विश्व में सबसे पहले 2 साल के बच्चों का वैक्सीन ट्रायल भारत में, तीन ग्रुप में बांटे गए

0
143

करोना वायरस की दूसरी लहर ने सबसे ज्यादा लोगों की मौत हुई है. ऐसे में अब कहा जा रहा है कि तीसरी लहर में सबसे ज्यादा परेशानी बच्चों को होने वाला है. ऐसे में अब देश में कोरोना वैक्सीन का ट्रायल किया जा रहा है. आपको बता दें कि अभी विश्व के किसी देश में वैक्सीन का ट्रायल शुरू नहीं किया गया है. बच्चों को तीन ग्रुप में बांटकर वैक्सीन का ट्रायल कानपुर में किया जा रहा है। जिसके सकारात्मक परिणाम सामने आ रहे हैं.

भारत बायोटेक की को-वैक्सीन ने बच्चों पर ट्रायल शुरू किया है. कानपुर के प्रखर हॉस्पिटल में बीते मंगलवार से बच्चों पर ट्रायल शुरू किया गया था. वैक्सीन ट्रायल के लिए बच्चों को तीन ग्रुप में बांटा गया है. पहले ग्रुप में दो साल से छह साल, दूसरे ग्रुप में 6 साल से 12 साल और तीसरे ग्रुप में 12 साल से 18 साल के बच्चों को रखा गया है. आपको बता दें कि वैक्सीन के पहले दिन 12 साल से 18 साल के 40 बच्चों को स्क्रीनिंग में शामिल किया गया था. इनमें से 20 बच्चे वैक्सीन के लिए तैयार पाए गए हैं. बुधवार को 6 साल से 12 साल के बच्चों में 10 बच्चों का चेकअप किया गया. जिसमें से 5 बच्चे फिट पाए गए हैं. इन बच्चों को वैक्सीन लगा दी गई है. इन बच्चों को 45 मिनट के ऑब्जर्वेशन पर रखा गया. इस दौरान कुछ बच्चों को सुई वाली जगह पर हल्के लाल निशान देखने को मिले थे जो की सामान्य माना जा रहा है.

मीडिया में चल रही खबरों की माने तो वैक्सीन ट्रायल के चीफ इंवेस्टीगेटर बाल रोग विशेषज्ञ प्रोफेसर वीएन त्रिपाठी ने कहा कि दो साल के बच्चों पर कोरोना का दुनिया में पहला ट्रायल है. इतने छोटे बच्चों पर कहीं भी कोरोना वैक्सीन का ट्रायल नहीं हुआ है. आपको बता दें कि कानपुर में रूसी वैक्सीन स्पूतनिक और जाइडस कैडिला का ट्रायल हो चुका है.

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here