एक साथ किसानों को मिलेंगी ये 25 सुविधाएं

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प्राथमिक कृषि ऋण सहकारी समितियों द्वारा किसान की जरूरतों को पूरा करने के लिए बिहार के ग्रामीण क्षेत्रों में बहुसेवा केंद्र और एकल खिड़की एजेंसीयों के रूप में कार्य करने के लिए विकसित किया जा रहा है. बता दें की बिहार में पहले चरण में 2500 प्राथमिक कृषि ऋण सहकारी समितियों का कंप्यूटरीकरण 25 सेवाओं को एक हीं मंच पर उपलब्ध कराने और तकनीक द्वारा कुशल प्रबंधन की पहल करने के लिया किया जाएगा. जिला स्तर पर 200 पैक्स के समूह में सहायता भी प्रदान की जायेगी. मिली जानकारी के अनुसार 50 हजार रुपए प्रति पैक्स की प्रतिपूर्ति पैक्स का कंप्यूटरीकरण पूरा करने के लिए किया जायेगा.

तीन स्तरीय अल्पकालिक सहकारी ऋण ढांचा के सबसे निचले स्तर पर पैक्स है. साथ हीं साथ ग्रामीण अर्थव्यवस्था के विकास के नज़रिए से भी यह महत्त्वपूर्ण है. नाबार्ड द्वारा जिला केन्द्रीय सहकारी बैंक और राज्य सहकारी बैंक को पहले हीं स्वचालित बना दिया है. बता दें की कॉमन बैंकिंग सॉफ्टवेर प्लेटफार्म पर पैक्स भी रहेगी तथा एक सामान्य लेखा प्रणाली को हर रोज के कामों के लिए लागू किया जाएगा. डॉ. केपी रंजन जो की डीएनएस क्षेत्रीय सहकारी प्रबंध संस्थान के निदेशक हैं उन्होंने बताया की पैक्स के मैन्युअल होने से इनमें अक्षमता और विश्वास की कमी है.यह परियोजना ग्रामीण क्षेत्रों में डिजिटलीकरण में सुधार के अलावे बैंकिंग गतिविधियों के साथसाथ गैर बैंकिंग गतिविधियों के आउटलेट के रूप में पैक्स की पहुँच में सुधार करने में मदद करेगी.

चलिए अब अपने इस चर्चा के बीच हम बात करते हैं की वे कौनकौन सी सुविधाएं हैं जो पैक्स के एक हीं प्लेटफार्म पर वो सुविधाएं दिलाने में मदद करेंगी. इन सुविधाओं में कस्टम हायरिंग सेण्टर, अल्पकालिक, फूलों की खेती, माध्यम अवधि और दीर्घकालिक ऋण, मधुमक्खी पालन, उर्वरक और कीटनाशक वितरण, मछलीझींगा खेती, बीज वितरण, चिकन, मत्स्य पालन, भेड़बकरी, डेयरी, सूअर पालन, मुर्गी पालन गतिवधियां, रेशम उत्पादन, कृषि मशीनरी, दुग्ध उत्पादन, कृषि उपकरण, खाद्यान की खरीद, कॉमन सर्विस सेण्टरडेटा सेण्टर लॉकर सुविधा, संग्रह, बिमा सुविधा, ग्रेडिंग, व्यावसायिक पत्राचार, सफाईपैकेजिंग से सम्बंधित गतिविधियाँ, बैंक मित्र, कृषि उत्पादों की ब्रांडिंग और विपणन, पेट्रो पदार्थों की डीलरशिप, कृषि उत्पाद प्रसंस्करण, भण्डारण सुविधा, उचित मूल्य की दुकाने, सामुदायिक केंद्र, अस्पताल और शिक्षा आदि की सुविधा शामिल है.

डॉ. केपी रंजन द्वारा यह भी बताया गया की देश के ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सुचारू रूप से बनाए रखने के लिए पैक्स किसानों को अल्पकालिक और मध्यम अवधि का ऋण प्रदान करने से यह एक महत्त्वपूर्ण कड़ी के रूप में कार्य करता है. पैक्स की संचालन गतिविधियों को जारी रखने के लिए अकेले इन व्यवसायों से होने वाली आय पर्याप्त नहीं है. अभी के समय में पैक्स द्वारा की जाने वाली आर्थिक गतिविधियाँ और इन गतिविधियों से सम्बंधित उपनियम पर प्रतिबन्ध है, जो अधिकत्तर मामलों में काफी पुरानी है और इन्हें संशोधित करने की जरूरत है.

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