पहली रिपोर्ट : रोहतास जिले की सभी 07 सीटों पर क्या रहेगा महागठबंधन का मिजाज ?

2015 के बिहार विधानसभा चुनाव में रोहतास जिले की 07 में से 06 सीटों पर राजद और जदयू का कब्जा हुआ था. उस दौरान एनडीए का हिस्सा रही राष्ट्रीय लोक समता पार्टी को एक सीट पर जीत नसीब हुई थी. इस बार दोनों गठबंधनों का स्वरुप थोड़ा अलग रहने वाला है. एनडीए में जहां लोजपा के रहने को लेकर सस्पेंस बना हुआ है तो वहीं यूपीए में मांझी और सहनी को लेकर अनिश्चितता के बादल मंडरा रहे हैं. इस बार किसकी झोली में महागठबंधन का टिकट गिर सकता है, इस पर एक रिपोर्ट हम प्रस्तुत कर रहे हैं.

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सासाराम : कुशवाहा बहुल सासाराम सीट पर फिलहाल राजद के डॉ अशोक कुमार कुशवाहा विधायक हैं. 2015 के पहले वो एक बार 2000 में भी जीत चुके हैं. इसके अलावा 1995, 2005 फरवरी, 2005 नवंबर और 2010 में हारने का रिकॉर्ड भी उनके नाम बना हुआ है. प्रदेश राजद अध्यक्ष जगदानंद के करीबी माने जाने वाले अशोक को इस बार भी सीट मिलने की संभावना व्यक्त की जा रही है.

वहीं राजद के दूसरे दावेदारों में संजय कुमार सिंह और युवा नेता शिवंत कुशवाहा का नाम शामिल है. कांग्रेस या रालोसपा जैसी दूसरी सहयोगी पार्टियों ने इस सीट पर कोई दावा नहीं किया है.

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चेनारी : चेनारी एक सुरक्षित विधानसभा सीट है, जहां से पिछली बार महागठबंधन उम्मीदवार के तौर पर कांग्रेस के मंगल राम को दूसरा स्थान मिला था. इस बार भी यह सीट कांग्रेस के खाते में जाने की संभावना है. उम्मीदवार के तौर पर पूर्व विधायक मुरारी प्रसाद गौतम के नाम की चर्चा तेज है. मुरारी के पिता महेंद्र राम इस इलाके के चर्चित दलित नेता हुआ करते थें. मुरारी के पास महागठबंधन के आधार वोटों के अलावा अपना व्यक्तिगत भी अच्छा खासा प्रभाव है. इसके साथ ही मंगल राम भी रेस में माने जा रहे हैं. अगर ये सीट रालोसपा के खाते में जाती है तो संजीव कुमार की उम्मीदवारी सबसे मजबूत होती दिखाई पड़ती है. वहीं राजद में सुषमा पासवान भी प्रबल उम्मीदवार हैं.

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करगहर : इस सीट पर फिलहाल जदयू के विधायक हैं. करगहर विधानसभा सीट को लेकर सस्पेंस है और ये बेहद दिलचस्प है. अगर ये सीट राजद कोटे में जाती है तो यहां से पूर्व मंत्री रामधनी सिंह के पुत्र उदय सिंह प्रबल दावेदार हो सकते हैं. राजद की ओर से वरिष्ठ नेता रामवचन पांडेय भी दावेदारी जता रहे हैं.

ब्राह्मण समाज की अच्छी खासी संख्या होने की वजह से कांग्रेस का भी इस सीट पर मजबूत दावा है. कांग्रेस से वर्तमान जिलाध्यक्ष संतोष कुमार मिश्रा, युवा नेता अखिलेश त्रिपाठी भी खुलकर अपनी दावेदारी जता रहे हैं. पूर्व जिला परिषद अध्यक्ष प्रमीला सिंह भी करगहर सीट से कांग्रेस की दावेदार हैं. प्रमीला इस इलाके की कद्दावर राजपूत नेता मानी जाती हैं. पूर्व लोकसभा स्पीकर मीरा कुमार की नजदीकी मानी जाती हैं. कांग्रेस की जिलाध्यक्ष और प्रदेश महासचिव भी रह चुकी हैं. फिलहाल बिहार राज्य बाल संरक्षण आयोग की सदस्य हैं.

पिछली बार यहां से रालोसपा के उम्मीदवार ने दूसरा स्थान हासिल किया था. रालोसपा से पूर्व पत्रकार और वर्तमान में राष्ट्रीय महासचिव सह प्रवक्ता मिथिलेश कुमार सिंह सबसे आगे हैं. वैसे दूसरे कई रालोसपा नेता भी दावेदारी में पीछे नहीं है. मिथिलेश उपेंद्र कुशवाहा के बेहद करीबी हैं जिन्हें पार्टी में स्वयं उपेंद्र ही लेकर आए हैं. इसके पूर्व मिथिलेश दिल्ली में रजत शर्मा के चैनल इंडिया टीवी में कार्यरत थें.

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डेहरी : डेहरी में कोई किन्तु परन्तु नहीं है. पूर्व मंत्री मोहम्मद इलियास हुसैन के पुत्र फिरोज हुसैन का टिकट शत प्रतिशत तय माना जा रहा है. वैसे युवा राजद के प्रदेश महासचिव अशोक भारद्वाज, प्रखंड प्रमुख पूनम यादव और नकीब हैदर भी खुद को दावेदार मानते हैं पर रोहतास, कैमूर की 11 विधानसभा सीटों में से फिरोज इकलौते अल्पसंख्यक उम्मीदवार हैं, इसे देखते हुए फिरोज का लड़ना तय माना जा रहा है. फिरोज हुसैन पिछला विधानसभा उपचुनाव 30 हजार के अंतर से हार गए थें लेकिन उन्होंने इसके बाद अपने विचार, व्यवहार और वाणी से लोगों का दिल जीता है क्योंकि फिरोज बेहद सरल स्वभाव के हैं. पूर्व मंत्री का पुत्र होने का लेस मात्र भी अहंकार नहीं दिखाई देता है.

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नोखा : नोखा की वर्तमान विधायक और पूर्व मंत्री अनिता देवी पूरे बिहार में नोनिया समाज की स्वीकार्य नेता हैं. स्वभाव से बेहद सरल अनिता देवी का टिकट शत प्रतिशत तय है. कांग्रेस या रालोसपा की ओर से इस सीट के लिए कोई दावेदारी नहीं है. नोखा को आज की परिस्थिति में राजद सबसे सेफ सीट मान कर चलती है.

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काराकाट : यहां के विधायक संजय कुमार सिंह उर्फ संजय यादव लालू प्रसाद यादव के बड़े बेटे तेजप्रताप यादव के करीबी माने जाते हैं. ऐसे में उनकी सीट तय मानी जा रही है लेकिन उनकी राह का सबसे बड़ा रोड़ा पूर्व केंद्रीय मंत्री डॉ कांति सिंह हैं. डॉ कांति सिंह स्वयं के लिए या अपने पुत्र ऋषि के लिए काराकाट सीट चाहती हैं.

दिनारा : इस सीट पर टिकट के लिए राजद में बहुत ज्यादा भी मारामारी है क्योंकि यह सीट खाली है पर यहां के लिए सबसे मजबूत दावा पूर्व जिलाध्यक्ष विजय कुमार मंडल और पूर्व विधायक सीता सुंदरी का है. दिनारा विधानसभा क्षेत्र बक्सर लोकसभा क्षेत्र का हिस्सा है, जहां से स्वयं प्रदेश अध्यक्ष जगदानंद सिंह संसदीय चुनाव लड़ते हैं. विजय कुमार मंडल को जगदानंद का पुराना शार्गिद माना जाता है. मंडल की मजबूत दावेदारी के पीछे पार्टी और जगदानंद के प्रति निष्ठा और समपर्ण भावना को मानी जा रही है. वहीं कांग्रेस की ओर से पूर्व जिला परिषद अध्यक्ष शीला सिंह कुशवाहा भी अपनी उम्मीदवारी जता रहीं हैं. शीला 2010 में भी यहां से उम्मीदवार रह चुकी हैं.

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