वर्ष 2020 का प्रबोध साहित्य सम्मान से उषा किरण खान को किया जायेगा सम्मानित

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बिहार (BIHAR) के मैथिली-हिंदी की लेखिका उषा किरण खान (USHA KIRAN KHAN) को 2020 के लिए मैथिली भाषा और साहित्य का सर्वाच्च पुरस्कार ‘प्रबोध साहित्य सम्मान’ दिए जाने का ऐलान किया गया है. वे कथाकार-उपन्यासकार, नाटककार हैं. उनके आजीवन मैथिली साहित्य और अनुवाद साहित्य में योगदान दिए जाने के लिए यह पुरस्कार दिए जाने की घोषणा की गई है.फरवरी 2020 को दिल्ली या पटना में प्रतीक चिह्न और प्रशस्ति पत्र के साथ एक लाख रूपये की राशि उन्हें दी जाएगी।


बता दें कि स्वस्ति फाउंडेशन द्वारा वर्ष 2004 से प्रति वर्ष ‘प्रबोध साहित्य सन्मान’ मैथिली आंदोलन के अग्रणी नेता स्वर्गीय डॉ. प्रबोध नारायण सिंह के सम्मान में प्रदान किया जाता है. पिछले साल मैथिली और हिंदी के प्रख्यात कवि-अनुवादक हरेकृष्ण झा को इस सम्मान से सम्मानित किये गया था.

उषा किरण खान मैथिली और हिंदी दोनों भाषाओँ में योगदान दिया है. उनका जन्म 7 जुलाई 1945, लहेरियासराय, दरभंगा (बिहार) में हुआ था। वे बंदर बगीचा, डाक बंगला रोड, पटना में निवास करती है। उन्होंने मैथिली में ”भामती” और हिंदी में ‘सिरजनहार” लिखा है. उनके ये रचनाएँ ऐतिहासिक उपन्यासों की ओर दृष्टिपात करती है. उनकी पहली कहानी इलाहाबाद से प्रकाशित होने वाली यशस्वी पत्रिका ‘कहानी’ में प्रकाशित हुई थी. वे महिला चर्खा समिति पटना की अध्यक्षा हैं.

उन्हें कई सम्मानों से नवाजा जा चुका है. उन्हें बिहार राजभाषा विभाग का महादेवी वर्मा सम्मान, विद्यानिवास मिश्र पुरस्कार, दिनकर राष्ट्रीय पुरस्कार, कुसुमांजलि पुरस्कार, इतिमध्य बिहार राष्ट्र भाषा का हिंदी सेवी सम्मान के अतिरिक्त साहित्य अकादमी पुरस्कार और पद्मश्री सम्मान से नवाजा जा चुका है.

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