नीतीश कुमार की वो गलतियां जिससे बिहार में विस्फोटक हुआ कोरोना

बिहार में कोरोना लगातार फैलता जा रहा है और इसके कम होने की गुंजाइश भी फिलहाल नजर नहीं आ रही है. प्रतिष्ठित मीडिया समूह बीबीसी की रिपोर्ट के अनुसार मेडिकल जर्नल लैंसेट कहता है कि भारत के सभी राज्यों में 20 जिलों का वल्नरबिलिटी इंडेक्स बताया गया है और इन 20 जिलों में से अकेले 08 जिले बिहार के हैं. नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव यूं ही नीतीश सरकार पर निशाना नहीं साध रहे हैं और कह रहे हैं कि बिहार कोरोना का ग्लोबल हॉटस्पॉट बनने जा रहा है. तेजस्वी तथ्यात्मक रुप से सही कह रहे हैं.

बिहार और मध्यप्रदेश सबसे कमजोर

मेडिकल जर्नल लैंसेट की रिपोर्ट के मुताबिक बिहार और मध्यप्रदेश में कोरोना से निपटने की तैयारी बेहद खराब है. रिपोर्ट के अनुसार इन दोनों राज्यां में ही व्यवस्था चरमरा चुकी है. दोनों ही राज्यों के हालात राजनीतिक उथलपुथल की वजह से खराब हुए हैं. मध्यप्रदेश में भाजपा की सरकार बनाने के लिए कोरोना के खतरे को ताक पर रख दिया गया और बिहार में तो विधानसभा का चुनाव करीब ही है. बाकी सब छोड़कर सिर्फ जुलाई महीने के 20 दिनों के आंकड़े को देख लें तो समझ में आ जाएगा कि नीतीश सरकार की तैयारियां किस लेवल की हैं.

टेस्टिंग का बुरा हाल

कोरोना के विरुद्ध लड़ाई में टेस्टिंग सबसे महत्वपूर्ण है. बात करें बिहार की तो यहां प्रति मिलियन टेस्ट महज 3000 है. समझ लिजिए कि बिहार में टेस्टिंग की हालत कितनी खराब है. इसके लिए अगर नीतीश सरकार जिम्मेवार नहीं तो आखिर कौन जिम्मेवार है ?

हेल्थ केयर सिस्टम

इंडियन मेडिकल एसोसिएशन के बिहार सचिव सुनील के अनुसार बिहार में हेल्थ केयर सिस्टम की हालत बेहद खराब है और कोरोना विस्फोट के लिए सबसे ज्यादा जिम्मेदार यही है. नालंदा मेडिकल कॉलेज पटना का कोविड 19 अस्पताल है और यहां एक भी सीनियर डॉक्टर नही है. इसके लिए किसे जिम्मेदार ठहराया जाए, लालू राबड़ी को या नीतीश कुमार को ?

लचर पुलिस व्यवस्था

बिहार में कई बार लॉकडाउन लगा लेकिन पुलिस सिर्फ डंडे दिखाकर खानापूर्ति करती ही नजर आई. कहीं भी नियमित कड़ाई देखने को नहीं मिली. दुकानदार चोरी छिपे दुकान खोल ही रहे हैं और जेब में चाबी लेकर दुकान के इर्द गिर्द मंडरा ही रहे हैं. दस बीस के मिनट के लिए दुकान खुलती है और ग्राहक टूट पड़ते हैं. सब सोशल डिस्टेंसिंग गायब और साथ साथ कोरोना का खतरा भी गायब.

जेडीयू भाजपा की वर्चुअल मीटिंग

पता नहीं क्यों, जेडीयू और भाजपा विधानसभा चुनाव को लेकर इस कदर बेचैन हैं कि एक दूसरे की होड़ में वर्चुअल रैलियां करने की जिद पर अड़ी हुई हैं. बिहार में इन दोनों की सरकार है. बजाय की इनसे आगे आकर निपटने और लोगों की मदद करने के, ये दोनों दल चुनावी तैयारियों में लगे हुए हैं. अगर दोनों दल लोगों की मदद करते, तो भी इनका वोट बैंक बढ़ता ही, घटने का कोई सवाल नहीं था लेकिन जिस प्रकार से ये लोग चुनावी तैयारियों में जुटे हुए हैं, बिहार की जनता का क्रोध बढ़ता ही जा रहा है.

निश्चित तौर पर बिहार सरकार की इन बड़ी लापरवाहियों ने बिहार को कोरोना का हॉटस्पॉट बना कर रख दिया है और निश्चित तौर पर आसन्न विधानसभा चुनाव पर इनका प्रभाव पड़ेगा.6

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