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टीम इंडिया का ब्रेट ली, आज क्यों जी रहा है गुमनामी की जिंदगी ?

रफ्तार का सौदागर जो आज गुमनामी की जिंदगी जी रहा ….

जिसे टीम इंडिया का ब्रेट ली कहा जाता था

चोट और फिटनेस ने करियर पर लगाया ग्रहण

जब अपनी घातक बाउंसर से गेंदबाज ने स्टुअर्ट ब्रॉड की नाक तोड़ डाली थी

क्या अब कभी भारतीय टीम के लिए खेल पाएगा यह तेज गेंदबाज ?

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आज से तकरीबन 200 साल पहले क्रिकेट सिर्फ मनोरंजन का खेल होता था, जिसे ब्रिटेन के राजाओं द्वारा खेला जाता था। उस दौर में जो लोग बल्लेबाजी करते थे उन्हें मालिक की संज्ञा दी जाती थी और जो गेंदबाजी करते थे उन्हें मजदूर की संज्ञा से नवाजा जाता था। लेकिन आहिस्ते आहिस्ते समय के साथ बदलाव आया। और फिर बल्लेबाज और गेंदबाज दोनो को एक ही श्रेणी में रखा जाने लगा । क्रिकेट में जो पहचान बल्लेबाज को मिलती थी, वही पहचान और तमगा कुछ समय बाद गेंदबाजों को भी मिलने लगा। इसके बाद यह खेल इतना खूबसूरत बन गया कि इसे दुनिया के सैकड़ों देशों ने अपना लिया। आप सोच रहे होंगे कि हम क्रिकेट की पुरानी कहानी क्यों सुना रहे है। दरअसल आज हम जिस क्रिकेटर की जीवनी आपसे शेयर करने जा रहे है। वो एक तेज गेंदबाज है। जिसकी पहचान उसकी रफ्तार है। 150 किलोमीटर प्रति घंटा की रफ्तार से गेंदबाजी करने वाले इस खिलाड़ी को कभी टीम इंडिया का ब्रेट ली भी कहा जाता था। दुनिया उसे रफ्तार का सौदागर मान चुकी थी। लेकिन उसकी फिटनेस और इंजरी ने उसकी रफ्तार में ऐसा ब्रेक लगाया कि उसके लिए टीम इंडिया में वापसी करना अब असंभव सा हो गया है। जिस बवंडर की तरह वो टीम में आया उसी तरह गायब भी हो गया।

आज हम बात करने वाले है टीम इंडिया के उस तेज गेंदबाज की जिसकी गेंदबाजी के आगे बड़े से बड़े बल्लेबाजों ने घुटने टेक दिए। उसकी बाउंसर गेंदे बल्लेबाज की नाक से खून निकाल देती थी। वो कहते है ना कि तूफान लाना बहुत आसान होता है लेकिन उस तूफान के साथ डटकर खड़े रहना बहुत मुश्किल होता है। और यही वजह है कि आज वो रफ्तार का सौदागर गुमनामी की जिंदगी जी रहा है। जिसे क्रिकेट जगत आज रफ्तार की दुनिया का गुमनाम बादशाह भी कहती है। वो कोई और नहीं बल्कि टीम इंडिया का तेज गेंदबाज वरुण एरोन है।

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वरुण एरोन का जन्म 29 अक्टूबर 1989 को झारखंड के जमशेदपुर में हुआ था। इनका पूरा नाम वरुण रेमंड एरोन है। वरुण अपने पिता क्लेमंट पॉल एरोन और मां मैरी एरोन की इकलौती संतान है। ईसाई धर्म से ताल्लुक रखने वाले वरुण का जब दाखिला स्कूल में कराया गया तो उन्हे पढ़ाई में एक भी दिलचस्पी नहीं थी। आपको जानकर हैरानी होगी कि वरुण जब 15 साल के थे तो उन्होंने अपने भविष्य को लेकर एक बहुत बड़ा फैसला लिया। दोस्तों महज 15 साल की उम्र में एक लड़का नाइंथ या फिर हाई स्कूल में होता है। और इस उम्र में बहुत सारे बच्चों को तो पता भी नहीं होता है कि उन्हें आखिर जिंदगी में करना क्या है। लेकिन वरुण एरोन ने 15 साल की उम्र में क्रिकेटर बनने की ठान ली। वो भी बतौर तेज गेंदबाज बनने की। और इसीलिए उन्होंने चेन्नई की एमआरएफ फाउंडेशन से जुड़ने का फैसला किया। जहां तेज गेंदबाजों को तराशा और निखारा जाता है।

वरुण एरोन की प्रतिभा को देखकर फाउंडेशन ने उन्हें खुद को साबित करने का मौका दिया। जहां उन्होंने अपनी तेज गेंदबाजी को तराशना शुरू कर दिया। खुद को एक मजबूत और सक्षम गेंदबाज बनाने के लिए उन्होंने कड़ी मेहनत की। महज 2, 3 साल में उन्होंने तेज गेंदबाजी के सभी गुण सीख लिए। इसके बाद उन्हें झारखंड की अंडर 19 टीम में सिर्फ चुना ही नहीं गया बल्कि कप्तान भी बनाया गया। यहां उन्होंने ठीक ठाक प्रदर्शन किया। और साल 2008 में वरुण एरोन ने झारखंड की तरफ से ही घरेलू क्रिकेट में पदार्पण किया। 2009 और 10 का रणजी सीजन वरुण के लिए अच्छा साबित हुआ। जहां उन्होंने झारखंड की रणजी टीम से खेलते हुए कई उपलब्धियां हासिल की। इस सीजन में वरुण ने 13 विकेट चटकाए थे। साल 2011 की विजय हजारे ट्रॉफी में उन्होंने 153 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से गेंद फेंकी। और नेशनल सेलेक्टर का ध्यान अपनी तरफ खींचा। उस समय टीम इंडिया के मुख्य चयनकर्ता रहे कृष्ण मचारी श्रीकांत ने वरुण एरोन की गेंदबाजी से इतने प्रभावित हुए कि उन्होंने टीम इंडिया की वनडे टीम में चुन लिया। महेंद्र सिंह धोनी की अगुवाई वाली टीम पांच वनडे मैचों की सीरीज के लिए इंग्लैंड जा रही थी। और उसी टीम में वरुण एरोन भी थे।

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23 अक्टूबर 2011 वरुण एरोन के लिए खास दिन बना। उन्होंने इंग्लैंड के खिलाफ इसी दिन वनडे क्रिकेट में डेब्यू किया था। वरुण का डेब्यू शानदार रहा। उन्होंने अपने पहले 6 विकेट बल्लेबाजों को क्लीन बोल्ड करके प्राप्त किए। इसमें एलिस्टर कुक, इयान बेल , जोनाथन ट्रॉट और केविन पीटरसन जैसे बड़े बल्लेबाज शामिल थे। वरुण ने पूरी सीरीज में 145 से 148 किलो मीटर प्रति घंटे की रफ्तार से गेंदबाजी की थी। उनकी रफ्तार को देखकर इंग्लैंड के बल्लेबाज सन्न रह गए। मैच में कई बार ऐसा भी हुआ की वरुण एरोन ने बाउंसर फेंकी और उसे धोनी भी नहीं पकड़ पाए। वरुण ने उस दौर में अपनी रफ्तार भरी गेंदबाजी से सनसनी फैला दी थी। उनके इस प्रदर्शन को देखते हुए वरुण एरोन को 22 नवंबर 2011 को वेस्टइंडीज के खिलाफ टेस्ट क्रिकेट में भी डेब्यू करने का अवसर मिला। जहां वरुण ने कैरेबियाई बल्लेबाजों को खूब परेशान किया। इसके बाद साल 2014 में वरुण एरोन एक बार फिर इंग्लैंड दौरे पर गए जहां उन्होंने एक मैच में ऐसी घातक गेंद फेंकी जिसकी वजह से बल्लेबाजी कर रहे स्टुअर्ट ब्रॉड की नाक पर गेंद जा लगी और उनकी नाक टूट गई। ब्रॉड की नाक से काफी खून निकला उस मैच में ब्रॉड खुलकर बैटिंग नहीं कर पाए। वरुण एरोन की ये बाउंसर गेंद देखकर सभी को लग रहा था कि वो टीम इंडिया के सबसे तेज गेंदबाज बनेंगे। लेकिन रफ्तार के सौदागर को इंजरी और फिटनेस ने ऐसा परेशान किया कि बहुत समय तक यह खिलाड़ी टीम इंडिया के साथ नहीं जुड़ पाया।

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वरुण ने अपना जलवा इंग्लैंड की काउंटी क्रिकेट में भी दिखाया जहां वो डरहम के लिए खेले। वरुण एरोन का इंटरनेशनल क्रिकेट करियर बहुत लंबा नहीं जा सका। साल 2014 में श्री लंका के खिलाफ वरुण एरोन ने अपना आखिरी वनडे मैच खेला। इसके बाद 2015 में साउथ अफ्रीका के खिलाफ आखिरी टेस्ट मैच वरुण के लिए आखिरी इंटरनेशनल मैच साबित हुआ। लेकिन इस बीच वो काउंटी और घरेलू क्रिकेट खेलते रहे। 2018 में रणजी ट्रॉफी, 2019 में सय्यद मुस्ताक अली ट्राफी जहां उन्होंने 10 मैचों मे 19 विकेट हासिल किए थे।

अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट की तरह वरुण एरोन का आईपीएल करियर भी काफी उतार चढ़ाव रहा है।शुरू में वरुण कोलकाता नाइट राइडर्स के साथ जुड़े। ये 2008 की बात है।लेकिन उन्हें केकेआर की तरफ से एक भी आईपीएल मैच खेलने को नहीं मिला। इसके बाद साल 2011 में वरुण एरोन दिल्ली डेयर डेविल्स से जुड़े और यही से उन्होंने आईपीएल में डेब्यू किया। जहां उन्होंने अच्छा खेल दिखाया। 2014 में वरुण रॉयल चैलेंजर्स बैंगलोर से जुड़े। इसके बाद 2017 के आईपीएल में किंग इलेवन पंजाब ने उन्हें 2.8 करोड़ में खरीदकर टीम में शामिल किया। दो साल बाद वरुण राजस्थान रॉयल्स के साथ जुड़ गए। और फिर 2022 में हार्दिक पंड्या की गुजरात टाइटंस के साथ वरुण जुड़े। वरुण आईपीएल ही सही एक चैंपियन टीम का हिस्सा तो बने। इससे पहले वरुण एरॉन अपनी प्रेमिका रागिनी सिंह के साथ साल 2016 में शादी के पवित्र बंधन में बंध गए।

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कभी टीम इंडिया का ब्रेटली कहे जाने वाले वरुण एरोन के क्रिकेट करियर पर भी नजर डाल लेते हैं। सिर्फ 9 टेस्ट मैच खेलने वाले वरुण एरोन ने टेस्ट क्रिकेट में 52 की औसत से 18 विकेट और इतने ही वनडे मैच में 38 की औसत से 11 विकेट अपने नाम किए है। वहीं आईपीएल की बत्बक्रें तो आईपीएल के कुल 52 मैचों मे 23 की औसत से 44 विकेट हासिल किए है।

दोस्तों, टीम इंडिया में वापसी के लिए तरस रहे वरुण एरोन क्या अब फिर कभी भारत के लिए सफेद और रंगीन जर्सी में नजर आएंगे ? आप हमें वीडियो में कमेंट करके बता सकते हैं . 

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