हर बार के मुकाबले इस बार दलबदल ज्यादा होगा बिहार में, जानिए क्यों ?

बिहार की राजनीति में चुनाव नजदीक आते ही दलबदल का खेल शुरु हो गया है. वैसे भी राजनीति में दलबदल कोई नई बात तो है नहीं, पुराना और लंबा इतिहास रहा है. हर नेता राजनीति में जीत चाहता है और नेता क्या, आम इंसान भी अपनी जिंदगी में सफलता के मजे लेना चाहता है. अब नेता भी इंसानों से तो अलग है नहीं.

खैर, हम बात कर रहे थें बिहार में राजनीति के नए खेल की. राजद और जदयू में दलबदल का खेल शुरु हो गया है. शह और मात चल रहा है. पहली कड़ी में जहां जदयू ने राजद के कई विधान पार्षदों को कुछ दिन पहले अपने पाले में ले लिया था तो वहीं आज नीतीश सरकार के कल तक कैबिनेट मंत्री रहें श्याम रजक आज तेजस्वी के पाले में चले गए तो वहीं राजद के चार विधायकों ने भी पाला बदल कर जदयू का दामन था लिया.

इस बार दल बदल ज्यादा होगा

राजधानी पटना स्थित एशियन डेवलपमेंट रिसर्च इंस्टीट्यूट के सदस्य सचिव और राजनीतिक विषयों के समीक्षक शैवाल गुप्ता का कहना है कि 2015 के मुकाबले इस बार के विधानसभा चुनाव में दलबदल के मामले ज्यादा देखने को मिलेंगे क्योंकि पिछले चुनाव की अपेक्षा राजनीतिक समीकरणों और आर्थिक, सामाजिक परिस्थतियों में बड़ा बदलाव आया है.

वहीं अन्य जानकारों के अनुसार पिछले चुनाव में भाजपा की ओर ज्यादा नेताओं का रुझान था क्योंकि राजद और जदयू के साथ कांग्रेस का महागठबंधन होने की वजह से कई नेताओं को बेटिकट होना पड़ा था और उन्होंने भाजपा का रुख कर लिया था. इस बार स्थिति इसलिए भी अलग है क्योंकि किसी भी दल के पास बहुत ज्यादा सीटें नहीं होंगी. ऐसे में नेताओं का समायोजन किस प्रकार से होगा, ये देखने वाली बात होगी.

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