दारोगा की मनमानी के कारण 6 महीने जेल मे रहा यह दंपति, अब सरकार को देना होगा मुआवजा

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जब रक्षक ही बन जाए भक्षक तो कोई क्या कर सकता है. ठीक इस कहावत के अनुसार हुआ भी वैसे ही दारोगा की इतनी मनमानी चली की एसपी के आदेश को भी इसने नहीं माना और एक निर्दोष दंपति को बिना सजा के जेल के अंदर डाल दिया. वो भी पूरे छः महीने के लिए. इधर बिहार मानवाधिकार आयोग ने बड़ी कार्यवाई करते हुए पीड़ित दंपति को मुआवजा देने की बात कही है.

दअरसल यह पूरा मामला जनवरी 2012 का इस मामले में एक ट्रक ड्राइवर अवधेश कुमार की ह-त्या कर दी गई थी उसके बाद ट्रक को लूट लिया गया है। पुलिस ने इस पूरे मामले में पांच लोगों को दोषि पाया था जिसमें भोला कुमार और योगेंद्र सहनी का नाम सबसे आगे आया था. इस पूरे मामले के अनुसंधानकर्ता और उस समय के सब-इस्पेक्टर विनय कुमार सिंह ने हीरा सहनी और उनकी पत्नी लक्ष्मी देवी को गिरफ्तार कर लिया. और इन्हें जेल में भेज दिया.

जांच के दौरान दोनो पति-पत्नी निर्दोष पाए गए, इस पूरे मामले में बताया गया कि योगेंद्र सहनी और हीरा सहनी गोतिया लगते हैं और दोनों के बीच में पहले से विवाद चल रहा था. इसी को लेकर उन्होंने इन दोनों पति पत्नी का नाम ले लिया. जिसके बाद इन दोनों की सजा हो गई. हालांकि एसी मोतिहारी ने आईओ को पति-पत्नी को न्यायिक अभिरक्षा से मुक्त करे के लिए अदालत में आवेदन देने का निर्देश दिया पर उन्होंने ऐसा नहीं किया. जिसके बाद पटना हाई कोर्ट के आदेश के बाद 11 मई 2018 को दोनों को जमानत पर जेल से बाहर आए.

अब इधर मानवाधिकार आयोग ने तथ्यों को गौर करेन के बाद यह पाया है कि आईओ ने जान-बूझकर पति-पत्नी को जेल में डाला गया. उन्होंने यह भी कहा है कि कोई ठोस आधार नहीं होने के बावजूद भी इन्हें गिरफ्तार किया गया. आयोग के सदस्य उज्ज्वल कुमार दुबे ने राज्य सरकार को पति-पत्नी को आठ सप्ताह के अंदर दो लाख की क्षतिपूर्ति राशि देने का आदेश दिया है. उन्होंने यह भी कहा है कि सरकार चाहे तो क्षतिपूर्ति राशि की वसूली संबंधित पुलिस पदाधिकारी से कर सकती है.

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