लालू को किसने दिया था राबड़ी देवी को सीएम बनाने का सुझाव

लालू प्रसाद यादव का 1997 में जेल जाना तय हो गया था. उस वक्त लालू प्रसाद बिहार के सीएम थें. जेल जाने से पूर्व उन्हें सीएम पद से इस्तीफा देने की परिस्थिति बन गई थी. लालू ने इस्तीफा दिया और जेल गए. जेल जाने से पूर्व उन्होंने अपनी पत्नी राबड़ी देवी को बिहार की कमान सौंप दी. लालू के इस निर्णय की बेहद आलोचना हुई थी. शुरुआती दौर में लालू प्रसाद अपनी पत्नी को सीएम बनाने के पक्ष में नहीं थें लेकिन उन्हें ये सलाह कांग्रेस की ओर से मिली थी.

Rabri Devi earns double money more than her husband lalu prasad Yadav

कांग्रेस अध्यक्ष ने दी सलाह

उस दौरान कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष सीताराम केसरी हुआ करते थें जो बिहार से ही थें. लालू प्रसाद यादव ने एक बार बताया कि उन्हें ये सलाह सीताराम केसरी ने ही दी थी कि आप अपनी सत्ता की कमान अपनी पत्नी राबड़ी देवी को सौंप दिजिए. लालू बताते हैं कि सीताराम केसरी की इस सलाह पर शुरुआती दौर में काफी हंसी आई. इसके बावजूद माहौल ऐसा बना कि राबड़ी देवी बिहार की मुख्यमंत्री बनीं और 08 सालों तक वो इसी पद पर रहीं.

Decades after sacking Sitaram Kesri, Congress deletes his name ...

विधायक दल की बैठक में तय हुआ नाम

24 जुलाई 1997 की वो शाम थी. मुख्यमंत्री आवास में विधायक दल की बैठक बुलाई गई. लालू ने इस बैठक में घोषणा की कि मैंने कानूनी मामलों को देखते हुए मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देने का निर्णय कर लिया है. ये पार्टी के लिए संकट का वक्त है और संकट के इस दौर में आप सभी से मुख्यमंत्री पद के लिए किसी एक नेता के नाम के चयन का आग्रह करता हूं. विधायक दल का नेता ऐसा हो जो कि आप सभी को पसंद हो. लालू ने अपनी ओर से किसी के भी नाम का प्रस्ताव नहीं दिया. उन्होंने राजद विधायकों पर नेता का फैसला लेने का जिम्मा छोड़ दिया.

राबड़ी के नाम का सुझाव

लालू की इस घोषणा के बाद विधायक दल में सन्नाटा और उदासी दोनों छा गई. फिर वहां मौजूद वरिष्ठ नेताओं जगदानंद सिंह, प्रो रघुवंश प्रसाद सिंह, प्रो रघुनाथ झा और महावीर प्रसाद ने राबड़ी देवी के नाम का सुझाव दिया. सभी विधायकों ने इस प्रस्ताव का समर्थन किया और राबड़ी देवी बिहार की नई मुख्यमंत्री बनने की ओर बढ़ चली. दिलचस्प बात यह रही कि राबड़ी देवी इन सभी बातों से अनजान इस वक्त अपनी रसोईं में थीं.

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