WATCH VIDEO : हजरत के उर्स में सजी दरगाह तो मुसलमानों ने कर दी बगल के गुरुद्वारे में रौशनी

बिहार के गर्भ में न जाने कितनी हीं ऐतिहासिक और सांस्कृतिक धरोहरें छिपी पड़ी है जिसे बहुत लोग नहीं जानतें. रोहतास जिले के सासाराम में बड़े मुस्लिम फिरदौसिया सिलसिले के सूफी पीर हजरत शाह जलाल पीर रहमतुल्लाह अलैह के उर्स मुबारक का मौका था. हजरत की दरगाह के बगल में हीं सिक्खों के नवम् गुरु तेग बहादुर जी का ऐतिहासिक गुरुद्वारा चाचा फग्गूमल साहिब जी भी मौजूद है.

उर्स कें मौके पर दरगाह को रंग बिरंगी रोशनी से सजाया गया था. काफी भव्य रौशनी की गई थी. इस इलाके में हजरत शाह जलाल पीर रहमतुल्लाह अलैह और सिक्ख संत चाचा फग्गूमल की दोस्ती की कहानी काफी लोकप्रिय है. दोनों महापुरुषों की मृत्यु एक हीं दिन हुई थी. दरगाह कमिटी ने इस मौके पर फैसला लिया कि जब हजरत की दरगाह पर रोशनी हो रही है तो बगल के गुरुद्वारे मे अंधेरा क्यों रहेगा.

मुस्लिम समाज की इस पहल ने दरगाह के साथ साथ गुरुद्वारे में तो रोशनी की ही समाज में तेजी से फैल रहे सांप्रदायिकता के अंधेरे को भी दूर करने की पहल की. उर्स के मौके पर गु़रुद्वारा चाचा फग्गूमल साहिब जी के जत्थेदार सर्वजीत सिंह खालसा ने भी मंच से संबोधित किया और सभी से गुरु नानक देव जी महाराज के आगमन पर्व में शामिल होने का आमंत्रण दिया जिसे सबने सहर्ष स्वीकार किया.

क्या बताता है इतिहास

आज से 450 साल पहले इसी स्थान पर गुरु तेग बहादुर अपने पूरे परिवार के साथ पधारे थें और बेहद वृ़द्ध हो चुके गुरु घर के सेवादार फग्गूमल जी को दर्शन दिया था और उन्हें चाचाजी की उपमा से नवजा था.

सिक्ख धर्म के तीसरे गुरु अमरदास जी महाराज ने नानकशाही मिशन के प्रचार प्रसार के लिए उन स्थानों का चयन किया जहाँ जगतगुरु गुरुनानक देव जी अपने पहली उदासी (यात्रा) के क्रम में ठहरे थे. सासाराम में गुरुनानक देव जी के स्थान को चिंन्हित कर संत चाचा फग्गुमल साहिब जी को फग्वाडा (पंजाब) से सासाराम में सेवा लगाई गई.चाचा फग्गुमल जी ने गुरु जी के हुक्म को मान सासाराम आ गयें.

यहाँ इनकी मुलाकात एक मुस्लिम पीर हजरत शाहजलाल से हुई. हजरत शाहजलाल पीर फिरदौसिया सिलसिले के सूफी हुए हैं.  निरंकार के उपासक दोनों महापुरुषों की पहली मुलाकात ने ही  एक दूसरे कोजिगरी यार बना दिया। ये दोनों महापुरुष एक दूसरे के पड़ोसी थे. श्री गुरु तेग बहादर की आगमन की सूचना ज्यों ही चाचा फग्गुमल साहिब जी को मिला उन्होंने इस खुशी के पैगाम को सबसे पहले अपने दोस्त हजरत शाहजलाल पीर साहिब  को दिया। गुरु जी के दर्शन के लिए पीर साहिब के अंदर भी हलचल मची हुई थी. .

नवम गुरु तेग बहादर जी महाराज जब परिवार, संगत के साथ 1666ई में सासाराम चाचा फग्गुमल साहिब जी के पास आगमन हुआ , एवम सतगुरु के प्रवास के दौरान चाचा फग्गुमल साहिब जी ने अपने जिगरी दोस्त हजरत शाहजलाल पीर साहिब जी को सतगुरु से मिलाया. पीर साहिब गुरु जी से मिल देख कर रोम-रोम से शुकराना किया गुरु तेग बहादर जी महाराज के सासाराम से जाने के कुछ ही दिनों के बाद चाचा फग्गुमल साहिब जी सचखंडवासी (स्वर्गवास) हो गयें.

शवयात्रा में काफी भीड़ थी. पीर साहिब चाचा फग्गुमल साहिब के स्वर्गवास के समय सासाराम में नहीं थे. शव यात्रा के समय ही सासाराम आये.  बड़ी भारी भीड़ को जाते देख कौतुहल वश पुछ बैठे भाई इतनी बड़ी शव यात्रा किसकी है ? लोगों ने बताया कि चाचा फग्गुमल जी की शव यात्रा है.

पीर साहिब मंजिल के पास जा करके चाचा फग्गुमल साहिब जी के शरीर का दर्शन करते हुए कहा यार ये दोस्ती कैसी आप चल दिए और हमे कहा तक नहीं खैर चलो हम भी आ रहे है. शव यात्रा से वापस लौट स्नान वजु कर नमाज अदा की और हमेशा के लिए लेट गए.
एक तरफ जहाँ गुरु के बाग के पास चाचा फग्गुमल साहिब जी की संस्कार हो रही थी वही दूसरे तरफ हजरत शाहजलाल पीर साहिब जी की सुपुर्दे-खाक की रस्म अदा की जा रही थी.

इन दोनों महापुरुषों की दोस्ती सासाराम के तारीख की में अमर होकर कौमी एकता के संदेशों को प्रसारित प्रचारित कर रही है. आज भी गुरुद्वारा चाचा फग्गूमल साहिब जी और हजरत शाहजलाल पीर साहिब की दरगाह आमने सामने मौजूद है. जो प्रेम, भाइचारे और धर्मनिरपेक्षता की बानगी पेश करता है.

 

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here