महागठबंधन को अलिवदा कहने का दिन नजदीक आ गया !

महागठबंधन में अपनी उपेक्षा से नाराज चल रहे बिहार के पूर्व सीएम और हिंदुस्तानी अवाम मोरचा के प्रमुख जीतन राम मांझी का एनडीए के साथ जाना लगभग तय माना जा रहा है. महागठबंधन के भीतर कोऑर्डिनेशन कमिटी बनाने की मांग पर अलग थलग पड़ चुके मांझी के पास अब इसके अलावा कोई रास्ता दिखाई भी नहीं दे रहा. बीच में खबर आई थी कि राजद के साथ तनातनी के बीच कांग्रेस मध्यस्थ की भूमिका निभा रही थी लेकिन अब शायद कांग्रेस ने भी चुप्पी साध ली है.

20 अगस्त को कोर ग्रुप की बैठक

मांझी ने 20 अगस्त को हम सेकुलर के कोर ग्रुप की बैठक बुलाई है. संभव है कि मांझी इसी दिन कोई बड़ा फैसला ले सकते हैं. अब बिहार की राजनीति को दिलचस्पी लेकर देखने वाले 20 अगस्त की तारीख और मांझी के सरकारी आवास 12 एम स्ट्रैंड रोड पर निगाहें टिकी हुई है. देखना इसलिए भी दिलचस्प होगा क्योंकि मांझी पिछला विधानसभा चुनाव एनडीए के साथ ही लडे थें और हिस्से में सिर्फ 01 विधानसभा सीट आई थी. महागठबंधन में गए तो खुद भी चुनाव हार गए.

मांझी की मांगें कम नहीं होती

दरअसल राजद जीतन राम मांझी की मांगों से परेशानी में रहता है. राजद ने अपने कोटे से मांझी के पुत्र संतोष कुमार सुमन को एमएलसी बना दिया, इसके बावजूद उनका महागठबंधन के अंदर कोऑर्डिनेशन कमिटी की मांग से राजद नाराज है. यही वजह है कि राजद अब मांझी को जरा भी भाव नहीं दे रहा है और मांझी भी जबर्दस्ती की फायरिंग कर रहे हैं. राजद नेतृत्व का मूड देखकर तो यही लगता है कि वो खुद चाहते हैं कि किसी भी तरह से मांझी से छुटकारा मिल जाए.

एनडीए में मिलेगा क्या !

एनडीए में सीटों को लेकर खुद ही इतनी रार है कि लगातार लोजपा के बगावती सुर देखने को मिल रहे हैं, ऐसे में मांझी की पार्टी को वो 05 सीट भी देने की स्थिति में नहीं है. इसके बावजूद क्या हम सेकुलर एनडीए का हिस्सा बन जाएगा, ये देखने वाली बात होगी.

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