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सड़कों पर कचरा उठाने वाला कैसे बना दुनिया सबसे बेखौफ बल्लेबाज जिसे दुनिया यूनिवर्स बॉस नाम से जानती है

Bihari News

सड़कों पर कचरा उठाने वाला कैसे बना दुनिया सबसे बेखौफ बल्लेबाज जिसे दुनिया यूनिवर्स बॉस नाम से जानती है…

चोरी करने से लेकर कचरा उठाने वाले इस खिलाड़ी की कहानी आपको हैरान कर देगी

क्रिकेट का एक ऐसा बल्लेबाज जिसके सामने गेंदबाज गेंदबाजी करने से कांपता था

जब गेल के गदर से गर्दा हो जाते हैं विरोधी गेंदबाज

333 नंबर की जर्सी पहनने के पीछे क्या है यूनिवर्स बॉस का रहस्य

दोस्तों, दुनिया में लगभग 200 छोटे बड़े देश है। इसमें करीब 100 देश ऐसे है जो क्रिकेट खेलते है। और इस क्रिकेट में करोड़ो की संख्या में युवा वर्ग क्रिकेटर बनने का सपना देखता है। लेकिन हर कोई किस्मत वाला नहीं होता .. कोई क्रिकेट को जीता है तो कोई क्रिकेट के प्रति समर्पित हो जाता है। इतना ही नहीं कई बार तो जिंदगी ऐसे दोहराए पर खड़ी कर देती है जहां सपने और जिंदगी का चुनाव करना कठिन हो जाता है। क्रिकेट जैसी चकाचौंध दुनिया में आपको सभी खिलाड़ी हैं डैसिंग और परफेक्ट दिखते है। मगर उनके पीछे का संघर्ष आपको बिल्कुल नजर नहीं आता।

गुरबत की जिंदगी जीने वाला , सड़को पर कचरा उठाने वाला , रोटी के लिए चोरी करने वाला एक ऐसा क्रिकेटर जिसने हार नही मानी। दोस्तों एक बार बिल गेट्स ने कहा था कि अगर आप एक गरीब परिवार में जन्म लेते है तो ये आपकी गलती नहीं है लेकिन आप गरीब रहते हुए इस दुनिया को छोड़कर चले जाते हो तो यह सिर्फ और सिर्फ आपकी गलती है। हमने यह बात इसलिए कही कि क्रिकेट का एक ऐसा खिलाड़ी जो पैदा हुआ एक गरीब परिवार में लेकिन आज उसके पास अरबों की संपत्ति है। …

आज हम आपके लिए लेकर आए हैं एक ऐसे खिलाड़ी की दास्तां जिसे सुनने के बाद आप संघर्ष करना सीख जायेंगे। क्योंकि उस खिलाड़ी ने कुछ ऐसा ही किया है और आज वो विश्व क्रिकेट का यूनिवर्स बॉस बनकर बैठा है। अभी तक आपने अंदाजा लगा ही लिया होगा। फिर भी हम आपको बता देते है। दरअसल आज हम अपनी सीरीज के इस अंक में बात करने वाले है सिक्सर किंग और वेस्टइंडीज क्रिकेट के धाकड़ ओपनर बल्लेबाज क्रिस गेल की…..

क्रिस गेल का जन्म 21 सितम्बर साल 1979 को जमैका के किंग्सटन शहर में हुआ था। गेल का पूरा नाम हेनरी क्रिस्टोफर गेल है। क्रिकेट में गेल को कई निकनेम जैसे यूनिवर्स बॉस, गेल स्ट्रॉन्ग, और सिक्सर किंग जो उनके किताब का नाम भी है इन नामों से भी दुनिया क्रिस गेल को जानती है। पिता डेडली गेल और माता हेजल गेल की 6 संतानों में से पांचवें नंबर की संतान क्रिस गेल थे। गेल के पिता जमैका शहर में पुलिसमैन के पद पर तैनात थे। जबकि मां जमैका की सड़कों पर स्नैक्स बेचने का काम करती थी। गेल का परिवार गुरबत भरी जिंदगी के बीच अपना जीवन यापन कर रहा था। एक कमरे की झोपड़ पट्टी में रहने वाला 10 लोगों का परिवार जिस तरह से जिंदगी बसर कर रहा था उससे क्रिस गेल को बाहर काम करने के लिए मजबूर होना पड़ा। गेल को जब कहीं काम नहीं मिला तो कस्बों में जगह जगह कचरा बिनने का काम करना पड़ा , गेल को डस्टबिन से जो भी चीजें मिल जाती उसे जाकर बेच देते थे। गेल की पीठ पर सुबह स्कूल का बस्ता और शाम को कचरे का बैग गेल को बोझ लगने लगा तो उन्होंने दसवीं के बाद पढ़ाई छोड़ दी। परिवार के लिए गेल को जो भी काम मिला करना पड़ा । जब कभी पेट की भूख चरम पर पहुंच जाती तो गेल को चोरी तक करना पड़ा। इस विकट परिस्थितियों में शहर की गलियों और नुक्कड़ों में कूड़ा करकट बिनने वाले क्रिस गेल के अंदर एक क्रिकेटर भी अपने पंख फैला रहा था। गेल ने पढ़ाई भले ही छोड़ दी थी लेकिन उनके साहस ने उनका साथ दिया। गेल को जब अपने काम के बीच समय मिलता तो गली मोहल्लों के लड़के के साथ वो क्रिकेट खेलते थे। क्रिकेट के दादा जी को क्रिकेट में बहुत इंट्रेस्ट था। उनके दादा ने जिस डोमेस्टिक क्रिकेट की विरासत को छोड़ दिया था क्रिस गेल उसे शिखर तक पहुंचना चाहते थे। और यही वजह थी कि जब गेल अपने उम्र के बड़े लड़कों के साथ खेलते तो विनर बनकर ही निकलते थे। आहिस्ते आहिस्ते गेल का खेल उनकी जरूरत बनता गया। उनके खेल और प्रतिभा को आसपास के लोग पहचानने लगे थे।

क्रिस गेल को क्रिकेट में सफलता मिलती गई उन्हे अंडर 14 में जगह मिल गई । लेकिन गेल को अंडर 16 में जगह नहीं मिली। गेल के चमकते करियर को डूबते देख लोकास क्रिकेट क्लब ने गेल को निखारने का जिम्मा अपने कंधो पर ले लिया। लोकास क्रिकेट क्लब उनके लिए टर्निंग पॉइंट तो साबित हुआ ही साथ ही यह क्लब गेल की जिंदगी में किसी फरिश्ते की तरह था। गेल ज्यादातर अपने इंटरव्यू में लोकास क्रिकेट क्लब का जिक्र करना नहीं भूलते। गरीबी की चोट खाया लड़का अब चमकने को तैयार था। टिन की छत के नीचे क्रिकेटर बनने का सपना देख रहे गेल का चयन अंडर 19 टीम में हो गया था। 6 फुट 2 इंच बाएं हाथ का बल्लेबाज जब पहली बार अंडर 19 क्रिकेट खेलने मैदान पर उतरा तो हर कोई देखकर गेल की कद काठी का दीवाना हो गया था। इतना ही नहीं गेल ने इस दीवानेपन को अपने गगनचुंबी छक्कों से दुगना कर दिया। उनके इस शानदार खेल ने चयनकर्ता को नेशनल टीम में चुनने के लिए मजबूर कर दिया।

साल 1998 में क्रिस गेल ने जमैका की तरफ से फर्स्ट क्लास क्रिकेट में पदार्पण किया। क्रिस गेल ने चयनकर्ताओं को निराश नहीं किया और अपने शानदार प्रदर्शन की बदौलत गेल को 11 महीने बाद अंतर्राष्ट्रीय एकदिवसीय क्रिकेट में डेब्यू करने का मौका भी मिल गया। 11 सितंबर 1999 को भारत के खिलाफ गेल का वनडे क्रिकेट यादगार नहीं रहा। इसके बावजूद क्रिस गेल को ठीक एक साल बाद 16 मार्च 2001 को जिम्बाब्वे के खिलाफ सफेद जर्सी में टेस्ट खेलने का सुनहरा मौका भी मिल गया। वेस्टइंडीज की टीम में गेल खेल जरूर रहे थे लेकिन उनके प्रदर्शन से कोई खुश नही था। गेल जिसके लिए जाने जाते थे वो छाप छोड़ने से गेल अभी दूर थे। अब तक के क्रिकेट करियर में बिल्कुल ही सरल तरीके से चल रहे क्रिस एक साल 2002 में वो रफ्तार मिल गई जिसके लिए दुनिया आज क्रिस गेल को जानती है। इसी साल गेल ने एक साल के क्रिकेट कैलेंडर में 1000 रन का आंकड़ा छू लिया। और अपना स्थान ब्रायन लारा और विवियन रिचर्ड्स जैसे दिग्गज बल्लेबाजों की श्रेणी में लिखवा दिया। साल 2005 में जिम्बाब्वे दौरे पर गई कैरिबियाई टीम में अपना लोहा मनवा चुके क्रिस गेल ने दूसरे टेस्ट में जिम्बाब्वे के खिलाफ 317 रनों की अद्भुत क्षमता वाली पारी खेली थी। यह गेल का पहला तिहरा शतक था। उनके इस खेल से विरोधी टीम में खौफ का मंजर था। इसी टेस्ट में गेल को आउट करने के लिए 11 खिलाड़ियों को गेंदबाजी तक करनी पड़ी थी।

साल 2005 ये वो साल था जब दुनिया ने क्रिस गेल की बीमारी का वो राज जाना जिससे गेल भी परिचित नहीं थे। ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ बैटिंग कर रहे गेल को सांस लेने में तकलीफ हुई तो जांच में पता चला की गेल के दिल में छेद है। गेल ने दिल की सर्जरी कराई और यह बात उन्होंने अपने माता पिता से भी नहीं बताई। सफल सर्जरी के बाद गेल ने तय किया था कि दूसरी मिली जिंदगी को पूरे उत्साह के साथ आगे बढ़ाना है। और गेल ऐसा किया भी …. सर्जरी से लौटने के बाद मैदान पर दुनिया ने नए क्रिस गेल को देखा। गेल ने अपनी खेल और जिंदादिली का परिचय साल 2006 में भारत में होने वाली चैंपियन ट्रॉफी में दिखाया। गेल ने इस टूर्नामेंट में तीन शतक ठोक डाले। और अपनी टीम को फाइनल तक पहुंचा दिया। गेल को मैन ऑफ द टूर्नामेंट से नवाजा गया।

टेस्ट और वनडे क्रिकेट में अपनी चमक बिखेरने के बाद हेनरी क्रिस्टोफर गेल आधुनिक क्रिकेट यानी टी 20 क्रिकेट के लिए बखूबी तैयार थे। साल 2007 में साउथ अफ्रीका में हुए पहले टी 20 विश्व कप में क्रिस गेल ने अफ्रीका के खिलाफ टी 20 क्रिकेट में पहला शतक लगाने वाले बल्लेबाज बन गए। तब दुनिया के क्रिकेट पंडितो को ऐसा लगा की यह बल्लेबाज इस फॉर्मेट में कुछ बड़ा करेगा। और ऐसा ही हुआ। आईपीएल के पहले सीजन में क्रिस गेल को कोलकाता नाइट राइडर्स ने अपनी टीम में शामिल किया। लेकिन गेल और कोलकाता का साथ ज्यादा दिनों तक नहीं रहा। गेल को जब रॉयल चैलेंजर्स बैंगलोर ने टीम में शामिल किया तो गेल के यूनिवर्स बॉस बनने की कहानी इसी आईपीएल टीम से शुरू हुई। क्रिस गेल ने बैंगलोर से खेलते हुए कई अदभुत अविश्वसनीय अकल्पनीय रिकॉर्ड बनाए और तोडे भी। अभी तक गेल की बैटिंग के दीवाने सिर्फ वेस्टइंडीज में ही थे। लेकिन आईपीएल में गेल के तूफान ने भारतीय प्रशंसकों को अपनी ओर मनमोहित करने पर मजबूर कर दिया। गेल ने आईपीएल में इतने रिकॉर्ड बनाए है कि उसका जिक्र करना वीडियो में मुमकिन नहीं है। फिर भी आईपीएल में गेल की एक खास पारी का जिक्र करना जरूरी है। पुणे के खिलाफ गेल ने महज 65 गेंदों में 175 रन बनाए थे। गेल की इस पारी को देखकर क्रिकेट जगत सन्न रह गया था। साल 2010 में श्री लंका के खिलाफ खेली गई 333 रनों की पारी ने गेल को और खास बना दिया था। यहीं से गेल क्रिकेट में 333 नंबर की जर्सी पहनने लगे थे। साल 2015 के विश्व कप में जिम्बाब्वे के खिलाफ गेल ने अपने खेल का एक और शानदार नमूना पेश किया। जब उन्होंने वनडे क्रिकेट में दोहरा शतक जड़ा डाला। और ऐसा करने वाले क्रिस गेल दुनिया के पहले खिलाड़ी बन गए। क्रिकेट की पिच में अक्रामक और मजाकिया अंदाज के लिए भी जाने जाने वाले क्रिस गेल कई बार कंट्रोवर्सी का शिकार भी हुए है।

दोस्तों, चलते-चलते आपको यूनिवर्स बॉस क्रिस गेल के कुछ शानदार कीर्तिमान और इतिहासिक उपलब्धियों की चर्चा भी कर लेते है। गेल ने अपने 23 साल के लंबे करियर मे जमैका, वस्टारशायर, वेस्टर्न ऑस्ट्रेलिया वारियर्स, वेस्टइंडीज, कोलकाता नाइट राइडर्स और रॉयल चैलेंजर्स बैंगलोर जैसी कई टीमों की तरफ से क्रिकेट खेला है। क्रिस गेल ने 159 प्रथम श्रेणी क्रिकेट में 11602 रन बनाए है। जिसमे एक एक तिहरा शतक भी शामिल है। अगर अंतरराष्ट्रीय टेस्ट क्रिकेट की बात की जाए तो 88 टेस्ट मैचों में लगभग 40 की औसत से 5848 रन बनाए है। जिसमे 12 शतक और दो दोहरे शतक शामिल है। वनडे क्रिकेट के 267 मैच में एक दोहरे शतक, 22 शतक और 46 अर्द्ध शतक की बदौलत 9169 रन बनाए है। और अब बात करते हैं उस फॉर्मेट की जिसने क्रिस गेल को क्रिकेट के बादशाह से लेकर यूनिवर्स बॉस का तमगा दिया। टी 20 क्रिकेट की .. 44 वर्षीय क्रिस गेल के ओवर ऑल टी 20 क्रिकेट की बात करें तो 453 मैचों मे 36 की औसत से 14321 रन बनाए है। जिसमे 22 शतक 87 अर्द्ध शतक शामिल है। बल्ले के साथ गेंद से भी कमाल करने वाले क्रिस गेल ने सभी फॉर्मेट की क्रिकेट और लीग में लगभग 300 विकेट हासिल किए है।

क्या क्रिकेट इतिहास में हेनरी क्रिस्टोफर गेल के बाद कोई दूसरा यूनिवर्स बॉस बन पाएगा ?

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