बिहार के इस लाल ने पर्वतारोहण में दिखाया कमाल, 15000 फ़ीट पर लहराया तिरंगा

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उम्र के जिस पड़ाव में जहाँ अमूमन किशोर medical, engineering जैसे आकर्षक क्षेत्र में अपना करियर बनाना चाहते हैं, वैसे में सोनो के विशाल ने पर्वतारोहण के जोखिम भरे इलाके में अपना करियर बनाने का ठाना और सिर्फ 17 साल की आयु में हिमाचल प्रदेश के रोहतांग के 15 हज़ार फ़ीट ऊंचे बालचंद्रा पर्वत के बर्फीले शिखर पर चढ़कर भारत का तिरंगा लहराया। विश्वभर में पर्वतारोहण को एक साहसिक करियर माना जाता है इसके लिए मानसिक और शारीरिक शक्ति के साथ बहुत सारी हिम्मत तथा साहस की जरुरत होती है फिर भी दृढ़ इच्छाशक्ति के साथ विशाल ने पर्वतारोहण के क्षेत्र में ही अपना भविष्य विशाल ने खोजना आरंभ किया।

Atal Bihari Vajpayee Institute of Mountaineering, मनाली से बेसिक कोर्स करने के बाद बीते 20 जून को हिमाचल प्रदेश की 15,000 की बालचंद्रा पर्वत पर चढ़ाई कर भारत का तिरंगा लहराया एवं अपने गांव समाज को गौरवान्वित होने का अवसर दिया। विश्व की सबसे ऊंची चोटी mount everest की लगभग आधी ऊँचाई की चढ़ाई करने के बाद पिता और शिक्षक राजेंद्र दास तथा माँ और पूर्व जिप सदस्य कांति देवी के बेटे विशाल की ख्वाहिश mount everest पर सोनो का नाम रोशन करने का है।

ज़िद्द कर लिया दाखिला

स्थानीय प्लस टू राज्य विद्यालय यानि राज्य संपोषित उच्च विद्यालय से मैट्रिक व इंटर साइंस की परीक्षा पास करने के बाद विशाल ने मनाली स्थित Atal Bihari Vajpayee Institute of Mountaineering में दाखिला लिया था तथा वहां से पर्वतारोहण का बेसिक कोर्स किया। पिता राजेंद्र दास कहते हैं कि इसके लिए उसे मना किया गया लेकिन अंततः उसकी इच्छा एवं जिद्द के आगे झुकना पड़ा। पर्वतारोहण के इलाके में लगन तथा कठिन परिश्रम के वजह से पर्वतारोहण में उसे A grade मिला। विश्व में सबसे ऊंची चोटी पर तिरंगा लहराने का लक्ष्य लिए विशाल कठिन परिश्रम कर रहा है। विशाल की इस कामयाबी पर प्रखंड के बुद्धजीवियों में बहुत प्रसन्नता है।

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