस्वी बिहार से बाहर थे तो इसके पीछे कुछ विशेष कारण था। तेजस्वी परेशानी के कारण ही बिहार से दूर थे, इसका अर्थ ये नहीं है कि सियासत से तेजस्वी अलग हो गए हैं।

इधर सदस्यता अभियान समारोह को कामयाब बनाने में जुटे पार्टी के कार्यकर्ता चितरंजन गगन भी तेजस्वी की राजनीती से दूर की बात को सिरे से नकारते हैं। चितरंजन गगन बताते हैं कि तेजस्वी भले ही हमारे बीच में नहीं रह रहे हो लेकिन पार्टी के नेताओं से लगातार संपर्क रहा है, और राजद पार्टी उन्हीं की दिशा-निर्देश पर कार्य कर रही हैं। वैसे, राजद प्रवक्ता ये अवश्य कहते हैं कि तेजस्वी के नहीं रहने के वजह से पार्टी के कार्यकर्ताओं के बीच विपक्षियों तथा मीडिया की तरफ से भ्रम अवश्य बनाया गया। बता दें कि तेजस्वी के दोबारा वापसी पर जदयू ने निशाना साधा है। पार्टी के प्रवक्ता राजीव रंजन ने बताया कि तेजस्वी को उप मुख्यमंत्री और नेता प्रतिपक्ष के तौर पर पार्टी की सेवा करने का दो सुनहरा अवसर मिला। तेजस्वी ने दोनों ही अवसर दिए हैं। तेजस्वी जनता तथा पार्टी दोनों का विश्वास खो चुके हैं। ऐसे में उनके किसी भी अभियान से जुड़ने का लाभ राजद को नहीं मिलने जा रहा।

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