साल का तीसरा चंद्रग्रहण हुआ खत्म, जानिए बिहार पर इसका क्या रहा असर

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रविवार को साल का तीसरा चंद्रग्रहण लगा. हालांकि यह ग्रहण बिहार में नहीं दिखा. ज्योतिषियों का कहना है कि जब ग्रहण ही नहीं था तो सूतक कैसा. कई ज्योतिषियों ने कहा कि जब ग्रहण दिखा ही नहीं तो सूतक कैसे लगा. आपको बता दें कि यह साल में लगने वाला चौथा ग्रहण और तीसरा चंद्रग्रहण था. ज्योतिषों की मानें तो एक माह ही दो या दो से अधिक ग्रहण लगना आम जनमानस के लिए कष्‍टकारी होता है. ऐसे में इस चंद्रग्रहण को ज्‍योतिष कष्‍टकारी मान रहे हैं.

बता दें कि आज से ठीक 15 दिन पहले रविवार को सूर्यग्रहण लगा था. सूर्यग्रहण के दिन हिंदी मास आषाढ़ की अमावस तिथि थी तो आज आषाढ़ का ही पूर्णिमा है. पटना के ज्‍याेतिषाचार्य पंडित राकेश झा ने बताया कि रविवार को लगा चंद्रग्रहण उपछाया ग्रहण है. अर्थात़् चंद्रमा के सामने धूल जैसी हल्‍की परत दिखाई देगी. बिहार की बात करें तो यह दिखाई नहीं देगा। इस कारण कोई सूतक काल भी नहीं होगा.

कई ज्योतिषाचार्य़ ने बताया कि किसी भी मास में दो या दो से अधिक ग्रहण होना आम जनमानस के लिए कष्टकारी होता है. ऐसे ग्रहण आर्थिक मंदी, अतिवृष्टि, राजनैतिक उथल-पुछल, महंगाई, विपदा, बेरोजगारी आदि को लेकर आते हैं. इनसे बचने के लिए स्थान-दान सूर्य उपासना गायत्री मंत्र का जाप तथा आदित्य ह्दय स्त्रोत का पाठ करना उत्तम होता है.

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