ह्यूमन ब्रेन का 10 % इस्तेमाल ही संभव, मिथक या सत्य ?

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वैज्ञानिकों ने दावा किया है कि मनुष्य का मस्तिष्क (Human Brain) अपने वास्तविक आकार में विकसित हो चुका है, अब उसका आकार विकसित नहीं होगा, 10 प्रतिशत की बात हास्य

पृथ्वी पर मौजूद सभी जीवों की अपनी-अपनी अलग विशेषताएं हैं। इन्हीं जीवों में से एक जीव मानव ने समय के अनुसार अपने दिमाग का विकास किया और अन्य जीवों और तत्वों (Elements for Life) को समझा है। मानव पृथ्वी पर मौजूद सभी जीवों में श्रेष्ठ और विकसित है। सवाल उठते रहे हैं कि आखिर इंसान कितने प्रतिशत दिमाग का इस्तेमाल कर पाता है? विज्ञान के लगभग सभी क्षेत्रों में कई रेवोलुशन लाने वाले और सदी के महान वैज्ञानिक अल्बर्ट आइंस्टीन के बारे में एक प्रसिद्ध मिथक प्रचलित है कि “उन्होंने अपने दिमाग का 13 प्रतिशत उपयोग किया था, जबकि एक सामान्य व्यक्ति अपने ब्रेन का सिर्फ एक से दो प्रतिशत का ही उपयोग कर सकता है।”

हालांकि ज्यादातर वैज्ञानिक इस लॉजिक को मिथ्य मानते हैं कि एक इंसान अपने दिमाग का सिर्फ 10 प्रतिशत ही यूज कर पाता है। दरअसल 19वीं सदी की आखिरी दशक में शुरु हार्वर्ड यूनिवर्सिटी (Harvard University) के दो वैज्ञानिकों ने इस पर रिसर्च किया और डिपार्टमेंट के मैगजीन में इसके रिपोर्ट को पब्लिश किया। इसके बाद लोगों में में यह बात फैल गई कि इंसान अपने ब्रेन का 10 प्रतिशत हिस्सा ही यूज कर पाता है।

1907 में विज्ञान पत्रिका SCIENCE  में एक लेख प्रकाशित हुआ, जिसे विलियम जेम्स ने ही लिखा था। जिसमे उन्होंने कहा कि “हम अपने मस्तिष्क में उपस्थित मानसिक और भौतिक संसाधनों का केवल एक छोटा सा हिस्सा ही उपयोग करते हैं, यानी मनुष्य अपने मस्तिष्क का केवल 10 प्रतिशत ही प्रयोग करता है।”

कुछ इस तरह हुई इस मिथ्य की शुरुआत 

1890 के दशक में हार्वर्ड के दो मनोवैज्ञानिकों (Psychologist), विलियम जेम्स (William James) और बोरिस सिडीस (Boris Sidis) का एक रिसर्च रिपोर्ट आया। हार्वर्ड के ये दोनों वैज्ञानिक आरक्षित ऊर्जा सिद्धांत (Reserveed Energy Theory) पर रिसर्च कर रहे थे। रिसर्च के दौरान उन्होंने बाल प्रजनन (Child Reproduction)  की क्विक ग्रोथ में इस सिद्धांत का परीक्षण किया। इस रिसर्च में दोनों वैज्ञानिक एक बहुत ही उच्च IQ वाला लड़का विलियन सिडिस पर अध्ययन कर रहे थे जिसका IQ वयस्क (एडल्ट) होने पर 250-300 के बीच था।

इस रिसर्च के बारे में एक इंटरव्यू के दौरान विलियम जेम्स ने कहा कि लोग अपनी मानसिक क्षमता का केवल एक अंश ही इस्तेमाल करते हैं, जो वास्तव में बहुत प्रैक्टिकल भी था। लेकिन समय बीतने के साथ-साथ उनका यह स्टेटमेंट मिथक के रूप में प्रसिद्ध होता गया।

मिथक में मीडिया का बहुत बड़ा योगदान 

इस मिथक को लोगों तक पहुंचाने में मीडिया का बहुत बड़ा रोल रहा। टीवी, रेडियो और इंटरनेट के आ जाने के बाद इसके जरिए यह बात बताया जाने लगा कि इंसान अगर चाहे और कोशिश करे तो वह अपने दिमाग का 10 प्रतिशत हिस्सा यूज कर सकता है। हॉलीवुड की कई साइंस-फिक्शन फिल्म भी इसी कांसेप्ट पर बेस्ड हैं। हॉलीवुड सुपरस्टार स्कार्लेट जोंसन और मॉर्गन फ्रीमेन की फिल्म ‘लूसी’ इसी रिसर्च के कांसेप्ट पर बेस्ड है। 

तथ्य जो सिद्ध करते हैं कि मनुष्य अपने दिमाग का 100 फीसदी यूज करता है

इंसान का सिर्फ दस प्रतिशत दिमाग का इस्तेमाल करना एक मिथक हो सकता है। इसका एक उदाहरण यह है कि हमारे मस्तिष्क (Human Brain) के 100 प्रतिशत नयूरोंस एक दूसरे से संकेतों का आदान-प्रदान (communicate) करते हैं, जिससे यह सिद्ध होता है कि मनुष्य का दिमाग 100 प्रतिशत इस्तेमाल होता है न कि 10 प्रतिशत। दूसरी बात ज्यादा महत्वपूर्ण है कि कई बड़े वैज्ञानिकों का कहना है कि मनुष्य का मस्तिष्क (Human Brain) को जितना विकसित होना था हो चुका है। अब उसका आकार विकसित नहीं होगा।

विलियम जेम्स के उस रिसर्च को बाद में कई वैज्ञानिकों ने अध्ययन किया और डेल कार्नेगी ने अपनी किताब ‘हाउ टू विन फ्रेंड्स एंड इंफ्लुएंस पीपल’ में भी इसी रिसर्च के स्टेटमेंट को जगह भी दिया। इसके बाद लोग इसे सच मानने लगे। यह किताब 1936 में पब्लिश हुई थी।

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