पहली दुल्हन के साथ लिए सात फेरे दूसरी के साथ हुई बिदाई, कही ऐसा देखा है

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यह खबर किसी बॉलीवुड फिल्म की पटकथा से कम नहीं है, शादी के दौरान मंडप पर दुल्हे दुल्हन को सात फेरे का मतलब समझाया जाता है. उसमें बताया जाता है कि इस सात फेरे का मतलब होता है सात जन्मों का बंधन. पर इस दुल्हन ने न तो उस सात फेरे का मतलब समझा और न ही उस उस बंधन के धर्म को निभा पाई. रात में हुई शादी के बाद सुबह वह फरार हो गई.

दुल्हन की फरार होने की खबर जब घरवालों को लगी तो उनके तो होश ही उठ गए. यह खबर धीरे-धीरे पूरे गांव में फैल गई. लोगों न जब इस खबर को सुना तो वे भी अवाक रह गए. इस के दिमाग में बस यह चल रहा था कि दुल्हे का क्या होगा. इधर दुल्हन के परिजन घर छोड़कर भाग गए.

इतना होने के बाद गांव में पंचायत बैठी और पुलिस को इसकी सूचना दी गई. सूचना के बाद मांझा थाने की पुलिस मौके पहुंची. गांव के बुद्धिजीवीयों ने पंचायत में निर्णय लिया कि पड़ोस की गरीब बेटी की शादी इंजीनियर दूल्हे के साथ शादी करायी जाए. आपको बता दें कि दुल्हा यूपी के कुशीनगर जिले के तरेया सुजान थाने के भगवानपुर गांव का रहने वाला है. डॉ. घनश्याम कुमार के पुत्र ई. सुधीर कुमार की शादी 26 फरवरी को मांझा थाने के शेखपरसा गांव में अमरनाथ प्रसाद की पुत्री कुमारी मनोरमा के साथ हुई.

दुल्हन के घर में नहीं होने की बात तब पता चला जब शादी की रस्म पूरी करने की तैयारी चल रही थी. इधर दुल्हन अपने आशिक के साथ फरार हो चुकी थी. और दुल्हा विदाई की रस्म पुरी करने के लिए दुल्हन के घर पहुंचा. दरवाजे पर पहुंचते ही देखा की पूरे घऱ में सन्नाटा पसरा हुआ है.उसके बाद दुल्हन को पता चला कि दुल्हन घर से फरार हो चुकी है.

पंचायत में पंचायत के मुखिया और मांझा थाना के मौजूदगी में यह निर्णय हुआ कि स्व. अर्जुन प्रसाद की पुत्री सुनीता कुमारी के साथ दुल्हे की शादी कराई जाए. इसके बाद दुल्हे और उनके परिजन से यह पुछा गया तो उन्होंने इस शादी को लेकर अपनी हामी भर दी. अब सुनीता की शादी इ. सुधीर की गांव के ही काली मंदिर में पूरे रस्मो रिवाज के साथ शादी करायी गई. विदाई के दौरान दुल्हन का सारा सामान उसे दिया गया.

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